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Aaj Janmashtami Ka Chand Kab Niklega 2025: पूजा सामग्री लिस्ट, शुभ मुहूर्त और कृष्ण जन्म का समय, आज चांद कब निकलेगा?

Krishna Janmashtami 2025 Puja Muhurat, Moon Rise Time Today (आज चाँद कब निकलेगा) Aarti, Mantra, Moon Rising Time (लड्डू गोपाल की पूजा आरती मंत्र ): बोलो राधे राधे। कान्हा जी का जन्म हो गया है। हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इसे कृष्ण अष्टमी या गोकुलाष्टमी भी कहा जाता है। इस साल जन्माष्टमी आज यानी 16 अगस्त को मनाया गया। कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा का समय क्या है, कृष्ण जन्म कब होगा.. ये सारी जानकारी आपको यहां से मिलेगी। आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की आरती लिखित में: यहाँ देखिए
Aaj Janmashtami Ka Chand Kab Niklega 2025 LIVE: जन्माष्टमी की पूजा सामग्री लिस्ट, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानें | श्री कृष्ण जन्माष्टमी कथा, इस कथा के बिना भगवान को भोग भी नहीं है स्वीकार, पढ़ें कृष्ण जन्म की कहानी

शहर का नाम चांद निकलने का समय 2025
भोपाल- 11:44 PM
मथुरा- 11:33 PM
रायपुर- 11:32 PM
वृंदावन- 11:32 PM
रांची- 11:14 PM
नोएडा- 11:01 PM
लखनऊ- 11:22 PM
गुरुग्राम- 11:33 PM
कानपुर- 11:22 PM
चण्डीगढ़- 11: 32 PM
बेंगलुरु- 11:14 PM
मुम्बई- 12:00 AM
चेन्नई- 11:56 PM
जयपुर- 11:42 PM
हैदराबाद- 11:54 PM
अहमदाबाद- 12:00 AM
कोलकाता- 12:01 AM
पटना- 11:08 PM

सृष्टिUpdated Aug 17, 2025, 12:19 IST
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 Aaj Janmashtami Ka Chand Kab Niklega 2025: पूजा सामग्री लिस्ट, शुभ मुहूर्त और कृष्ण जन्म का समय, आज चांद कब निकलेगा?

Aaj Janmashtami Ka Chand Kab Niklega 2025: पूजा सामग्री लिस्ट, शुभ मुहूर्त और कृष्ण जन्म का समय, आज चांद कब निकलेगा?

Krishna Janmashtami 2025 Date, Time (श्री कृष्ण जन्माष्टमी पूजा मुहूर्त) Moon Rising Time ((आज चाँद कब निकलेगा)) Vrat Katha, Aarti, Mantra (लड्डू गोपाल की पूजा आरती मंत्र ): श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। उनका जन्म मथुरा में माता देवकी और वासुदेव के घर कारागार (जेल) में हुआ था। श्रीकृष्ण के जन्म के दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। हर साल जन्माष्टमी को भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर सेलिब्रेट किया जाता है। इस साल कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 11:49 से शुरू होकर 16 अगस्त की रात 09:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के हिसाब से इस साल ये खास दिन आज यानी 16 अगस्त 2025, शनिवार को है। यहां से आपको जन्माष्टमी से जुड़ी सारी जानकारी मिलेगी-

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पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन पंचांग से जानें शुभ मुहूर्त-

  • अभिजीत- 11;59 AM से 12;54 PM
  • विजय- 02:23 PM से 03:25 PM
  • गोधूलि- 07:25 PM से 07:45 AM
  • ब्रम्हमुहूर्त- 04:14 AM से 05:06 AM
  • निशीथ काल- 05:42 PM से 07:23 PM
  • संध्या पूजा- 06:21 PM से 07:09 PM


आज चांद कब निकलेगा? / जन्माष्टमी पर चांद कितने बजे निकलेगा?

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 की पूजा का मुहूर्त क्या है?
साल 2025 में श्री कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त देर रात 12:04 से 12:47 बजे तक है।

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मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी कब है?
साल 2025 में मथुरा, वृंदावन और इस्कॉन मंदिर में भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त के दिन मनाई जाएगी।

जन्माष्टमी 2025 पर चंद्रोदय कितने बजे होगा?
श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन चंद्रोदय रात 11:32 पर होगा।

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कृष्ण जन्माष्टमी की सरल पूजा विधि यहां देखें

1. ध्यानम्- इस मंत्र के साथ भगवान कृष्ण की प्रतिमा का ध्यान करें
ॐ तमद्भुतं बालकम् अम्बुजेक्षणम्, चतुर्भुज शंख गदायुधायुदम् ।
श्री वत्स लक्ष्मम् गल शोभि कौस्तुभं, पीतम्बरम् सान्द्र पयोद सौभगं ।।
महार्ह वैदूर्य किरीटकुन्डल त्विशा परिष्वक्त सहस्रकुन्डलम् ।
उद्धम कांचनगदा कङ्गणादिभिर् विरोचमानं वसुदेव ऐक्षत ।।
ध्यायेत् चतुर्भुजं कृष्णं, शंख चक्र गदाधरम्।
पीतम्बरधरं देवं माला कौस्तुभभूषितम् ।।
ॐ श्री कृष्णाय नमः। ध्यानात् ध्यानम् समर्पयामि ।।

