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Things related with Lord Shiva: भगवान शिव से जुड़ी ये चीजें दर्शाती हैं उनका व्यक्तित्व, जानिए इनके नाम

Things related with Lord Shiva: देवों के देव महादेव कहे जाने वाले भगवान शिव संसार की मोह-माया से परे हैं। अपने भक्तों पर कृपा बरसाने वाले भोलेनाथ के जीवन से जुड़ी ऐसी पांच वस्तुएं हैं जो कि उनके जीवन से जुड़ी मानी जाती हैं। चलिए जानते इनके नाम जानते हैं।

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Things related with Lord Shiva

Things related with Lord Shiva: पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव को त्रिमूर्ति का अंश माना जाता है जो संसार की बुराइयों और असुरी शक्तियों का विनाश करते हैं। भगवान शिव को देवता, मानव और दानव तीनों ही पूजते हैं। भगवान शिव का मुख्य स्वभाव वैराग्य और त्याग का है। इनसे जुड़ी 6 ऐसी चीजें हैं जो इनके स्वरूप को दर्शाती हैं और इनको प्रिय हैं।

त्रिशूल

त्रिशूल भगवान शिव का मुख्य शस्त्र है जो कि इनकी शक्ति और अधिकार का प्रतिनिधित्व करता है। त्रिशूल के तीन कांटे सृजन, संरक्षण, और विनाश का प्रतीक माने जाते हैं। शैव अद्वैत वेदांत में भगवान शिव के त्रिशूल को पिंड, ब्रह्मांड, और परम शक्ति से जोड़ा जाता है।

मृगछाला या बाघछाला

मृगछाला या बाघछाला वो आसन है जिसपर बैठकर भगवान शिव ध्यान और तप करते हैं तथा जिसे वो शरीर पर धारण करते हैं। ऐसा कहा जाता है क‍ि इस पर बैठकर साधना करने से मन की अस्थिरता दूर होती है। मृगछाला त्याग की प्रतीक मानी जाती है। ये भगवान शिव की तपस्या से जुड़ा हुआ है।

पिनाक धनुष

इस शक्तिशाली दिव्य धनुष का उल्लेख शिव पुराण सहित रामायण में भी मिलता है। भगवान शिव ने इसी धनुष से त्रिपुरा सुर के तीनों लोकों का नाश किया था। मान्यता है कि इस धनुष को भोलेनाथ स्वयं ही बनाया था। ये धनुष अत्यंत ही प्रलयंकारी माना जाता है जो कि भगवान शंकर के उग्र रूप को दर्शाता है।

त्रिपुंड तिलक

सनातन हिंदू धर्म में तिलक का विशेष महत्व माना जाता है। हर देवी-देवता के मस्तक पर तिलक होता है, ऐसे ही भगवान शिव के मस्तक और देह पर त्रिपुंड तिलक होता है। सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण जैसे तीनों ही गुणों को धारण करने के कारण भोलेनाथ त्रिपुंड तिलक लगाते हैं। त्रिपुंड में तीन धारियां होती हैं और बीच में लाल रंग की बिंदु होती है। ये भगवान शिव की शक्ति का प्रतीक मानी जाता है।

रुद्राक्ष

माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। रुद्राक्ष में भगवान शिव का वास होता है जिसे प्राचीन काल से ही आभूषण के रूप में, सुरक्षा के लिए, ग्रह शांति के लिए और आध्यात्मिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रुद्राक्ष कई प्रकार, रंग और मुख वाले होते हैं, जिनकी शक्तियां भिन्न होती हैं।

भगवान शिव का चक्र

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा वर्णित है कि भगवान विष्णु की तरह ही भगवान शिव के पास भी चक्र था। भगवान शंकर के चक्र का नाम भवरेंदु बताया जाता है। प्राचीन और प्रामाणिक शास्त्रों के अनुसार इसका निर्माण भगवान शंकर ने किया था। जिसे द्वापर युग में भगवान कृष्ण को सौंप दिया गया था।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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