Sheetala Mata Ko Basi Bhog Kyu Chadhta Hai: होली के आठ दिन बाद देशभर में शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। शीतलाा सप्तमी के दिन माता शीतला के लिए भोजन बनाया जाता है और फिर शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता को वही भोजन का भोग लगाया जाता है। लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर शीतला माता कौन हैं और उन्हें बासी भोजन का भोग क्यों लगाया जाता है। यहां से आप इसके बारे में विस्तार में जान सकते हैं।
कौन हैं शीतला माता?
शीतला माता को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। शीतला का अर्थ है ठंडी या शांत करने वाली, जो बुखार और जलन जैसे रोगों से राहत देती हैं। शीतला माता अक्सर गधे पर सवार दिखाई जाती हैं। उनके हाथ में झाड़ू, कलश, सूप और नीम की पत्तियाँ होती हैं। ये सभी रोग निवारण के प्रतीक हैं। उनका शरीर लाल चकत्तों से युक्त दर्शाया जाता है, जो यह बताता है कि वे बीमारी लाने और हटाने दोनों में सक्षम हैं।
शीतला माता को क्यों लगता है बासी खाने का भोग?
शीतला माता को बासी या ठंडे भोजन का भोग लगाने की परंपरा के पीछे धार्मिक और पारंपरिक मान्यता है। माना जाता है कि माता शीतला शीतलता (ठंडक) की देवी हैं और वे गर्मी से होने वाले रोगों, जैसे चेचक और बुखार से लोगों की रक्षा करती हैं। इसलिए उनके पूजन में गर्म या ताजा भोजन की जगह ठंडा और एक दिन पहले बना हुआ भोजन चढ़ाया जाता है। बसोड़ा या शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता, क्योंकि मान्यता है कि आग जलाने और गर्म भोजन बनाने से माता को कष्ट होता है। इसलिए भक्त एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रखते हैं और अगले दिन उसी ठंडे भोजन का भोग लगाते हैं। यह परंपरा माता को शीतलता अर्पित करने और उनसे परिवार को रोगों से बचाने की प्रार्थना करने का प्रतीक मानी जाती है।
शीतला माता को क्या भोग लगाएं?
शीतला अष्टमी के दिन आप शीतला माता को आप मीठे चावलों को भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा बिना नमक की पूड़ी, पुड़ी- हलवा, मीठी कचौड़ी, गुड़-चना, दही, रबड़ी, खीर, बाजरे या गेंहू की रोटी का भोग लगा सकते हैं। कई जगहों पर माता को नीम के पत्ते, गुड़ और ठंडे पानी का भी भोग लगता है।
बसोड़ा से जुड़ी मान्यता क्या है?
बसोड़ा की मान्यता माता शीतला माता की पूजा से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि माता शीतला रोगों, खासकर चेचक, बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों से लोगों की रक्षा करती हैं। इसलिए इस दिन लोग माता शीतला की श्रद्धा से पूजा करते हैं और उनसे परिवार की सेहत और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। बसोड़ा के दिन एक खास परंपरा यह होती है कि घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। लोग एक दिन पहले ही खाना बनाकर रख लेते हैं और अगले दिन उसी ठंडे भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ठंडा भोजन और साफ-सफाई रखने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और घर-परिवार को बीमारियों से बचाती हैं। इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं, माता शीतला की पूजा करती हैं और उन्हें ठंडे भोजन का भोग लगाती हैं।
