Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर चंदा चोरी मामले के बीच ट्रस्ट सीईओ पद के लिए सही उम्मीदवार की तलाश कर रहा है। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट में नई नियुक्तियों को लेकर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट में नई नियुक्तियों की उन्हें कोई जानकारी नहीं है और यह पूरी तरह ट्रस्ट प्रबंधन का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की भी जानकारी नहीं है कि ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए आवेदन की तारीख 18 जुलाई तय की गई है या नहीं।
ट्रस्ट के अधीन काम करेगा सीईओ
नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ ट्रस्ट के अधीन काम करेगा और वह स्वतंत्र नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की कोशिश रहती है कि अधिक से अधिक भुगतान डिजिटल माध्यम से हो, ताकि नकद लेन-देन को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि नकदी का लेन-देन जितना कम हो, उतना ही बेहतर है।
डिजिटल माध्यम से करें दान: नृपेंद्र मिश्रा
उन्होंने कहा, "अगर दान डिजिटल माध्यम से आता है तो यह बहुत अच्छी बात है। जितना कम कैश हैंडल होगा, उतना बेहतर रहेगा।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और दान प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं तथा जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं।
क्या है सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया?
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए गठित सर्च कमेटी की पहली बैठक दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें सीईओ पद के लिए आवश्यक योग्यताओं और चयन प्रक्रिया पर चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि उम्मीदवार का स्नातक होना, प्रशासन या वित्तीय क्षेत्र में कम से कम 20 साल का अनुभव होना और हिंदू धर्म का अनुयायी होना अनिवार्य होगा। जिन उम्मीदवारों को मंदिर प्रबंधन का अनुभव होगा, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब राम मंदिर चढ़ावा (दान) मामले की जांच जारी है। सूत्रों के मुताबिक, सर्च कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावड़े शामिल रहे। समिति ने सीईओ चयन की पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के साथ पात्रता के मानदंड भी निर्धारित किए। सर्च कमेटी का लक्ष्य एक महीने के भीतर चयन प्रक्रिया पूरी कर नए सीईओ की नियुक्ति करना है। ट्रस्ट का मानना है कि अनुभवी और प्रशासनिक क्षमता वाले अधिकारी की नियुक्ति से मंदिर के संचालन और प्रबंधन को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
