अध्यात्म

Shiv Panchakshar Stotra: श्री शिव पञ्चकम् स्तोत्र लिरिक्स, शनि और अन्य गृह पीड़ा का सबसे सरल उपाय, पढ़ें हिंदी अर्थ सहित

Shree Shiv Panchakshar Stotra: नियमित रूप से शिव पंचाक्षर स्तोत्र का जाप करने से भक्तों की आध्यात्मिक शक्तियां बढ़ती हैं और उनकी भक्ति में गहराई आती है। इस स्तोत्र का जाप शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने में भी सहायक हो सकता है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यहां से आप श्री शिव पञ्चकम् स्तोत्र से लिरिक्स पढ़कर और हिंदी अर्थ जान सकते हैं।

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श्री शिव पञ्चकम् स्तोत्र लिरिक्स अर्थ सहित (Photo Source: Canva)

Shree Shiv Panchakshar Stotra (श्री शिव पञ्चकम् स्तोत्र): शिव पंचाक्षर स्तोत्र ॐ नमः शिवाय मंत्र के गहरे अर्थ को दर्शाता है। शिव पंचाक्षर स्तोत्र शिव और पांच पवित्र अक्षरों की शक्ति, न-म-शि-वा-य की स्तुति करता हैं। न अक्षर का संबंध भगवान शिव के नकारात्मकता और अज्ञान को दूर करने वाले स्वरूप से है। म अक्षर महादेव के महान और शक्तिशाली स्वरूप को दर्शाता है। शि अक्षर भगवान शिव के मंगलमय और शुभ स्वरूप को प्रकट करता है। वा अक्षर का संबंध भगवान शिव के रक्षक और पोषक स्वरूप से है। य अक्षर भगवान शिव के सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान ईश्वर के रूप को व्यक्त करता है। शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को गहरी मानसिक शांति मिलती है। इससे तनाव और चिंता कम होती है और मन स्थिर व शांत होता है। यहां से आप श्री शिव पञ्चकम् स्तोत्र पढ़ें। साथ ही इसका अर्थ भी समझें।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र लिरिक्स और अर्थ-

शिव पंचाक्षर स्तोत्र-

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय

भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय

तस्मै नकाराय नमः शिवाय।

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय

नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।

मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय

तस्मै मकाराय नमः शिवाय।

शिवाय गौरीवदनाब्जबृंदा

सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।

श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय

तस्मै शिकाराय नमः शिवाय।

वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमूनीन्द्र देवार्चिता शेखराय।

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय

तस्मै वकाराय नमः शिवाय।

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय

पिनाकहस्ताय सनातनाय।

दिव्याय देवाय दिगम्बराय

तस्मै यकाराय नमः शिवाय।

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसंनिधौ।

शिवलोकमावाप्नोति शिवेन सह मोदते।

अर्थ-

नागेन्द्रहाराय: नाग (सर्प) की माला पहनने वाले को,

त्रिलोचनाय: तीन आँखों वाले (जिसकी तीसरी आँख ज्ञान की प्रतीक है) को,

भस्माङ्गरागाय: जिनके शरीर पर भस्म (राख) लगी हुई है,

महेश्वराय: महान ईश्वर को,

नित्याय: जो सदैव हैं (सनातन),

शुद्धाय: जो शुद्ध हैं,

दिगम्बराय: दिशाओं को अपना वस्त्र बनाने वाले को,

तस्मै ‘न’ काराय: ‘न’ अक्षर वाले को (जो ‘नमः शिवाय’ मंत्र का हिस्सा है),

नमः शिवाय: शिव को नमन है।

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय: मन्दाकिनी (गंगा) के जल और चंदन से अर्चित (पूजित) होने वाले को,

नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय: नंदीश्वर (नंदी के ईश्वर) और प्रमथनाथ (भूतों के स्वामी) महेश्वर को,

मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय: मंदार पुष्प और अनेक प्रकार के फूलों से सुंदर रूप से पूजित होने वाले को,

तस्मै ‘म’ काराय: ‘म’ अक्षर वाले को (जो ‘नमः शिवाय’ मंत्र का हिस्सा है),

नमः शिवाय: शिव को नमन है।

शिवाय: भगवान शिव को,

गौरीवदनाब्जवृन्द: गौरी (देवी पार्वती) के चेहरे के कमल (वदनाब्ज) के समूह के लिए,

सूर्याय: सूर्य के समान तेजस्वी को,

दक्षाध्वरनाशकाय: दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले को,

श्रीनीलकण्ठाय: जिनका कंठ नीला है (हलाहल विष पीने के कारण),

वृषध्वजाय: जिनका ध्वज (बैनर) बैल (वृषभ) है,

तस्मै ‘शि’ काराय: ‘शि’ अक्षर वाले को (जो ‘नमः शिवाय’ मंत्र का हिस्सा है),

नमः शिवाय: शिव को नमन है।

वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य: वशिष्ठ, अगस्त्य (कुम्भोद्भव) और गौतम जैसे आर्य ऋषियों द्वारा पूजित,

मूनीन्द्रदेवार्चितशेखराय: मुनियों के इंद्र और देवताओं द्वारा अर्चित शेखर (शिरोमणि) को,

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय: जिनकी आंखें चंद्र (चांद), सूर्य और अग्नि (वैश्वानर) हैं,

तस्मै ‘व’ काराय: ‘व’ अक्षर वाले को (जो ‘नमः शिवाय’ मंत्र का हिस्सा है),

नमः शिवाय: शिव को नमन है।

यज्ञस्वरूपाय {यक्षस्वरूपाय}: यज्ञ का रूप धारण करने वाले (या यक्ष का रूप धारण करने वाले) को,

जटाधराय: जिनके सिर पर जटा (मटके के रूप में बंधे हुए बाल) है,

पिनाकहस्ताय: जिनके हाथ में पिनाक (धनुष) है,

सनातनाय: जो सनातन (अनन्त और शाश्वत) हैं,

दिव्याय देवाय: दिव्य और देवत्व को,

दिगम्बराय: जो दिगम्बर (आकाश या दिशाओं को अपना वस्त्र बनाने वाले) हैं,

तस्मै ‘य’ काराय: ‘य’ अक्षर वाले को (जो ‘नमः शिवाय’ मंत्र का हिस्सा है),

नमः शिवाय: शिव को नमन है।

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं: यह पवित्र पांच अक्षर (नमः शिवाय),

यः पठेच्छिवसंनिधौ: जो कोई भी इसे शिव की उपस्थिति में पढ़ता है,

शिवलोकमावाप्नोति: वह शिवलोक को प्राप्त करता है,

शिवेन सह मोदते: शिव के साथ आनंद मनाता है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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