अध्यात्म

योग और ग्रहों का क्या है संबंध? जानिए किस योग और प्राणायाम से कौन सा ग्रह होता है मजबूत

Yoga and Astrology : ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों का अशुभ प्रभाव कई प्रकार की बीमारियों का कारण बनता है। ऐसे में यदि मेडिकल हेल्प के साथ ग्रहों के अनुरूप हम योग या प्राणायाम करते हैं तो अधिक लाभ होता है।

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किस योग से कौन सा रोग होता है ठीक

Yoga and Astrology : भारतीय संस्कृति में योग और ज्योतिष दोनों को प्राचीन आध्यात्मिक विद्याओं के रूप में देखा जाता है। जहां ज्योतिष व्यक्ति के जीवन में ग्रहों की स्थिति, उनके प्रभाव और कर्मों के परिणामों को समझने का माध्यम माना जाता है, वहीं योग शरीर, मन और चेतना के संतुलन की प्रक्रिया है। प्राचीन योग ग्रंथों जैसे पतंजलि योगसूत्र, हठ योग प्रदीपिका और घेरंड संहिता में शरीर, प्राण और मन के संतुलन पर विशेष जोर दिया गया है। वहीं वैदिक ज्योतिष ग्रंथों में ग्रहों को शरीर, मन और जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़ा गया है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह कमजोर स्थिति में होता है तो उसके अशुभ प्रभाव कई प्रकार के रोगों को जन्म देते हैं। ऐसे में मंत्र, दान, पूजा-पाठ के साथ योग और प्राणायाम को भी मन और शरीर को संतुलित करने का एक माध्यम माना गया है। योग और प्राणायाम भी ग्रहों के अशुभ प्रभावों को दूर करने का एक माध्यम हैं। जिस प्रकार औषधियां हमारे शरीर में रोगों के उत्तरदायी वात-पित्त और कफ संतुलित करती हैं। इसी प्रकार से योग और प्राणायाम भी इनको संतुलित करके हमें निरोगी बनाते हैं। हालांकि यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि योग और प्राणायाम मुख्य रूप से स्वास्थ्य, मानसिक शांति और ऊर्जा संतुलन के लिए किए जाते हैं। ग्रहों को मजबूत करने का संबंध धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं कि किन योग से कौन सा ग्रह मजबूत होता है।

किस योग से कौन सा ग्रह होता है मजबूत

ज्योतिष में स्वास्थ्य के लिए मुख्य रूप से छठे, आठवें और बारहवें भाव का अध्ययन किया जाता है। छठा भाव रोग और शत्रुओं से संबंधित माना जाता है, आठवां भाव अचानक आने वाली परेशानियों और लंबी बीमारी से जुड़ा माना जाता है, जबकि बारहवां भाव अस्पताल, खर्च और कमजोरी का संकेतक माना जाता है।

इसके अलावा लग्न और लग्नेश की स्थिति भी स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। मजबूत लग्न और शुभ ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर माना जाता है। वहीं अशुभ ग्रहों का प्रभाव स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की ओर संकेत कर सकता है। ज्योतिष के अनुसार कुछ योग और प्राणायाम ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करते हैं। अगर चिकित्सकीय इलाज के साथ इनको भी लाइफस्टाइल में शामिल किया जाए तो रिजल्ट काफी अच्छा मिलता है।

सूर्य ग्रह

सूर्य ग्रह

सूर्य ग्रह

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, आत्मविश्वास, पिता, नेतृत्व क्षमता, सम्मान और ऊर्जा का कारक माना गया है। सूर्य को ग्रहों का राजा भी कहा जाता है। शरीर में सूर्य का संबंध जीवन शक्ति और पाचन अग्नि से भी जोड़ा जाता है। सूर्य के अशुभ प्रभाव से आंखों से जुड़ी समस्या, हृदय संबंधी परेशानी, हड्डियों में कमजोरी, सिर दर्द, शरीर में ऊर्जा की कमी, बुखार जैसी समस्या हो सकती है।