2. आवाहनं- इसके बाद नीचे लिखे मंत्र से कृष्ण भगवान की प्रतिमा के सामने आवाहन मुद्रा दिखाकर, उनका आवाहन करें।
ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्।
स भूमिं विश्वतो वृत्वा सुत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम् ।।
आगच्छ देवदेवेश तेजोराशे जगत्पते ।
क्रियमाणां मया पूजां गृहाण सुरसत्तमे ।।
आवाहयामि देव त्वां वसुदेव कुलोद्भवम् ।
प्रतिमायां सुवर्णादिनिर्मितायां यथाविधि ।।
कृष्णम् च बलबनं च वसुदेवं च देवकीम् ।
नन्दगोप यशोदाम् च सुभद्राम् तत्र पूजयेत् ।।
आत्मा देवानां भुवनस्य गभों यथावशं चरति देवेषः ।
घोषा इदस्य शण्विर न रूपं तस्मै वातायहविषा विधेम ।।
श्री क्लीं कृष्णाय नमः, सपरिवार सहित, श्री बालकृष्णं आवाहयामि ।।

3. आसनं- अब पांच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने छोड़ें।
पुरुष एवेदगं सर्वम् यद्भुतं यच्छ भव्यम्।
उतामृतत्वस्येशानः यदन्नेनातिरोहति ।।
राजाधिराज राजेन्द्र बालकृष्ण महीपते।
रत्न सिंहासनं तुभ्यं दास्यामि स्वीकुरु प्रभो।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। आसनं समर्पयामि।।

4. पाद्य - भगवान श्री कृष्ण को आसन प्रदान करने के बाद नीचे दिए गए मंत्र को बोलते हुए पाद्य समर्पित करें। पाघ का मतलब है चरण धोने के लिए जल।
एतावानस्य महिमा अतो ज्यायागंश्च पूरुषः ।
पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि।।
अच्युतानन्द गोविन्द प्रणतार्ति विनाशन।
पाहि मां पुन्डरीकाक्ष प्रसीद पुरुषोत्तम ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । पादोयो पाचम् समर्पयामि।।

5. अर्घ्य- श्री कृष्ण को अर्घ्य समर्पित करें।
त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादोऽस्येहाभवात्पुनः ।
ततो विश्वङ्ग्यक्रामत् साशनानशने अभि ।।
परिपूर्ण परानन्द नमो नमो कृष्णाय वेधसे।
गृहाणार्ध्वम् मया दत्तम् कृष्णा विष्णोर्जनार्दन ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। अर्घ्यम् समर्पयामि ।।

6. आचमनीयं (भगवान को जल अर्पित करें)
तस्माद्विराडजायत विराजो अधि पूरुषः।
स जातो अत्यरिच्यत पश्चाद्ध‌मिमथो पुरः ।।
नमः सत्याय शुद्धाय नित्याय ज्ञान रूपिणे ।
गृहाणाचमनं कृष्ण सर्व लोकैक नायक ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। आचमनीयं समर्पयामि ।।

7. स्नानं- आचमन के बाद ये मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को जल से स्नान कराएं।
यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत ।
वसन्तो अस्यासीदाज्यम् ग्रीष्म इध्मश्शरद्धविः ।।
ब्रह्माण्डोदर मध्यस्थैस्तिथैश्च रघुनन्दन ।
स्नापयिश्याम्यहं भक्त्या त्वं गृहाण जनार्दना ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। मलापकर्श स्नानं समर्पयामि ।।

8. वस्त्र- इस मंत्र के साथ श्रीकृष्ण को मौली के रूप में वस्त्र समर्पित करें।
ॐ तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन् पुरुषं जातमग्रतः ।
तेन देवा अयजन्त साध्या ऋषयश्च ये।।
ॐ उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भुनोऽस्मि राष्ट्रस्मिन्कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।
तप्त कान्चन संकाशं पीताम्बरम् इदं हरे।
सगृहाण जगन्नाथ बालकृष्ण नमोस्तुते।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। वस्त्रयुग्मं समर्पयामि ।।

9. यज्ञोपवीत- वस्त्र अर्पित करने के बाद ये मंत्र बोलते हुए श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत समर्पित करें।
तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः संभृतं पृषदाज्यम् ।
पशुगॅस्तागंश्चक्रे वायव्यान् आरण्यान् ग्राम्याश्चये ।।
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मी नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णदमे गृहात् ।।
श्री बालकृष्ण देवेश श्रीधरानन्त राघव ।
ब्रह्मसुत्रम्चोत्तरीयं गृहाण यदुनन्दन ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । यज्ञोपवीतम् समर्पयामि ।।

10. गंध- ये मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को सुगन्धित द्रव्य चढ़ाएं।
तस्माद्यज्ञात्सर्वहुतः ऋचः सामानि जज्ञिरे।
छन्दांसि जज्ञिरे तस्मात् यजुस्तस्मादजायत ।।
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ।।
कुम्कुमागरु कस्तूरि कर्पूरं चन्दनं तता।
तुभ्यं दास्यामि राजेन्द्र श्री कृष्णा स्वीकुरु प्रभो।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । गन्धम् समर्पयामि ।।

11. आभरणं हस्तभूषण- नीचे दिए गए मंत्र को पढ़ते हुए श्रीकृष्ण जी की प्रतिमा को श्रृंगार के लिए आभूषण समर्पित करें।
गृहाण नानाभरणानि कृष्णाय निर्मितानि ।
ललाट केठोत्तम कर्ण हस्त नितम्ब हस्तांगुलि भूषणानि ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। आभरणानि समर्पयामि ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। हस्तभूषणं समर्पयामि ।

