अध्यात्म

बिना पंडित जी के कलश स्थापना कैसे करें? नवरात्र के पहले दिन घर पर हवन कैसे करें, देखें संपूर्ण विधि

Shardiya Navratri 2025 (घर पर नवरात्रि पूजा कैसे करें, नवरात्रि में घर पर हवन कैसे करें): आज हर घर में माता रानी का स्वागत हो रहा है। कलश स्थापना के साथ हवन और पूजा-पाठ भी किया जा रहा है। अगर आप बिना पंडित जी के खुद ही नवरात्रि की पूजा करना चाहते हैं तो यहां से विधि देख सकते हैं।

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बिना पंडित जी के कलश स्थापना कैसे करें (AI Generated)

Shardiya Navratri 2025 (घर पर नवरात्रि पूजा कैसे करें, नवरात्रि में घर पर हवन कैसे करें): आज शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना और हवन का विशेष महत्व है।अगर किसी वजह से आपके घर पंडिज जी (पुरोहित) नहीं आ रहे हैं तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। यहां से आप खुद से घर पर नवरात्रि की पूजा विधि देख सकते हैं। यहां आपको घर पर कलश स्थापना करना भी बताया जा रहा है। साथ ही यहीं घर पर हवन करने की पूरी विधि बताई गई है।

कलश स्थापना सामग्री-

  • मिट्टी या तांबे का कलश
  • गंगाजल
  • आम या अशोक के पत्ते
  • नारियल
  • कलावा
  • चावल
  • जौ
  • लाल कपड़ा
  • फूल
  • दीपक
  • अगरबत्ती
  • दुर्गा जी की मूर्ति

घर में कलश स्थापना कैसे करें?

सबसे पहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पूजा स्थान को साफ करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और माता रानी की मूर्ति स्थापित करें। फिर एक मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालें, उस पर जौ के बीज छिड़कें और ऊपर से हल्की मिट्टी से ढक दें। फिर पानी छिड़कें। अब कलश में गंगाजल डालें और उसमें चावल, सुपारी, सिक्का और पंचरत्न डालें। कलश के मुख पर आम के 5 पत्ते डालें। एक लाल कपड़े में नारियल लपेटकर कलश के ऊपर रखें और कलश के गर्दन पर कलावा बांधे। इसके बाद दीपक जलाएं और माता रानी का आवाहन करें। फिर दुर्गा चालीसा, सप्तशती पढ़ें और मंत्र पढ़ें। फिर आरती करें।

माता रानी के बाएं या दाएं कलश किस तरफ लगाना चाहिए?

माता रानी के दाहिने ओर कलश स्थापित करना चाहिए। कलश स्थापना करने के लिए सबसे उत्तम दिशा ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को माना जाता है।

बिना पंडित के घर पर हवन कैसे करें?

बिना पंडित के घर पर हवन करने के लिए पहले स्थान को साफ करें, फिर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। आम की लकड़ियों, कपूर और घी से हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करें। अपनी शुद्धता और संकल्प के बाद, ॐ आग्नेय नम: स्वाहा मंत्र बोलते हुए घी डालें, फिर 11, 21 या 108 बार देव-देवताओं के मंत्रों के साथ तिल, जौ, चावल, गुड़ जैसी हवन सामग्री की आहुति दें। अंत में पूर्ण आहुति और आरती करके हवन का समापन करें।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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