4 Unlucky Number: भारत में अधिकतर लोग 13 नंबर को अशुभ मानते हैं। वहीं, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों में अंक 4 को अशुभ माना जाता है। यहां पर लोगों के मन में 4 नंबर का इतना डर है कि वो चार नंबर का कमरा ही नहीं खरीदते हैं। साथ ही 4 फूल, 4 फल, 4 चॉकलेट और कोई भी गिफ्ट 4 नंबर में देने से बचते हैं। इसके अलावा लिफ्ट में '4' की जगह 'F' लिखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी इसके पीछे के कारण के बारे में जानने का प्रयास किया है? यदि नहीं, तो चलिए जानें एशिया के कुछ देशों में चार नंबर को खौफनाक क्यों माना जाता है।
नंबर 4 से इतना खौफ क्यों?
सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के अनुसार, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों में नंबर 4 को अशुभ मानने के पीछे का मुख्य कारण भाषा है। दरअसल, यहां पर नंबर '4' का उच्चारण 'मृत्यु' के समान होता है, जिसके कारण लोग इस अंक को बोलने से डरते हैं। जब भी कोई व्यक्ति कोरियाई भाषा में नंबर 4 का उच्चारण करता है तो ऐसा लगता है कि वो शब्द 'मौत' बोल रहा है। यहां 4 के लिए ‘सा’ शब्द का उच्चारण होता है, जो कि ‘मृत्यु’ के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्द का भी उच्चारण है. माना जाता है कि 4 अंक से जुड़ी चीजों का इस्तेमाल करने से दुर्भाग्य अट्रैक्ट होता है, जिससे परेशानियां, बीमारियां या मौत करीब आती है।
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'4' की जगह 'F' का किया जाता है इस्तेमाल
एशियाई के कई देशों में आपको अंक 4 की जगह 'F' लिखा हुआ दिख जाएगा। चार को अंग्रेजी में 'Fourth' कहते हैं, जिसके पहले अक्षर 'F' का ही यहां इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि लिफ्ट, घर-होटल के कमरों, अस्पतालों के वार्ड और ऊंची इमारतों के फ्लोर्स पर भी '4' की जगह 'F' लिखा जाता है।
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जर्मनी में अंक 4 को माना जाता है शुभ
जर्मनी के लोग अंक 4 को भाग्य, सुख, समृद्धि, खुशहाली, संतुलन और समानता आदि का प्रतीक मानते हैं, जो कि चार पत्ती वाले तिपतिया घास से जुड़ा है। वहीं, अंक 13 को यहां के लोग अशुभ मानते हैं। खासकर, शुक्रवार के दिन पड़ने वाली 13 तारीख को ज्यादा अशुभ माना जाता है।