12. नाना परिमल द्रव्य- मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को सुगन्धित द्रव्य समर्पित करें।
ॐ अहिरिव भोगैः पर्येति बाहुं जयाया हेतिं परिबाधमानः ।
हस्तघ्नो विश्वा वयुनानि विद्वान्पुमान्पुमांसं परि पातु विश्वतः ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। नाना परिमल द्रव्यं समर्पयामि ।।

13. पुष्प- मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को पुष्प और तुलसी माला चढ़ाएं।
माल्यादीनि सुगन्धीनि, माल्यतादीनि वैप्रभो।
मया हितानि पूजार्थम्, पुष्पाणि प्रतिगृह्यताम् ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । पुष्पाणि समर्पयामि ।।

14. अंग पूजा- नीचे दिए गए मंत्र को पढ़ते हुए भगवन कृष्ण के अंग-देवताओं का पूजन करना चाहिए। इस पूजन के लिए अपने बाएं हाथ में चावल, फूल और चंदन लेकर हर मन्त्र का उच्चारण करते हुए दाहिने हाथ से फूल श्री कृष्ण की मूर्ति के पास छोड़ें।
ॐ श्री कृष्णाय नमः। पादी पूजयामि ।।
ॐ राजीवलोचनाय नमः । गुल्फौ पूजयामि ।।
ॐ नरकान्तकाय नमः। जानुनी पूजयामि ।।
ॐ वाचस्पतये नमः। जंघै पूजयामि।।
ॐ विश्वरूपाय नमः । ऊरून् पूजयामि ।।
ॐ बलभद्रानुजाय नमः। गुहां पूजयामि।।
ॐ विश्वमूर्तये नमः। जघनं पूजयामि।।
ॐ गोपीजन प्रियाय नमः। कटिं पूजयामि ।।
ॐ परमात्मने नमः। उदरं पूजयामि।।
ॐ श्रीकण्टाय नमः। हृदयं पूजयामि।।
ॐ यज्ञिने नमः। पार्थी पूजयामि।।
ॐ त्रिविक्रमाय नमः । पृष्ठदेहं पूजयामि।।
ॐ पद्मनाभाय नमः । स्कन्धौ पूजयामि।।
ॐ सर्वास्त्रधारिणे नमः। बाहुन् पूजयामि।।
ॐ कमलानाथाय नमः । हस्तान् पूजयामि।।
ॐ वासुदेवाय नमः । कण्ठं पूजयामि ।।
ॐ सनातनाय नमः । वदनं पूजयामि ।।
ॐ वसुदेवात्मजाय नमः । नासिकां पूजयामि ।।
ॐ पुण्याय नमः । श्रोत्रे पूजयामि ।।
ॐ श्रीशाय नमः । नेत्राणि पूजयामि ।।
ॐ नन्दगोपप्रियाय नमः। भ्रवौ पूजयामि ।।
ॐ देवकीनन्दनाय नमः। भ्रूमध्यं पूजयामि ।।
ॐ शकटासुरमर्धनाय नमः । ललाटं पूजयामि ।।
ॐ श्री कृष्णाय नमः । शिरः पूजयामि ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः सर्वांगाणि पूजयामि ।।

15. धूपं- निम्न मन्त्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण के प्रतिमा को धूप दिखाएं।
वनस्पत्युद्भवो दिव्यो गन्धाढ्यो गन्धवुत्तमः ।
बालकृष्ण महिपालो धूपोयं प्रतिगृह्यताम् ।।
यत्पुरुषं व्यदधुः कतिधा व्यकल्पयन् ।
मुखं किमस्य कौ बाहू कावूरू पादावुच्येते ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। धूपं आघ्रापयामि ।।

16. दीपं- निम्न मंत्र को पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को दीप समर्पित करें।
साज्यं त्रिवर्ति सम्युक्तं वह्निना योजितुम् मया।
गृहाण मङ्गलं दीपं, त्रैलोक्य तिमिरापहम् ।।
भक्त्या दीपं प्रयश्चामि देवाय परमात्मने।
त्राहि मां नरकात् घोरात् दीपं ज्योतिर्नमोस्तुते ।।
ब्राह्मणोस्य मुखमासीत् बाहू राजन्यः कृतः ।
उरू तदस्य यद्वैश्यः पद्भ्यां शूद्रो अजायत ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । दीपं दूर्शयामि ।।

