Vaishakh Amavasya Vrat Katha (वैशाख अमावस्या व्रत कथा): वैशाख महीने की अमावस्या को वैशाख अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस साल ये अमावस्या 8 मई को पड़ रही है। मान्यता है इस अमावस्या का व्रत रखने से कुंडली में मौजूद तमाम दोषों से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है। इसलिए सनातन धर्म में वैशाख अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। यहां आप जानेंगे वैशाख अमावस्या की व्रत कथा।
Vaishakh Amavasya Vrat Katha (वैशाख अमावस्या व्रत कथा)
धार्मिक मान्यताओं अनुसार प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था जिनता नाम धर्मवर्ण था। वे बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे और ऋषि-मुनियों का बहुत सम्मान करते थे। एक बार उन्होंने किसी महात्मा के मुख से सुना कि कलयुग में भगवान विष्णु का स्मरण करने से ज़्यादा पुण्य चीज कुछ नहीं है। बस यह बात ब्राह्मण धर्मवर्ण के मन में बस गई। जिसके बाद उन्होंने सांसारिक सुखों का त्याग कर दिया और सन्यास ले लिया। इसके बाद वे भ्रमण करने लगें। एक बार वह भ्रमण करते-करते पितृलोक पहुंचे जहां उन्होंने देखा कि उनके पितर बहुत कष्ट में हैं। उनसें अपने पितरों की ये हालत देखी नहीं गई तब उन्होंने पितरों से इस कष्ट का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि तुम्हारे सन्यास लेने के कारण ही हमारी ऐसी हालत हुई है क्योंकि अब हमारे लिए पिंडदान करने वाला कोई नहीं है।
ये सब सुनकर धर्मवर्ण को बहुत दुःख हुआ और उन्होंने इस कष्ट से मुक्ति का उपाय पूछा तो उनके पितरों ने बताया कि यदि तुम पुनः अपना गृहस्थ जीवन शुरू करो और संतान पैदा करो, इसके अलावा वैशाख अमावस्या के दिन विधि विधान पिंडदान करो तो हमें हमारे कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा। तब धर्मवर्ण ने अपना सन्यासी जीवन त्याग दिया और फिर से सांसारिक जीवन अपना लिया। इसके बाद उन्होंने वैशाख अमावस्या के दिन विधिविधान से पिंडदान कर अपने पितरों को मुक्ति दिलाई। कहते हैं तभी से हिन्दू धर्म में वैशाख अमावस्या का महत्व और भी ज्यादा हो गया।
