Vinayak Chaturthi 2025 Muhurat, Katha, Moonrise Time Today: आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर विनायक चतुर्थी मनाया जाएगा। आज वही खास दिन है। इस दिन गणेश जी का व्रत करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। आज भक्त व्रत करते हैं। यहां से आप जानें कि आज विनायक चतुर्थी की पूजा कितने बजे की जाएगी। साथ ही विनायक चतुर्थी की व्रत कथा भी देख सकते हैं। चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन का भी खास महत्व होता है। इसलिए यहां से आप जान सकते हैं कि आज चांद कितने बजे निकलेगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त (Vinayak Chaturthi Puja Time Today)-
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:35 AM से 05:22 AM
- विजय मुहूर्त - 02:12 PM से 03:01 PM
- गोधूलि मुहूर्त - 06:14 PM से 06:38 PM
- निशिता मुहूर्त - 11:48 PM से 12:36 AM
आज चांद कितने बजे निकलेगा? (Aaj Chand Kab Niklega)-
- सूर्योदय - 06:10 AM
- सूर्यास्त - 06:14 PM
- चन्द्रोदय- 08:58 AM
- चन्द्रास्त- 08:08 PM
विनायक चतुर्थी व्रत कथा (Vinayak Chaturthi Vrat Katha In Hindi)-
विनायक चतुर्थी व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के किनारे बैठे थे। माता पार्वती ने शिव जी से चौपड़ खेलने के लिए कहा। इस खेल में हार-जीत का फैसला करने के लिए भगवान शिव ने कुछ तिनके एकत्रित कर उसका एक पुतला बनाकर उसकी प्राण-प्रतिष्ठा कर दी। भगवान शिव ने उस पुतले से कहा कि 'बेटा, हम चौपड़ खेलना चाहते हैं, इसीलिए तुम बताना कि हम दोनों में से कौन हारा और कौन जीता?'
उसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती के बीच खेल का प्रारंभ हो गया। यह खेल 3 बार खेला गया और तीनों ही बार माता पार्वती जीत गईं। खेल समाप्त होने पर उस बालक से हार-जीत का फैसला करने के लिए कहा, तो उस बालक ने पार्वती माता की जगह महादेव को विजयी बताया। यह सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो गईं और उन्होंने बालक को लंगड़ा होने और कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। बालक ने माता पार्वती से माफी मांते हुए कहा कि माता मुझसे अज्ञानतावश ऐसा हुआ है। बालक द्वारा क्षमा मांगने पर माता का दिल पिघल गया उन्होंने कहा- 'यहां गणेश पूजन के लिए नागकन्याएं आएंगी, उनके कहे अनुसार गणेश व्रत करो, ऐसा करने से तुम्हारे कष्ट दूर होंगे' यह कहकर माता पार्वती चली गईं।
एक वर्ष के बाद उस स्थान पर नागकन्याएं आईं, नागकन्याओं से भगवान गणेश के व्रत की विधि जानने के बाद बालक ने 21 दिन लगातार गणेशजी का व्रत किया। जिसके परिणामस्वरूप गणेशजी प्रसन्न हुए। उन्होंने बालक को मनोवांछित फल मांगने के लिए कहा। बालक ने कहा- 'हे विनायक! मुझे इतनी शक्ति दीजिए कि मैं अपने पैरों से चलकर कैलाश पर्वत पर पहुंच सकूं'। भगवान गणेश ने बालक को वरदान दे दिया। इसके बाद वह बालक कैलाश पर्वत पर पहुंचा और उसने अपनी कथा भगवान शिव को सुनाई। चौपड़ वाले दिन से माता पार्वती शिवजी से नाराज हो गई थीं। देवी को मनाने के लिए भगवान शिव ने भी बालक के बताए अनुसार 21 दिनों तक भगवान गणेश का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से माता पार्वती की नाराजगी दूर हो गई और वो स्वयं भगवान शिव से मिलने पहुंच गईं।
तब भगवान शंकर ने माता पार्वती को इस व्रत के बारे में बताया। यह सुनकर माता पार्वती के मन में अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जागृत हुई। तब माता पार्वती ने भी 21 दिन तक श्री गणेश का व्रत किया। व्रत के 21वें दिन कार्तिकेय स्वयं माता पार्वतीजी से मिलने चले आए। तभी से ये व्रत समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला व्रत माना जाता है।
