Third Mangla Gauri Vrat Katha 2024: मंगला गौरी व्रत के दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है। मंगला गौरी का व्रत सावन महीने के मंगलवार के दिन की जाती है। आज यानि 6 अगस्त को तीसरा मंगला गौरी का व्रत रखा जाएगा। मंगला गौरी व्रत के दिन माता पार्वती और भगवान शिव जी की पूजा की जाती है। मंगला गौरी व्रत करने से व्रती को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मंगला गौरी व्रत के दिन मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करना और मां पार्वती की पूजा करना बहुत ही शुभ होता है। आइए यहां पढ़ें मंगला गौरी व्रत कथा।
मंगला गौरी व्रत कथा (Mangla Gauri Vrat Katha 2024)
पौराणिक कथा के अनुसार, बहुत पुराने समय में एक धर्मपाल नामक सेठ किसी नगर में निवास करता था। उस सेठ के पास बहुत ही दन दौलत थी। वो शिव भगवान शिव और माता पार्वती का परम भक्त था। उस सेठ का विवाह एक गुणवान कन्या से हुआ था पर उन दोनों की कोई भी संतान नहीं थी। संतान ना होने के कारण दोनो पति- पत्नि बहुत ही दुखी रहते थे। सेठ सोचने लगा अगर उसकी कोई भी संतान नहीं हुई तो उसकी संपत्ति का मालिक कौन बनेगा। उसका सारा इतना बड़ा कारोबार कौन संभालेगा। संतान प्राप्ति को लेकर सेठ की पत्नि ने पंडित जी से सलाह ली।पंडित जी सेठ की पत्नि को माता पार्वती का व्रत करने और पूजा करने की सलाह दी। पंडित की सलाह मानकर माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा- अर्चना करने लगी। सेठ की पत्नि से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उसको दर्शन दिए और बोली मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत ही प्रसन्न हूं। तुमको जो भी वरदान मांगना है मांग लो। मैं तुम्हारी सारी इच्छाओं की पूर्ति करूंगी। इस दौरान सेठ की पत्नि ने मां पार्वती से संतान प्राप्ति की कामना प्रकट की। माता पार्वती ने उन्हें संतान की प्राप्ति का वरदान दे दिया, लेकिन उनकी संतान अल्पआयु थी।
