Vaibhav Lakshmi Vrat Katha, Aarti: वैभव लक्ष्मी व्रत कथा और आरती
- Authored by: Srishti
- Updated Dec 5, 2025, 06:34 AM IST
Vaibhav Lakshmi Vrat Katha, Aarti (वैभव लक्ष्मी व्रत कथा और आरती): घर में बरकत, धन-लाभ और कर्ज से मुक्ति के लिए हर शुक्रवार को वैभव लक्ष्मी माता का व्रत किया जाता है। यहां से आप वैभव लक्ष्मी व्रत कथा और वैभव लक्ष्मी माता की आरती के लिरिक्स देख सकते हैं।
वैभव लक्ष्मी व्रत कथा और आरती (pic credit: canva)
Vaibhav Lakshmi Vrat Katha, Aarti (वैभव लक्ष्मी व्रत कथा और आरती): वैभव लक्ष्मी हिंदू धर्म में लक्ष्मी माँ के एक विशेष स्वरूप की पूजा है, जिसे वैभव लक्ष्मी व्रत के रूप में जाना जाता है। हर शुक्रवार को वैभव लक्ष्मी का व्रत भी किया जाता है। ये व्रत खासतौर से सौभाग्य, समृद्धि, शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए होता है। इस दिन पूजा के बाद वैभव लक्ष्मी माता की कथा पढ़ी जाती है और फिर आरती की जाती है। यहां से आप वैभव लक्ष्मी व्रत कथा और आरती दोनों ही देख सकते हैं।
वैभव लक्ष्मी व्रत कथा (Vaibhav Laxmi Vrat Katha)
बहुत साल पहले की बात है। एक नगर में मीना और उसके पति सुख से रहते थे। मीना धार्मिक प्रवृत्ति और संतोषी स्वभाव की महिला थी। ऐसे ही उनका पति भी विवेकी था और मीना का बहुत सम्मान करता था। दोनों अपने काम में मगन रहते और किसी की बुराई नहीं करते थे। सभी उनकी आदर्श गृहस्थी के उदाहरण देते थे। लेकिन समय का चक्र चला और मीना का पति गलत रास्ते पर चल पड़ा। उसकी संगत भी खराब हो गई और वह नशे और जुए की लत में फंस गया।
अपने घर के ऐसे हालात देखकर मीना टूट गई थी। लेकिन उसने समझदारी से अपनी गृहस्थी की एक डोर थामे रखी और भगवान पर भरोसा कर अपनी जिम्मेदारी निभाने लगी। साथ ही वह नियमित पूजा करती रही।
एक दिन मीना की तबीयत ठीक नहीं थी। उसने दो दिन से कुछ खाया नहीं था। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। उसने देखा कि बाहर एक बूढ़ी औरत खड़ी है जिसके चेहरे पर एक अलौकिक तेज था। उनका भव्य चेहरा करुणा और ममता से छलक रहा था। मीना ने उनको देखा तो उसके मन में शांति का अनुभव हुआ। वह उन्हें अंदर लाई। उसके पास बैठाने के लिए फटी लेकिन साफ चादर थी। उसने बूढ़ी महिला को सम्मान के साथ उस पर बैठाया।
बूढ़ी औरत ने मीना से कहा - लगता है तुमने मुझे पहचाना नहीं। तुम हर शुक्रवार को लक्ष्मीजी के मंदिर आती हो ना। वहीं भजन-कीर्तन में मैं भी होती हूं। तुम बहुत दिन से दिखी नहीं तो मैं तुमको देखने चली आई। उनकी बातें सुनकर मीना की आंखें भर गईं और वह उनके गले लगकर रोने लगी। बूढ़ी औरत ने मीना को सब्र रखने को कहा। मीना ने आंखें पोंछते हुए अपनी व्यथा उनको सुनाई।
मीना की बातें सुन दिव्य महिला ने कहा कि सुख दुख को आता जाता रहता है और जीवन में कर्म के फल भुगतने ही होते हैं। लेकिन रात के बाद सवेरा तो होता ही है। तब उस महिला ने मीना को वैभव लक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी और साथ ही व्रत करने की विधि भी बताई।
दिव्य महिला ने कहा -लक्ष्मीजी के व्रत को वरदलक्ष्मी व्रत या वैभवलक्ष्मी व्रत भी कहा जाता है। यह सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाला माना जाता है। साथ ही व्यक्ति को सुख-संपत्ति की प्राप्ति भी होती है। यह सुन मीना को बहुत हिम्मत मिली और उसने मन ही मन वैभव लक्ष्मी व्रत करने का संकल्प लिया। जब उसने आंखें खोलीं तो वहां कोई महिला नहीं थी। मीना को समझ आ गया कि उसको साक्षात् लक्ष्मी जी ने दर्शन दिए हैं।
अगले दिन शुक्रवार को मीना ने सुबह स्नानादि कर स्वच्छ कपड़े पहनें। फिर विधि के अनुसार व्रत किया। शाम को पूजा करके सभी को प्रसाद भी वितरित किया। अपने पति को भी प्रसाद खिलाया। कुछ दिनों में मीना के पति का स्वभाव सही होने लगा। उसने मीना पर हाथ उठाना बंद कर दिया।
मीना ने पूरी श्रद्धा के साथ इक्कीस शुक्रवार तक वैभवलक्ष्मी का व्रत किया। व्रत के आखिरी शुक्रवार को उद्यापन किया। उस दिन खीर का प्रसाद बनाया और 7 महिलाओं को वैभवलक्ष्मी व्रत की 7 पुस्तकें भेंट में दीं। अंत में मीना ने मां लक्ष्मी से प्रार्थना की - हे मां धनलक्ष्मी, मैंने आपको समर्पित व्रत वैभवलक्ष्मी आज पूर्ण किया है। मुझसे कोई त्रुटि हुई हो तो मुझे माफ करना और मेरी विपत्तियों को दूर करो। हे मां, सबका कल्याण करो। फिर मीना ने मां लक्ष्मी को प्रणाम किया।
शाम को मीना का पति घर आया तो उसका व्यवहार पूरी तरह बदल गया था। उसने हाथ जोड़कर मीना से माफी मांगी। और मेहनत करके अच्छी जिंदगी जीने का वादा किया। मीना ने अपने पति को भी वैभव लक्ष्मी व्रत के बारे में बताया। उसने भी मां लक्ष्मी का व्रत करके आशीर्वाद प्राप्त किया और फिर उनके घर में धन और सुख की कोई कमी नहीं रही।
जय वैभव लक्ष्मी माता, मैया जय वैभव लक्ष्मी माता आरती (Vaibhav Laxmi Aarti)
ओम जय वैभव लक्ष्मी माता, मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
भक्तों के हितकारिनी सुख वैभव दाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
वैभव लक्ष्मी मां का नाम जो लेता, सब सुख संपत्ति पाता।
मैया अन्न धन सब पाता, दुख दारिद्र मिट जाता, मनवांछित फल पाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
भक्तों की हितकारिनी, सुख आनंद करनी।
जो भी तुमको ध्याता, सब सदगुण पाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता ।
तू है जग की माता, जग पालक रानी।
हाथ जोड़ गुण गाते, जग के सब प्राणी।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
तेरी शरण जो आता, मैया भक्ति तेरी पाता।
मां तेरी ममता पा के, अंत स्वर्ग जाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता
ओम जय वैभव लक्ष्मी माता, मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।
भक्तों के हितकारिनी सुख वैभव दाता।।
मैया जय वैभव लक्ष्मी माता।