अध्यात्म

कन्या पूजन में कितने उम्र की बच्चियों को भोजन कराना चाहिए? जानें, कन्याओं के साथ कितने लांगुर पूजन में हो सकते हैं शामिल

What Is The Age Limit For Kanya Pujan: महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। यहां से जान सकते हैं कि कन्या पूजन कितने वर्ष की कन्याओं को भोजन कराना चाहिए। साथ ही यहां कंजन में लांगुर कितने बिठाने चाहिए, ये भी यहां से जान सकते हैं।

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कन्या पूजन में कितने उम्र की बच्चियों को भोजन कराना चाहिए? (AI Generated)

What Is The Age Limit For Kanya Pujan: कन्या पूजन के लिए किस उम्र तक की बच्चियों को भोजन कराना चाहिए.. अगर ये सवाल आपके मन में भी है तो यहां से जानें कि आप 2 साल से लेकर 10 साल तक की बच्चियों को खाना खिला सकते हैं। आपको 2 वर्ष से लेकर 10 उम्र तक की अलग-अलग उम्र की कन्या को भोजन कराना चाहिए। इन्हें भोजन कराने से अन्न, ज्ञान, धन, रोग मुक्ति और संतान सुख आदि फल मिलते हैं। यह शुभ और उचित माना जाता है। यह कन्या अलग-अलग देवी का रूप होती हैं।

कन्या की उम्र और अलग-अलग स्वरूप-

  • 2 साल की कन्या को देवी अन्नपूर्णा माना जाता है। इन्हें भोजन कराने से अन्न के भंडार भरे रहते हैं और कभी अन्न की कमी नहीं होती है।
  • 3 साल की कन्या को त्रिनेत्री माना जाता है। इन्हें आप भोजन कराते हैं तो आपको ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • 4 साल की कन्या को मां कात्यानी का रूप माना जाता है। चार वर्ष की कन्या को भोजन कराने से धन लाभ होता है।
  • 5 साल की कन्या को मां कालरात्रि का रूप मानते हैं। इन्हें भोजन कराने से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • 6 साल की कन्या को मां कालिका का स्वरूप माना जाता है। 6 साल की कन्या को भोजन कराने से व्यक्ति को राजयोग मिलता है।
  • 7 साल की कन्या को माता महागौरी का रूप मानते हैं। इन्हें भोजन कराने से निसंतान दंपंत्ति को संतान की प्राप्ति होती है।
  • 8 साल की कन्या को श्रीमती के रूप में माना जाता है। इन्हें भोजन कराने से धन और संपत्ति की प्राप्ति होती है।
  • 9 साल की कन्या को भोजन कराना घर से क्लेश और विपत्तियों को दूर करता है इन कन्याओं के साथ ही एक बालक को भोजन कराना चाहिए।

नवरात्रि कितने लांगुर बुलाएं?

नवरात्रि में लांगुर बुलाना कन्या पूजन का हिस्सा है, जो अष्टमी या नवमी तिथि पर किया जाता है। लांगुर को बटुक भैरव का रूप माना जाता है और यह कन्याओं के साथ बिठाया जाता है। लांगुर की संख्या निश्चित नहीं है, आप अपनी सुविधा अनुसार एक या अधिक लांगुरों को कन्याओं के साथ बिठा सकते हैं, लेकिन कन्या पूजन के लिए आमतौर पर 8 या 9 कन्याओं को बुलाया जाता है और उनके साथ एक लांगुर को बिठाया जाता है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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