योग परंपरा में सूर्य नमस्कार को सूर्य ऊर्जा से जुड़ा हुआ अभ्यास माना जाता है। नियमित सूर्य नमस्कार करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायता मिलती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर माना जाता है, उनके लिए सुबह सूर्य की ओर ध्यान करते हुए सूर्य नमस्कार करना शुभ माना जाता है। ऐसे लोगों को सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम, प्राणायाम के साथ सूर्य ध्यान से लाभ होता है।

चंद्रमा

चंद्रमा

चंद्रमा

ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है। चंद्रमा का संबंध मन की चंचलता से भी बताया गया है। चंद्रमा का अशुभ प्रभाव मानसिक तनाव, चिंता, अनिद्रा, डिप्रेशन जैसी स्थिति, फेफड़ों से जुड़ी परेशानी, शरीर में जल तत्व का असंतुलन जैसी समस्याओं को जन्म देता है।

योग शास्त्र में मन को शांत करने के लिए ध्यान और प्राणायाम का विशेष महत्व बताया गया है। भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कमजोर चंद्रमा वाले लोगों को भ्रामरी प्राणायाम, नाड़ी शोधन, ध्यान आदि करने चाहिए।

मंगल

मंगल

मंगल ग्रह

मंगल को ऊर्जा, साहस, पराक्रम, भूमि, रक्त और आत्मबल का ग्रह माना जाता है। मंगल की अधिक ऊर्जा कई बार क्रोध और जल्दबाजी के रूप में भी दिखाई दे सकती है। मंगल का अशुभ प्रभाव रक्त संबंधी रोग, चोट लगना, दुर्घटना की संभावना, सूजन, त्वचा पर फोड़े-फुंसी, पित्त संबंधी समस्या दे सकता है। मंगल के लिए पद्मासन, वज्रासन, शीतली प्राणायाम करने चाहिए। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, मंगल के असंतुलित प्रभाव को शांत करने के लिए ऐसे योग अभ्यास उपयोगी माने जाते हैं, जो शरीर की ऊर्जा को संतुलित करें।

बुध

बुध

बुध ग्रह

बुध ग्रह बुद्धि, वाणी, गणना क्षमता, शिक्षा, व्यापार और संचार का कारक माना जाता है। बुध का अशुभ प्रभाव त्वचा रोग, नसों से जुड़ी परेशानी, मानसिक भ्रम, बोलने में समस्या, तनाव के कारण होने वाली परेशानियां देता है। बुध को अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, ध्यान करके शुभ बनाया जा सकता है। योग में श्वास पर नियंत्रण रखने वाले अभ्यास एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं। अनुलोम-विलोम प्राणायाम नाड़ियों के संतुलन के लिए प्रसिद्ध है।

गुरु

गुरु

गुरु ग्रह

देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, शिक्षा, संतान और भाग्य का कारक माना जाता है। गुरु का अशुभ प्रभाव मोटापा, लिवर संबंधी समस्या, मधुमेह की संभावना, पाचन तंत्र की परेशानी देता है। गुरु के लिए कपालभाति, नाड़ी शोधन, ध्यान करना चाहिए। योग परंपरा में कपालभाति और नाड़ी शोधन प्राणायाम को शरीर और मन की शुद्धि से जोड़ा गया है। नाड़ी शोधन विशेष रूप से मानसिक संतुलन और ध्यान क्षमता बढ़ाने वाला अभ्यास माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से गुरु की शुभता के लिए ज्ञान प्राप्ति, धार्मिक कार्य और सात्विक जीवन शैली को महत्वपूर्ण माना गया है।

