Vastu Tips For Works at Night: वास्तु शास्त्र में घरेलू कामकाज को लेकर कुछ नियमों के बारे में बताया गया है. केवल वास्तु शास्त्र ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म शास्त्रों में भी घर के कामकाज को लेकर कुछ विशेष दिन और समय निर्धारित किए गए हैं। लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास खाने-पीने और कामकाज को लेकर कोई समय निर्धारित नहीं है। लोग किसी भी दिन और किसी भी समय अपनी सुविधानुसार कोई भी काम कर लते हैं, जिसका भयंकर परिणाम भविष्य में भुगतना पड़ सकता है। वास्तु में कुछ ऐसे कामों के बारे में बताया गया है, जिन्हें सूर्यास्त के बाद करने से बचना चाहिए। यदि आप रात्रि में घर के इन कामों को करते हैं तो इससे नकारात्मक ऊर्जा तेजी से बढ़ती है और इसका प्रभाव घर-परिवार पर गंभीर रूप से पड़ता है। जानते हैं किन कार्यों को रात्रि में करने से बचना चाहिए।
रात्रि में या सूर्यास्त के बाद इन कामों को करना होता है अशुभ
कपड़े धोना और सूखाना
कुछ लोग रात में कपड़े धोते हैं और सूखाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे गलत कहा गया है। कभी भी सूर्यास्त के बाद कपड़े नहीं धोने चाहिए और घर के बाहर नहीं सूखाना चाहिए। इसके पीछे यह मान्यता है कि..
रात में कपड़े साफ करने से नकारात्मक उर्जा का कपड़ों में प्रवेश हो जाता है और इसी ऊर्जा का प्रभाव आपके शरीर पर पड़ता है।
मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। ऐसे में जब आप धोने के बाद कपड़ों को खुले आसमान में फैलाते हैं तो इसपर नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर जाती है।
इसलिए कपड़ों को हमेशा धूप में ही सुखाएं इससे कपड़ों से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
यदि कसी कारण रात में कपड़े धोने भी पड़े तो कपड़ों को खुले आसमान के नीचे या घर के बाहर न सुखाएं।
सूर्यास्त के बाद झाड़ू न लगाएं
घर को साफ-सुथरा रखना अच्छी आदत है और ऐसे घर पर मां लक्ष्मी का वास होता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी सूर्यास्त के बाद या रात्रि में घर पर झाड़ू नहीं लगाएं। इससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। यदि किसी कारणवश रात्रि में झाड़ू लगाना भी पड़े तो कचरे को घर के बाहर न निकालें।
बाल-नाखून न काटे
शास्त्रों में रात्रि के समय बाल-नाखून काटना भी वर्जित माना गया है। ऐसा करने से घर पर नकारात्मकता बढ़ती है। इसके अलावा सप्ताह के मंगलवार, गुरुवार और शनिवार के दिन भी नाखून काटना अशुभ माना जाता है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