17. नैवेद्य-मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को नैवेद्य यानी माखन मिश्री, धनिया की पंजीरी, मिठाई आदि समर्पित करें।
ॐ कृष्णाय विद्महे। बलभद्राय धीमहि ।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात् ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः।
निर्वीषि करणार्थे तार्क्ष मुद्रा।
अमृती करणार्थे धेनु मुद्रा ।
पवित्री करणार्थे शङ्ख मुद्रा।
संरक्षणार्थे चक्र मुद्रा ।
विपुलमाय करणार्थे मेरु मुद्रा।
ॐ सत्यंतवर्तन परिषिंचामि ।
भोः ! स्वामिन् भोजनार्थं आगच्छादि विज्ञाप्य।
सौवर्णे स्थालिवैर्ये मणिगण खचिते गोघृतां ।
सुपक्कां भक्ष्यां भोज्यां च लेह्यानपि सकलमहं
जोष्यम्न नीधाय नाना शाकैरूपेतं
समधु दधि घृतं क्षीर पानीय युक्तं तांबूलं चापि
श्री कृष्णं प्रतिदिवसमहं मनसा चिंतयामि ।।
अद्य तिष्ठति यत्किञ्चित् कल्पितश्चापरंग्रिहे
पक्वान्नं च पानीयं यथोपस्कर संयुतं
यथाकालं मनुष्यार्थे मोक्ष्यमानं शरीरिभिः
तत्सर्वं कृष्णपूजास्तु प्रयतां मे जनार्दन
सुधारसं सुविपुलं आपोषणमिदं
तव गृहाण कलशानीतं यथेष्टमुपभुज्यताम् ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः ।
ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा। ॐ प्राणात्मने नारायणाय स्वाहा।
ॐ अपानात्मने वासुदेवाय स्वाहा। ॐ व्यानात्मने सङ्कर्षणाय स्वाहा।
ॐ उदानात्मने प्रद्युम्नाय स्वाहा। ॐ समानात्मने अनिरुद्धाय स्वाहा।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः।
नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्ति मे अचलां कुरुः ।
ईप्सितं मे वरं देहि इहत्र च परां गतिम् ।।
श्री कृष्ण नमस्तुभ्यम् महा नैवेद्यं उत्तमम् ।
संगृहाण सुरश्रेष्ठिन् भक्ति मुक्ति प्रदायकम् ।।
ॐ चन्द्रमा मनसो जातः चक्षोः सूर्यो अजायत ।
मुखादिन्द्रश्चाग्निश्च प्राणाद्वायुरजायत ।।
ॐ आद्राँ पुष्करिणीं पुष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः । नैवेद्यं समर्पयामि ।।
सर्वत्र अमृतोपिधान्यमसि स्वाहा ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। उत्तरापोषणं समर्पयामि ।।

18. तांबूलं- निम्न मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को ताम्बूल यानी पान, सुपारी समर्पित करें।
पूगीफलं सतांबूलं नागवल्लि दलैर्युतम् ।
ताम्बूलं गृह्यतां कृष्ण येल लवंग सम्युक्तम् ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। पूगीफल ताम्बूलं समर्पयामि ।।

19. दक्षिणा- निम्न मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण जी को दक्षिणा समर्पित करें।
हिरण्य गर्भ गर्भस्थ हेमबीज विभावसोः।
अनन्त पुण्य फलदा अधः शान्तिं प्रयच्छ मे।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। सुवर्ण पुष्प दक्षिणां समर्पयामि।।

20. महानीराजन (आरती)- ये मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण को आरती समर्पित करें।
ॐ श्रिये जातः श्रिय अनिरियाय श्रियं वयो जरितृभ्यो ददाति
श्रियं वसाना अमृतत्वमायन् भवंति सत्य स मिथामितद्रौ
श्रिय एवैनं तत् श्रियामादधाति संततमृचा वषट्कृत्यं
संतत्यै संघीयते प्रजया पशुभिः य एवं वेद ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। महानीराजनं दीपं समर्पयामि।।

21. प्रद‌क्षिणा- मंत्र पढ़ते हुए श्रीकृष्ण की बायीं से दायीं ओर की परिक्रमा करें और फूल अर्पित करें..
ॐ नाभ्या आसीदन्तरिक्षम् शीष्णों द्यौः समवर्तत ।
पदभ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात् तथा लोकां अकल्पयन् ।।
आर्द्रां यःकरिणी यष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मी जातवेदो म आवह्।।
यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च।
तानि तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणे पदे पदे ।।
अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम।
तस्मात् कारुण्य भावेन रक्ष रक्ष रमापते।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। प्रदक्षिणान् समर्पयामि।।

22. नमस्कार- निम्न मंत्र पढ़ते हुए भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार करें।
नमो ब्रह्मण्य देवाय गोब्राह्मणहिताय च।
जगदीशाय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः ।।
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ।।
नमस्तुभ्यं जगन्नाथ देवकीतनय प्रभो
वसुदेवात्मजानन्द यशोदानन्दवर्धन
गोविन्द गोकुलादर गोपीकान्त नमोस्तुते
सप्तास्यासन् परिधयः त्रिस्सप्त समिधः कृताः ।
देवा यद्यज्ञं तन्वानाः अबवघ्नन्पुरुषं पशुम् ।।
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ।।
नमः सर्व हितार्थाय जगदाधार हेतवे।
साष्टाङ्गोयं प्रणामस्ते प्रयत्नेन मया कृतः।
उरूसा शिरसा दृष्ट्वा मनसा वाचसा तथा।
पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्याम् प्रणामोष्टांगं उच्यते ।।
शात्येनापि नमस्कारान् कुर्वतः शार्ङ्गपाणये।
शत जन्मार्चितम् पापम् तत्क्षणदेव नश्यति ।।
ॐ श्री बालकृष्णाय नमः। नमस्कारान् समर्पयामि।।

23. क्षमापन (क्षमा मांगना)- निम्न मंत्र पढ़ते हुए पूजा के समय जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए श्रीकृष्ण से क्षमा प्रार्थना करें।
अपराध सहस्राणि क्रियन्ते अहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व पुरुषोत्तम ।।
यान्तु देव गणाः सर्वे पूजां आदाय पार्थिवीम् ।
इष्ट काम्यार्थ सिद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च ।।
।। श्री कृष्णार्पणमस्तु ।।

(नोट- जन्माष्टमी की ये पूजा विधि drik panchang साइट से ली गई है।) Aaj Janmashtami Ka Chand Kab Niklega 2025 LIVE: कृष्ण जन्म का समय और पूजा विधि का महत्व

AUG 17, 2025 00:36 IST

Janmashtami Paran Vidhi: जन्माष्टमी का पारण कैसे करें?