शुक्र

शुक्र

शुक्र ग्रह

शुक्र ग्रह को प्रेम, सौंदर्य, कला, वैवाहिक सुख, भौतिक सुविधाओं और रचनात्मकता का कारक माना जाता है। शुक्र का अशुभ प्रभाव हार्मोन संबंधी समस्या, प्रजनन अंगों से जुड़ी परेशानी, मूत्र रोग, त्वचा संबंधी समस्या लाता है। शुक्र का शुभ प्रभाव पाने के लिए धनुरासन, हलासन, मूलबंध अभ्यास करना चाहिए। योग में धनुरासन और हलासन जैसे आसनों को शरीर के लचीलेपन और संतुलन से जोड़ा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र को मजबूत करने के लिए जीवन में सुंदरता, स्वच्छता, कला और रिश्तों में मधुरता बनाए रखना भी शुभ माना जाता है।

शनि

शनि

शनि ग्रह

शनि ग्रह कर्म, अनुशासन, धैर्य, न्याय और मेहनत का प्रतिनिधित्व करते हैं। शनि को जीवन में जिम्मेदारी और सीख देने वाला ग्रह माना जाता है। शनि का अशुभ प्रभाव जोड़ों का दर्द, गठिया, हड्डियों की कमजोरी, नसों की समस्या, लंबे समय तक चलने वाली बीमारी देता है। शनि का शुभ प्रभाव व इन रोगों से मुक्ति मंडूकासन, वज्रासन, शीतली प्राणायाम, ध्यान से मिल सकती है। योग में ध्यान, स्थिर आसन और श्वास नियंत्रण को मानसिक धैर्य बढ़ाने वाला माना गया है। मंडूकासन, शीतली प्राणायाम और ध्यान जैसे अभ्यास शरीर और मन को स्थिर करने में सहायक माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि की शुभता के लिए अनुशासित जीवन सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

राहु केतु

राहु केतु

राहु-केतु

राहु और केतु को ज्योतिष में छाया ग्रह माना जाता है। इनका संबंध भ्रम, मानसिक स्थिति, आध्यात्मिकता और अचानक होने वाले बदलावों से जोड़ा जाता है। राहु का अशुभ प्रभाव एलर्जी, नशे से जुड़ी समस्या, मानसिक तनाव, अनजानी बीमारी, त्वचा और सांस से जुड़ी परेशानी व केतु का अशुभ प्रभाव नसों की कमजोरी, चोट, रहस्यमयी बीमारी, मानसिक बेचैनी, एकाग्रता में कमी देता है। वहीं, राहु के लिए ध्यान, नाड़ी शोधन, प्राणायाम व केतु के लिए ध्यान, अनुलोम-विलोम, पद्मासन करना चाहिए। योग दर्शन में ध्यान को मन की स्थिरता और आत्म जागरूकता का माध्यम बताया गया है। नियमित ध्यान और प्राणायाम मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

योग और ज्योतिष में नाड़ियों का महत्व

हठ योग परंपरा में शरीर की नाड़ियों का विशेष महत्व बताया गया है। योग ग्रंथों में इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ी का वर्णन मिलता है। इड़ा नाड़ी को चंद्र ऊर्जा से और पिंगला नाड़ी को सूर्य ऊर्जा से जोड़ा जाता है। जब इन दोनों का संतुलन होता है तो साधक के अंदर मानसिक और शारीरिक संतुलन बढ़ता है। ज्योतिष में भी सूर्य और चंद्रमा को जीवन के महत्वपूर्ण आधार माना गया है। सूर्य को आत्मा और चंद्रमा को मन का कारक बताया गया है।

किस समय करने चाहिए योग

योग शास्त्र में सुबह के समय, विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त को साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस समय वातावरण शांत होता है और मन अधिक एकाग्र रहता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भी शुभ समय में किए गए कार्यों का प्रभाव अधिक सकारात्मक माना जाता है। इस कारण कई योग साधक सूर्योदय से पहले ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में ग्रहों को जीवन की अलग-अलग शक्तियों का प्रतीक माना गया है। योग और प्राणायाम शरीर, मन और ऊर्जा को संतुलित करने का माध्यम हैं।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष और योग शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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