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Womens Hockey: कोच हरेंद्र की महिला हॉकी टीम को सलाह, बाले- भविष्य के बारे में सोचो

Coach Advice to India Womens Hockey team: भारतीय महिला हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी। टीम के मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने अपनी टीम को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अतीत को भुलाकर भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।

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भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी। (फोटो- Hockey India X)

Photo : Twitter

Coach Advice to India Womens Hockey Team: अतीत को भुलाकर भविष्य के बारे में सोचो’ लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 की तैयारी में जुटे भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने अपनी टीम को यही सलाह दी है। टोक्यो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहने के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक के लिये क्वालीफाई नहीं कर सकी जहां पुरूष टीम ने लगातार दूसरा कांस्य पदक जीता। हरेंद्र ने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा,‘जब मैं इस टीम के साथ फिर जुड़ा तो हमने इस पर विस्तार से बात की। मैं हमेशा सकारात्मक चीजें देखता हूं और मेरा मानना है कि उनके लिये कुछ बेहतर भविष्य के गर्भ में छिपा है।’

उन्होंने कहा ,‘‘ लड़कियां टूटी हुई थी और पूरा देश उनके ओलंपिक नहीं खेल पाने से दुखी था लेकिन मैने उनसे कहा कि कुछ बड़ा आपका इंतजार कर रहा है ।’इस साल अप्रैल में भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच बनने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में उन्होंने कहा ,‘‘ मैने उनसे कहा कि अतीत को भूल जाओ और भविष्य के बारे में सोचो । मैने इस मिशन को ‘रोड टू एलए 2028’ नाम दिया है और मुझे लगता हे कि यह सफर खूबसूरत होगा।’ इससे पहले 2017 . 18 में भारतीय महिला टीम के कोच रहे हरेंद्र ने कहा कि उनका लक्ष्य 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक है।

उन्होंने कहा,‘भारत ने हॉकी में पहला ओलंपिक पदक 1928 में लॉस एंजिलिस में ही जीता था जब ध्यान चंद जी उस टीम का हिस्सा थे । इससे बेहतर क्या होगा कि हम सौ साल बाद उसी स्थान पर ओलंपिक पदक जीतें।’ यह पूछने पर कि वह टीम में क्या बदलाव लाना चाहते हैं, उन्होंने कहा,‘पिछले चार साल में जो अच्छा काम हुआ है, मैं उसे नहीं बदलूंगा । इसके बाद एक एक करके देखेंगे कि कहां गलतियां हुई है । मैने खिलाड़ियों से कहा है कि प्रो लीग में अच्छे नतीजे नहीं मिल सकते हैं क्योंकि हमें एलए 2028 की नींव तैयार करनी है।’

यह पूछने पर कि अमेरिका पुरूष हॉकी टीम के मुख्य कोच के रूप में अच्छी तनख्वाह छोड़कर उन्होंने लौटने का फैसला क्यो किया, उन्होंने कहा ,‘‘ मैं अपने देश लौटकर और यहां महिला सशक्तिकरण के लिये अपना योगदान देकर खुश हूं। मुझे लगता है कि भारतीय हॉकी की सेवा का यह सुनहरा मौका है।’ उन्होंने कहा,‘मैने अमेरिका में कोचिंग के दौरान बहुत कुछ सीखा । रियो ओलंपिक के बाद हमें समझ में आया कि अब नहीं जागे तो बहुत देर हो जायेगी । हमारे पास भारत में हॉकी में इतनी प्रतिभा और बेहतरीन बुनियादी ढांचा है जिसने मुझे प्रेरित किया । महिला हॉकी में भी प्रतिभा की कमी नहीं है और पदक जीतना असंभव नहीं है।’