जन्माष्टमी व्रत पारण के लिए पूजा स्थान को साफ करें और भगवान कृष्ण को स्नान कराकर साफ वस्त्र पहनाएं। फिर पूजा की तरह भोग के लिए माखन, मिश्री, फल, दूध, पंचामृत आदि चढ़ाएं। तुलसी दल और फूलों की माला भी अवश्य रखें। दीपक जलाकर श्रीकृष्ण के भजन गाएं, मंत्र जाप करें और अंत में आरती करें। इसके बाद तुलसी-जल पिएं। पीना शुभ माना जाता है। फिर कुछ मीठा खाकर सात्विक भोजन लें। इस दिन तामसिक भोजन से परहेज करें और जरूरतमंद को दान अवश्य करें।
AUG 17, 2025 00:20 IST

Janmashtami Paran Time Today 2025: जन्माष्टमी का पारण कितने बजे है 2025?

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पारण आप 17 अगस्त सुबह 5:51 AM के बाद कर सकते हैं।
AUG 17, 2025 00:06 IST

Shri Krishna Janam Stuti Lyrics in Hindi: श्री कृष्ण जन्म स्तुति | भए प्रगट गोपाला हिंदी लिरिक्स

भये प्रगट गोपाला दीनदयाला यशुमति के हितकारी।
हर्षित महतारी सुर मुनि हारी मोहन मदन मुरारी ॥
कंसासुर जाना मन अनुमाना पूतना वेगी पठाई।
तेहि हर्षित धाई मन मुस्काई गयी जहाँ यदुराई॥
तब जाय उठायो हृदय लगायो पयोधर मुख मे दीन्हा।
तब कृष्ण कन्हाई मन मुस्काई प्राण तासु हर लीन्हा॥
जब इन्द्र रिसायो मेघ पठायो बस ताहि मुरारी।
गौअन हितकारी सुर मुनि हारी नख पर गिरिवर धारी॥
कन्सासुर मारो अति हँकारो बत्सासुर संघारो।
बक्कासुर आयो बहुत डरायो ताक़र बदन बिडारो॥
तेहि अतिथि न जानी प्रभु चक्रपाणि ताहिं दियो निज शोका।
ब्रह्मा शिव आये अति सुख पाये मगन भये गये लोका॥
यह छन्द अनूपा है रस रूपा जो नर याको गावै।
तेहि सम नहि कोई त्रिभुवन सोयी मन वांछित फल पावै॥
नंद यशोदा तप कियो , मोहन सो मन लाय।
देखन चाहत बाल सुख , रहो कछुक दिन जाय॥
जेहि नक्षत्र मोहन भये ,सो नक्षत्र बड़िआय।
चार बधाई रीति सो , करत यशोदा माय॥
AUG 16, 2025 23:59 IST

Krishna Janam Mantra (कृष्ण जन्म मंत्र)

ॐ देवकी-सुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्णं त्वामहं शरणं गतः॥

अर्थ- "हे देवकी के पुत्र गोविंद, हे वासुदेव, हे जगत के स्वामी!
मुझे अपना पुत्र (कृष्ण) रूप प्रदान कीजिए, मैं आपकी शरण में हूँ।"
AUG 16, 2025 23:56 IST

Moon Rise Time In Hyderabad Today: हैदराबाद में चांद निकलने का समय

हैदराबाद में आज जन्माष्टमी के दिन चांद 11 बजकर 54 मिनट पर निकल चुका है।
AUG 16, 2025 23:53 IST

Krishna Janam Time Today: आज कृष्ण भगवान का जन्म कितने बजे होगा?

भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि (12:26 AM) को हुआ माना जाता है, और इस समय को लेकर व्रत में सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। इसलिए इस साल भी कृष्ण जन्म का शुभ मुहूर्त मध्यरात्रि (निशिता पूजा) में 12:04 AM से 12:47 AM, यानी 43 मिनट तक का है।
AUG 16, 2025 23:45 IST

Moon Rise Time In Chhattisgarh Today: छत्तीसगढ़ में चांद निकलने का समय

छत्तीसगढ़ में आज चंद्र उदय का समय रात 11:32 बजे था। छत्तीसगढ़ में चांद निकल चुका है।
AUG 16, 2025 23:43 IST

Moon Rise Time In Haryana Today: हरियाणा में चांद कितने बजे निकलेगा

हरियाणा में जन्माष्टमी के दिन 11 बजकर 39 मिनट पर चांद निकलने वाला है।


Aaj Janmashtami Ka Chand Kab Niklega 2025 LIVE: जन्माष्टमी पूजा विधि और पूजा सामग्री पूरी डिटेल में
AUG 16, 2025 23:43 IST

Moon Rise Time In Delhi-NCR, Noida Today: नोएडा में आज चांद निकलने का समय

नोएडा में आज चांद 11 बजकर 1 मिनट पर निकल चुका है।


Aaj Janmashtami Ka Chand Kab Niklega 2025 LIVE: कृष्ण जन्म का समय और जन्माष्टमी की पूजा सामग्री लिस्ट देखें
AUG 16, 2025 23:45 IST

