Yamuna Chhath 2026 Vrat Katha: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र मास की षष्टी तिथि के दिन पर यमुना जयंती या फिर यमुना छठ का महापर्व मनाया जाता है। यमुना जयंती हिंदू धर्म का एक बहुत ही पवित्र पर्व माना गया है, जो यमुना नदी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यमुना जी की पूजा और व्रत करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन यमुना नदी में स्नान करने और श्रद्धा से पूजा करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। आज यमुना छठ या यमुना जयंती मनाई जा रही है, इस दिन विधि विधान के साथ पूजा पाठ करने तो व्रत की कथा पढ़ने का खास महत्व है। देखें आज यमुना छठ के पावन दिन पर पूजा कैसे करें, पूजा से पहले जरूर पढ़ें यमुना छठ व्रत कथा, कहानी इन हिंदी।
Yamuna Chhath Ki Kahani In Hindi, यमुना जयंती की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्यदेव और संज्ञा (छाया) के संयोग से यमराज और यमुना जी का जन्म हुआ। यमुना जी अपने भाई यमराज से अत्यंत स्नेह करती थीं। वे बार-बार उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण देती थीं, लेकिन यमराज अपने कार्यों में व्यस्त रहने के कारण नहीं आ पाते थे।एक समय यमुना जी ने अपने भाई को प्रसन्न करने के लिए कठोर व्रत और तप किया। उनकी सच्ची भक्ति से प्रभावित होकर यमराज अंततः उनके घर पहुंचे। यमुना जी ने उनका आदर-सत्कार किया, तिलक लगाया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया।
यमराज इस प्रेम और सेवा से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने यमुना जी से वर मांगने को कहा। तब यमुना जी ने प्रार्थना की कि जो भी व्यक्ति इस दिन उनके जल में स्नान करे और श्रद्धा से पूजा करे, उसे यमलोक के कष्टों का सामना न करना पड़े। यमराज ने यह वरदान स्वीकार कर लिया।
तभी से यमुना जयंती के दिन व्रत और स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन पूजा करने से आयु, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और आस्था का सुंदर प्रतीक भी है।
यमुना जी का अवतरण कैसे हुआ था
यमुना जी का अवतरण हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्यदेव और संज्ञा (या छाया) के घर हुआ था। वे यमराज की बहन मानी जाती हैं। कहा जाता है कि पृथ्वी पर जीवों के कल्याण और पापों से मुक्ति देने के लिए यमुना जी ने नदी के रूप में अवतार लिया। उनका उद्गम हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं से माना जाता है। यमुना का जल पवित्र और जीवनदायी माना जाता है, जिसमें स्नान करने से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यमुना छठ पूजा विधि
- प्रातः जल्दी उठकर यमुना नदी या घर में जल से स्नान करें।
- साफ वस्त्र पहनकर यमुना माता की पूजा करें।
- दीपक जलाएं, फूल, अक्षत और प्रसाद अर्पित करें।
- यमुना स्तुति और व्रत कथा का पाठ करें।
- जरूरतमंदों को दान करें।
यमुना जयंती का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति, आयु में वृद्धि और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। यह व्रत भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है और परिवार में खुशहाली लाता है।
