अध्यात्म

Sheetala Ashtakam Stotram: हर रोग दूर करता है शीतलाष्टक स्तोत्र, भोग लगाने के बाद जरूर करें शीतला अष्टक का पाठ

Sheetala Ashtakam Stotram (शीतला अष्टक स्तोत्र): आज शीतला अष्टमी का शुभ दिन है। आज के दिन शीतला माता के स्तोत्र का पाठ करना अच्छा माना जाात है। इससे शरीर के सभी रोग दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। यहां से आप शीतलाष्टक स्तोत्र के लिरिक्स देख सकते हैं।

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शीतला अष्टक स्तोत्र (pc: pinterest)

Sheetala Ashtakam Stotram (शीतला अष्टक स्तोत्र): शीतला माता हिंदू धर्म में आरोग्य, स्वच्छता और शीतलता की देवी हैं, जिन्हें खासतौर से चेचक, खसरा, और त्वचा संबंधी रोगों को ठीक करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर इसे मनाया जाता है। आज, 11 मार्च को शीतला अष्टमी का ही दिन है। आज के दिन शीतला माता के शीतला अष्टक का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इसका पाठ करने से रोग दूर होते हैं। यहां शीतला अष्टक स्तोत्र के पूरे लिरिक्स मौजूद हैं।

शीतलाष्टक स्तोत्र के लिरिक्स (Sheetala Ashtakam Lyrics)-

॥ विनियोग ॥

ऊँ अस्य श्रीशीतला स्तोत्रस्य महादेव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, शीतली देवता, लक्ष्मी बीजम्, भवानी शक्तिः, सर्वविस्फोटक निवृत्तये जपे विनियोगः ॥

ऋष्यादि-न्यासः

श्रीमहादेव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीशीतला देवतायै नमः हृदि, लक्ष्मी (श्री) बीजाय नमः गुह्ये, भवानी शक्तये नमः पादयो, सर्व-विस्फोटक-निवृत्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ॥

ध्यानः

ध्यायामि शीतलां देवीं, रासभस्थां दिगम्बराम् ।

मार्जनी-कलशोपेतां शूर्पालङ्कृत-मस्तकाम् ॥

मानस-पूजनः

ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ वं जल-तत्त्वात्मकं नैवेद्यं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः।

मन्त्रः

ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः ॥ [11 बार]

ईश्वर उवाच

वन्देऽहं शीतलां देवींरासभस्थां दिगम्बराम्।

मार्जनीकलशोपेतांशूर्पालङ्कृतमस्तकाम्॥1॥

वन्देऽहं शीतलां देवींसर्वरोगभयापहाम्।

यामासाद्य निवर्तेतविस्फोटकभयं महत्॥2॥

शीतले शीतले चेतियो ब्रूयद्दाहपीडितः।

विस्फोटकभयं घोरंक्षिप्रं तस्य प्रणश्यति॥3॥

यस्त्वामुदकमध्ये तुध्यात्वा सम्पूजयेन्नरः।

विस्फोटकभयं घोरंगृहे तस्य न जायते॥4॥

शीतले ज्वरदग्धस्यपूतिगन्धयुतस्य च।

प्रणष्टचक्षुषःपुंसस्त्वामाहुर्जीवनौषधम्॥5॥

शीतले तनुजान् रोगान्नृणां हरसि दुस्त्यजान्।

विस्फोटकविदीर्णानांत्वमेकाऽमृतवर्षिणी॥6॥

गलगण्डग्रहा रोगा येचान्ये दारुणा नृणाम्।

त्वदनुध्यानमात्रेणशीतले यान्ति सङ्क्षयम्॥7॥

न मन्त्रो नौषधं तस्यपापरोगस्य विद्यते।

त्वामेकां शीतले धात्रींनान्यां पश्यामि देवताम्॥8॥

॥ फल श्रुति ॥

मृणालतन्तुसदृशींनाभिहृन्मध्यसंस्थिताम्।

यस्त्वां सञ्चिन्तयेद्देवितस्य मृत्युर्न जायते॥9॥

अष्टकं शीतलादेव्यायो नरः प्रपठेत्सदा।

विस्फोटकभयं घोरंगृहे तस्य न जायते॥10॥

श्रोतव्यं पठितव्यं चश्रद्धाभाक्तिसमन्वितैः।

उपसर्गविनाशायपरं स्वस्त्ययनं महत्॥11॥

शीतले त्वं जगन्माताशीतले त्वं जगत्पिता।

शीतले त्वं जगद्धात्रीशीतलायै नमो नमः॥12॥

रासभो गर्दभश्चैवखरो वैशाखनन्दनः।

शीतलावाहनश्चैवदूर्वाकन्दनिकृन्तनः॥13॥

एतानि खरनामानिशीतलाग्रे तु यः पठेत्।

तस्य गेहे शिशूनां चशीतलारुङ् न जायते॥14॥

शीतलाष्टकमेवेदं नदेयं यस्यकस्यचित्।

दातव्यं च सदा तस्मैश्रद्धाभक्तियुताय वै॥15॥

॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे शीतलाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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