Moon Rise Time In Jaipur Today: जयपुर में आज चांद कितने बजे निकलेगा

आज जयपुर में 11 बजकर 42 मिनट पर चांद निकलने वाला है। Aaj Janmashtami Ka Chand Kab Niklega 2025 LIVE: जन्माष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त और पूजा विधि की पूरी जानकारी
AUG 16, 2025 23:25 IST

Moon Rise Time In Madhya Pradesh Today: मध्य प्रदेश में आज चांद कितने बजे निकलेगा

भोपाल- चांद का उदय आज रात लगभग 11:44 PM होगा और यह लगभग 12:48 PM की अवधि में डुब जाएगा।
इंदौर- यहां चांद निकलने का समय 11:52 PM के आसपास है और यह बाद में अगले दिन दोपहर में अस्त होगा।
महोश्वर- यहां चंद्र उदय का समय लगभग 11:55 PM है और चंद्रास्त लगभग 12:54 PM होगा।
AUG 16, 2025 23:20 IST

Moon Rise Time In Rajasthan Today: राजस्थान में आज चांद कितने बजे निकलेगा

राजस्थान में आज चांद मध्यरात्रि 11 बजकर 42 मिनट पर निकलेगा।
AUG 16, 2025 23:15 IST

Moon Rise Time In Delhi Today: आज दिल्ली में चांद कितने बजे दिखेगा?

दिल्ली में चांद आज, 16 अगस्त 2025 के दिन रात 11 बजकर 33 मिनट पर नजर आएगा।
AUG 16, 2025 23:11 IST

Krishna Bhog: कान्हा जी के 7 प्रिय भोग लिस्ट

  • माखन- मिश्री
  • मेवा मिठाई
  • धनिया पंजीरी
  • पंचामृत
  • शहद
  • खीरा
  • तुलसी
AUG 16, 2025 23:08 IST

ISKCON Delhi Live Shri Krishna Janmashtami Mahabhishek

AUG 16, 2025 23:11 IST

Janmashtami Chand Arghya Mantra LIVE: जन्माष्टमी 2025 चांद अर्घ्य मंत्र

ॐ चन्द्राय नमः।
(अर्घ्य जल अर्पण करते हुए यह मूल मंत्र बोला जाता है।)

इसके अलावा-
ॐ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव महोत्सवे,
चन्द्रमण्डलस्थितं चन्द्रदेवं
अर्घ्यं समर्पयामि।
अर्थ- मैं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर, चंद्रमंडल में स्थित चंद्रदेव को अर्घ्य समर्पित करता/करती हूं।
AUG 16, 2025 23:04 IST

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा सामग्री (Krishna Janmashtami Puja Samagri)


धूप बत्ती और अगरबत्ती, यज्ञोपवीत 5, अक्षत, पान के पत्ते, सुपारी, पुष्पमाला, केसर, कपूर, आभूषण, रुई, तुलसीमाला, कमलगट्टा, सप्तधान, गंगाजल, शहद, अबीर, गुलाल, पंच मेवा, शक्कर, गाय का घी, गाय का दही, गाय का दूध, ऋतुफल, छोटी इलायची, सिंहासन, झूला, तुलसी दल, कुश व दूर्वा, हल्दी, कुमकुम, आसन, मिष्ठान्न, बाल स्वरूप कृष्ण की प्रतिमा, रोली, सिंदूर, चंदन, भगवान के वस्त्र, नारियल, फूल, फल, मोर पंख, गाय बछड़े सहित, केले के पत्ते, औषधि, पंचामृत, दीपक, मुरली, माखन, खीरा।
AUG 16, 2025 23:02 IST

Krishna Janmashtami Vrat Katha: श्री कृष्ण जन्माष्टमी कथा, कृष्ण जन्म की कहानी

इंद्र ने कहा हे मुनि श्रेष्ठ व्रतों में जो श्रेष्ठ व्रत हो वह उत्तम व्रत आप मुझसे कहिये-नारद जी ने कहा-द्वापर येग में नीच कर्मों को करन वाला महापापी कंस नाम का दैत्य हुआ। उस कंस की परम सुंदरी बहन देवकी का विवाह वासुदेव के साथ हुआ । वासुदेव तथा देवकी की आठवीं संतान तुम्हारा वध करेगी, ऐसी आकाशवाणी सुनकर अत्यन्त क्रोधित होकर कंस ने दोनों को कारागार में डाल दिया। कंस जब देवकी को मारने लगा तो वासुदेव ने कंस को वचन दिया कि वह अपनी हर संतान उसे सौंप देंगे। तब कंस ने द्वारपालों को दोनो का ध्यान रखने को कहा और चला गया। एक-एक कर कंस ने देवकी के छः पुत्रों की हत्या कर दी। भगवान विष्णु के कहने पर योग माया ने देवकी के सातवें गर्भ को वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया ।

