अध्यात्म

क्यों खास है उज्जैन का नगर पूजन, जानिए पूरे शहर में क्यों बहाई जाती है मदिरा की धार

Ujjain Mahashtami Nagar Pujan 2026: चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर उज्जैन में नगर पूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान चौबीस खंबा माता मंदिर में मां महामाया और महालया की विशेष पूजा अर्चना भी की गई। इसके साथ ही माता को मदिरा का भोग भी लगाया गया। सुबह से मंदिर परिसर में भक्तों का सैलाब देखने को मिला।

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उज्जैन नगर पूजन

Ujjain Mahashtami Nagar Pujan 2026: चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के उज्जैन में भव्य नगर पूजन का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर चौबीस खंबा माता मंदिर में माता महामाया और महालया की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। परंपरा के अनुसार इस दिन माता को मदिरा का भोग लगाया जाता है और पूरे शहर की सुख-समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।

महाअष्टमी के दिन सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी (निरंजनी अखाड़ा) के साथ कई साधु-संत भी शामिल हुए।

माना जाता है कि इस मंदिर में प्राचीन समय में राजा विक्रमादित्य स्वयं माता महामाया और महालया की पूजा करते थे। उसी परंपरा को आज भी आगे बढ़ाया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि में यह पूजन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष द्वारा और अश्विन नवरात्रि में जिला प्रशासन की ओर से किया जाता है।

मां को लगाया गया मदिरा का भोग

इस विशेष पूजन में माता को मदिरा का भोग लगाया जाता है, जो उज्जैन की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। पूजन के दौरान एक विशेष कलश में मदिरा भरी जाती है, जिसके नीचे छेद होता है। इस कलश को लेकर नगर भ्रमण किया जाता है, जिससे रास्ते भर मदिरा की धार बहती रहती है।

यह धार शहर के विभिन्न देवी मंदिरों तक पहुंचती है, जिसे देवी शक्तियों को अर्पित किया जाता है। इस परंपरा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।

27 किलोमीटर तक चलता है अनुष्ठान

महाअष्टमी के दिन होने वाला यह नगर पूजन लगभग 27 किलोमीटर लंबी यात्रा के रूप में संपन्न होता है। इसकी शुरुआत चौबीस खंबा माता मंदिर से होती है और यह यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचती है। इस यात्रा में अखाड़ा परिषद के सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी और हजारों श्रद्धालु पैदल शामिल होते हैं। यात्रा के अंत में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर पर शिखर ध्वज चढ़ाकर इसका समापन किया जाता है।

राजा विक्रमादित्य के समय से चली आ रही परंपरा

उज्जैन में नगर पूजन की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसकी शुरुआत राजा विक्रमादित्य के समय से मानी जाती है। उस समय राजा स्वयं नगर की रक्षा और समृद्धि के लिए यह पूजन करते थे। वर्तमान में इस परंपरा को जिला प्रशासन और अखाड़ा परिषद के सहयोग से निभाया जा रहा है। चैत्र नवरात्रि में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और अश्विन नवरात्रि में जिला कलेक्टर इस अनुष्ठान को संपन्न कराते हैं।

देश की सुख-समृद्धि के लिए की गई प्रार्थना

महाआरती और पूजन के दौरान देश, प्रदेश और शहर की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना की गई। इसके साथ ही भारत को विश्व गुरु बनाने की कामना भी माता से की गई। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस विशेष पूजा से शहर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। यही कारण है कि हर साल इस परंपरा को पूरे श्रद्धा भाव और उत्साह के साथ निभाया जाता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारी author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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