भारतीय जूनियर हॉकी टीम को 2016 विश्व कप जिताने वाले 55 वर्ष के कोच ने कहा कि उनकी प्राथमिकता फिटनेस का स्तर सुधारना है। उन्होंने कहा,‘इस टीम की फिटनेस का स्तर आधुनिक हॉकी के अनुकूल नहीं है । इसमें रफ्तार, दमखम, लचीलापन और निर्णय लेने की क्षमता सब आता है । इनके पास तकनीकी कौशल है और फिटनेस के मानदंडों पर खरे उतरने पर बड़े टूर्नामेंटों में प्रदर्शन अच्छा होगा।’ हरेंद्र ने कहा कि उनकी दीर्घकालिक योजना टीम में ‘एसएसटी’ यानी साइंस, स्किल और टेक्नॉलॉजी का समावेश करने की है। उन्होंने कहा,‘हमें एसएसटी पर जोर देना होगा । हम यूरोपीय शैली पर खेल रहे हैं जिसका पहले अभाव था । हमने ब्लूप्रिंट तैयार किया है और जमीनी स्तर से राष्ट्रीय शिविर तक कोचिंग का एक मंत्र होना चाहिये।’

(भाषा)

Shekhar Jha
शेखर झाauthor

शेखर झा टाइम्स नाउ हिंदी (Timesnowhindi.com) की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। वे मूल रूप से बिहार के मिथिलांचल से हैं। मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले शेखर ने शौकिया तौर पर साल 2011 में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। ये शौक वक्त के साथ जूनुन में बदल गया। उनके पास खेल पत्रकारिता का 12 साल का अनुभव है। क्रिकेट के अलावा टेनिस, कबड्डी और बैडमिंटन में खास रुचि है। खिलाड़ियों की बायोग्राफी पढ़ना उन्हें पसंद हैं। शेखर ने सुरेश रैना, संजय बांगड़, दीप्ति शर्मा, राधा यादव जैसे नामचीन भारतीय क्रिकेटरों सहित बैडमिंटन के स्टार भारतीय खिलाड़ियों लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं। शेखर की प्रारंभिक शिक्षा बिहार में हुई। बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे जहां उनका पत्रकारिता से पहला परिचय हुआ। रायपुर के अग्रसेन कॉलेज में ग्रेजुएशन करते हुए पत्रकारिता का काम शुरू किया और इसके बाद रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्धालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और बतौर प्रोफेशनल अपने करियर की शुरुआत की। शेखर ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2011 में ईटीवी छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश के साथ की। इस संस्थान में 6 महीने काम करने के बाद उन्होंने स्थानीय अखबार नेशनल लुक के साथ प्रिंट मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका समूह के छत्तीसगढ़ संस्करण से जुड़े और वहां तीन साल तक बतौर सब-एडिटर/रिपोर्टर सेवाएं दीं। इसके बाद भारत के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया समूह दैनिक भास्कर के डीबी स्टार में रिपोर्टर की भूमिका अदा की और कई बड़े खुलासे स्थानीय स्तर पर किए। इसके बाद अपमे गृह राज्य बिहार की राजधानी पटना में दैनिक जागरण समूह के आईनेक्स्ट वेंचर से जुड़े। 8 महीने के छोटे कार्यकाल के बाद दैनिक भास्कर के रायपुर संस्करण में बतौर रिपोर्टर वापसी हुई। रायपुर में दूसरी पारी के तीन साल के कार्यकाल के सफल निर्वहन के बाद मैनेजमेंट ने भास्कर के भोपाल स्थित नेशनल न्यूजरूम में ट्रांसफर कर दिया। जहां 17 महीने स्पोर्ट्स डेस्क पर बड़े इवेंट्स पर काम किया। इस दौरान इंडियन प्रीमियर लीग, टोक्यो ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजन का व्यापक कवरेज किया। भास्कर के नेशनल न्यूज रूम में डिजिटल जर्नलिज्म का ककहरा सीखने के बाद फरवरी,2023 में टाइम्स ग्रुप के साथ जुड़ने का मौका मिला। तब से वह टाइम्स नाउ नवभारत की हिंदी वेबसाइट की स्पोर्ट्स डेस्क पर बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पान्डन्ट कार्यरत हैं। इस दौरान शेखर ने इंडियन प्रीमियर लीग, आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 को कवर किया।

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