कंस ने समझा कि उसके डर से देवकी का सातवां गर्भ नष्ट हो गया। वह देवकी की आंठवी संतान की प्रतीक्षा करने लगा । श्री कृष्ण जी के जन्म के समय सिंह राशि के सूर्य में, आकाश मंडल में जलधारी मेघों ने अपना जमाव डाला । भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में वृष राशि ने चन्द्रमा में रोहिणी नक्षत्र में बुधवार में सौभाग्य योग से चुका चन्द्रमा के आधी रात्रि में, आधी रात्रि के उत्तर में जब एक घड़ी हो जाये तो श्रुति स्मृति पुराणोक्त फल की प्राप्ति होती है। हे इन्द्र ऐसे विजय नामक शुभमुहूर्त में श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ । श्री कृष्ण जी के जन्म के समय पर मूसलाधार बारिश हुई। और पहरा दे रहे द्वारपाल सो गये। देवकी ने वासुदेव जी से कहा- हे स्वामी शीघ्र मेरे इस पुत्र को अपने मित्र गोप नंदलाल जी के यहां छोड़ आइये । वासुदेव जब कारागार से निकलकर यमुना के तट पर पहुंचे तो वहां पर डफली नदी को देखकर बड़े चिंतित हुए। वह उफनती नदी में भगवान का नाम लेकर उतर गये। यमुना नदी साक्षात् नारायण के चरण स्पर्श करने को व्याकुल हो उठीं। जैसे ही उन्होंने उनके चरण स्पर्श किये तो वसुदेव जी को उन्होंने मार्ग दे दिया। श्री कृष्ण को बरसात से बचाने के लिए शेषनाग जी अदृश्य रूप में आये और अपने फन फैलाकर बरसात से उनकी रक्षा की। यमुना नदी को पार कर वासुदेव जी गोप नंदलाल जी के घर बालक को छोड़ आये। और उनके घर से नवजात कन्या को ले आये। और लाकर कंस को सौंप दी। देवकी ने रोते हुए कहा- भईया यह तो कन्या है इसे छोड़ दो। पर उस दुराचारी ने उस मासूम कन्या को चट्टान पर दे मारा । भयानक आवाज के साथ वह योगमाया रुपी कन्या आकाश में उड़ गई और कंस को कहा कि तेरा काल अभी जीवित है। जो तेरा वध उचित समय आने पर करेगा। मेरा नाम वैष्णवी है और यह सारा जगत भगवान विष्णु की माया है। उन्हीं के हाथों तेरा मरण होगा । ऐसा कहकर वह स्वर्ग को चली गई।
कंस ने भयवश पूतना राक्षसी को बुलाया और उसे श्री कृष्ण का वध करने भेजा। उस राक्षसी ने अनेको बालकों को अपना विषयुक्त स्तनपान करवाकर मार डाला । तत्पश्चात् वह श्री कृष्ण के पास पहुंची । जब उसने उन्हें अपने स्तनपान करवाये तो उन्होनें स्तनपान करते हुए उसके प्राण खींच लिए। पूतना के वध के पश्चात् कंस ने एक ब्राह्मण को भेजा। ब्राह्मण पालने में खेलते हुए दोनों बालकों के पास पहुंचा। और उनको मारने का प्रयास किया । इससे श्री कृष्ण ने उसे अपाहिज बना दिया । और उसका मुंह दही वाले बर्तन में कर दिया । तन्तर यशोदा ने आकर उस ब्राह्मण के मुंह में दही को लगे देखा और गुस्से में कहा कि आपने यह क्या कर दिया दही का पान कर लिया। अब तुम्हें दही नहीं दूंगी। उस ब्राह्मण ने कंस के पास आकर सब कह सुनाया। तब कंस ने केशी नामक दैत्य को भेजा । केशी नामक दैत्य ने घोड़े का रूप बनाया और गोकुल में श्री कृष्ण को अपने ऊपर चढ़ाने मात्र से ही अपने प्राण गंवा बैठा । फिर महा असुर कंस ने 'अरिष्ट नामक दैत्य को भेजा। वह एक बैल के रूप में श्री कृष्ण के समीप पहुंचा। श्री कृष्ण ने उस बैल से युद्ध करते हुए मार डाला। फिर दानव कंस ने 'कालाख्य' नामक दैत्य को कौवे (कागले) के रूप में भेजा। वह श्री कृष्ण के समीप आया । श्री कृष्ण ने उसके गले को दबोच कर उसे मार डाला और उसके पंखों को उखाड़ फेंका । कंस ने नन्द को बुलाकर कहा कि मुझे पारिजात के पुष्प लाकर दो नहीं तो मार डालूंगा। नन्द उसे एवं अस्तु कहकर घर आकर अपनी सारी बात अपनी पत्नी को कह सुनाई। श्री कृष्ण ने उनकी सारी बात सुनकर बालकों के साथ खेलते हुए अपनी 'गेंद' यमुना नदी में फेंक दी। जब बालकों ने 'गेंद' को यमुना नदी में जाते देखा तो उन्होने श्री कृष्ण से 'गेंद' लाने को कहा- श्री कृष्ण ने कहा कि मेरे पास 'गेंद' नहीं है मैं तुम्हें यही 'गेंद' ला देता हूं। तब सब बालकों के मना करने पर भी वह यमुना नदी में कूद गये। और बीच में कालिया नाग के समीप पहुंच गये। श्री कृष्ण से उसकी पत्नी ने कहा- कि तुम शीघ्र यहां से चले जाओ नहीं तो हमारे स्वामी तुम्हें मार डालेंगे। श्री कृष्ण ने कहा कि मैं अपनी 'गेंद' लिए बगैर नहीं जाऊंगा।

इतनी देर में कालिया नाग की आंख खुल गई। और वह उनसे युद्ध करने लगा । श्री कृष्ण एक-एक करके उसके सारे फनो को तोड़ना शुरू कर दिया । तब वह कालिया नाग उनकी अनेको प्रकार से स्तुति करने लगा। और उनसे माफी मांगने लगा। तब श्री कृष्ण ने कहा-कि तुम समुद्र में चले जाओ और यमुना का पानी निर्मल करो। कालिया नाग ने कहा कि वहां पर गरुड़ मुझे देखकर मार डालेंगे । तब श्री कृष्ण ने कहा कि तुम्हारे सिर पर मेरे पद चिन्ह देखकर गरुड़ तुम्हे नही मारेंगे। तब उस कालिया नाग उनकी अनेको प्रकार से स्तुति की और कृष्ण को देवताओं में दुर्लभ पारिजात के पुष्प भेंट में दिए। उन पुष्पों को उससे लाकर उन्होनें नन्द बाबा व यशोदा मैय्या को दिये। नन्द बाबा व यशोदा मैया ने उनके आने पर अनेकों उत्सव किए । नारद ने कहा- मथुरा नगरी के दक्षिणी हिस्से में कंस का मंत्री महातेजस्वी चाणूर रहता था। कंस ने उसे बुलवाया उसने कंस से कहा कि उन दोनों बालकों को नगर में बुलवाकर मल्लयुद्ध में उनका वध करवा दो। कंस को उसका सुझाव पसंद आ गया। उसने अक्रूर जी को बुलवाकर उन दोनों बालकों को लाने भेजा। अक्रूर जी ने नन्द जी के पास जाकर कंस की मंशा बताई। जिसे सुनकर नंद जी और यशोदा माता भयभीत हो गये। और उन्होंने अक्रूर जी को मना कर दिया। श्री कृष्ण के सुनने पर उन्होंने उन्हें समझा दिया और वह बलराम जी के साथ जाने को राजी हो गये।

नगर में पहुंचकर उन्होंने मालिन का कूबड़ ठीक किया और पागल हाथी का वध किया। कंस के उत्सव में उन्होंने शिव का धनुष तोड़ डाला और अखाड़े में पहले चाणूर और फिर केशी को मार डाला। कंस ने बड़े-बड़े दैत्यों को बुलाकर कहा- कि उन्हें परास्त न कर सका। उन सबको श्री कृष्ण व बलराम ने मार डाला । बलराम जी ने मूसल तथा हल से व श्री कृष्ण ने चक्र से अनेको दैत्यों को मार डाला। श्री कृष्ण ने कंस को पकड़कर कहा- हे महानीच दैत्य देख मैं वही देवकी का आठवां पुत्र हूं जिसके द्वारा तुम मृत्यु को प्राप्त होंगे। मैं तुम्हारा वध करके इस संसार को तुम्हारे पापों से मुक्त करूंगा ।इतना कहकर श्री कृष्ण ने कंस को धरती पर पटक दिया और उसकी छाती पर सवार हो गये। कंस के केश पकड़कर उसकी छाती पर मुष्टि प्रहार कर उसके प्राण ले लिये। उस असुर के मरने पर सब देवताओं ने पुष्प वर्षा की और संसार के सब लोगों ने उनकी वंदना की । तत्पश्चात् उन्होंने वासुदेव, देवकी व अग्रसेन जी को कारागार से मुक्त किया। जो व्यक्ति जन्माष्टमी के व्रत को करता है वह प्रकार के सुखों को भोग कर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।
AUG 16, 2025 22:55 IST

Krishna Janam Mantra: कृष्ण जन्म मंत्र, अर्थ सहित

ॐ देवकी-सुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्णं त्वामहं शरणं गतः॥

अर्थ- "हे देवकी के पुत्र गोविंद, हे वासुदेव, हे जगत के स्वामी!
मुझे अपना पुत्र (कृष्ण) रूप प्रदान कीजिए, मैं आपकी शरण में हूँ।"
AUG 16, 2025 22:50 IST

chand ko jal kaise chadhaye: जन्माष्टमी पर चांद को जल कैसे अर्पित करें?

जन्माष्टमी पर चंद्रमा को जल अर्पित करना एक शुभ और पारंपरिक धार्मिक क्रिया है, जिसे श्रीकृष्ण जन्म के उत्सव के दौरान विशेष रूप से किया जाता है। जब चाँद निकलता है तब श्रद्धालु एक तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल, सफेद फूल, अक्षत, चंदन और कभी-कभी मिश्री डालकर अर्घ्य तैयार करते हैं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके या जहाँ चाँद दिखाई दे रहा हो, वहाँ खड़े होकर दोनों हाथों से जल को ऊँचाई से धीरे-धीरे चंद्रमा की ओर अर्पित करते हैं। इस दौरान "ॐ चंद्राय नमः" या "ॐ श्रीकृष्ण जन्मोत्सवे चंद्रमण्डलस्थितं चंद्रदेवं अर्घ्यं समर्पयामि" जैसे मंत्रों का उच्चारण करते हैं। यह क्रिया भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में चंद्रदेव को सम्मान अर्पित करने के लिए की जाती है, क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में रात्रि के समय चंद्रमा की साक्षी में हुआ था। जल अर्पण के बाद भक्तजन कृष्ण जन्म की आरती करते हैं, भोग लगाते हैं और प्रसाद वितरण के साथ व्रत पूर्ण करते हैं।