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Shani Dev Family: शनि देव के परिवार में कौन कौन हैं, यहां देखें शनिदेव की पत्नियों के नाम, शनिदेव के पुत्रों के नाम

Shani Dev Ki Patniyon Aur Putron Ke Naam : शनिदेव को न्यायधीश कह जाता है। 16 मई को उनकी जयंती मनाई जा रही है। शनि देव की 8 पत्नियां और दो पुत्र हैं। आइए जानते हैं किन उनके नाम क्या हैं।

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शनि देव के पत्नी और पुत्र कितने हैं

Shani Dev Ki Patniyon Aur Putron Ke Naam : हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता कहा जाता है। शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन हुआ था। साल 2026 में यह तिथि 16 मई को पड़ रही है। मान्यता है कि मनुष्य अपने जीवन में जो भी अच्छे या बुरे कर्म करता है, उसका फल शनिदेव ही देते हैं। यही वजह है कि शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि लोग अक्सर शनिदेव को केवल दंड देने वाले देवता के रूप में देखते हैं, लेकिन वे न्यायाधीश है। अगर कोई अच्छे कर्म करता है, तो उसे शुभ फल प्रदान करते हैं। शनिदेव की करीब 8 पत्नियां और दो पुत्र हैं। आइए जानते हैं कि वे कौन हैं।

शनिदेव की पत्नियां कौन हैं?

धार्मिक ग्रंथों में शनिदेव की आठ पत्नियों का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि शनिवार के दिन इनके नामों का जाप करने से शनि दोष कम होते हैं।

‘ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया।

कंटकी कलही चाऽथ तुरंगी महिषी अजा।।

शनेर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्।

दुःखानि नाशयेन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखम्।।’

शनिदेव की पत्नियों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं।

  1. ध्वजिनी
  2. धामिनी
  3. कंकाली
  4. कलहप्रिया
  5. कंटकी
  6. तुरंगी
  7. महिषी
  8. अजा
मान्यता है कि शनिवार को श्रद्धा के साथ इस मंत्र का जाप करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं।

शनिदेव (shanidev) के पुत्र कौन हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव के दो पुत्र बताए जाते हैं। शनिदेव का पहला पुत्र गुलिक है, जिसको दक्षिण भारतीय ज्योतिष में ‘मांदी’ भी कहा जाता है। ज्योतिष में इसका विशेष महत्व माना जाता है। शनिदेव के दूसरे पुत्र का नाम कुलिगन बताया गया है।

कौन हैं शनिदेव के माता-पिता?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव शनिदेव के पिता हैं। सूर्य देव को नवग्रहों का राजा माना जाता है। वे तेज, ऊर्जा, आत्मबल और नेतृत्व के प्रतीक माने जाते हैं।

पुराणों के अनुसार सूर्य देव का विवाह संज्ञा देवी से हुआ था, लेकिन सूर्य का तेज अत्यधिक होने के कारण संज्ञा देवी लंबे समय तक उनके साथ नहीं रह सकीं। इसके बाद उन्होंने अपनी छाया को सूर्य देव के पास छोड़ दिया और स्वयं तपस्या के लिए चली गईं। यही छाया बाद में ‘छाया देवी’ कहलायीं।

छाया देवी ही शनिदेव की माता मानी जाती हैं। कहा जाता है कि जब शनिदेव माता छाया के गर्भ में थे, तब वे भगवान शिव की कठोर तपस्या कर रही थीं। इसी कारण शनिदेव पर भगवान शिव की विशेष कृपा मानी जाती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार तपस्या के प्रभाव और कठिन साधना के कारण शनिदेव का वर्ण अत्यंत श्याम हो गया था।

शनिदेव और सूर्य देव में है शत्रुता

पुराणों के अनुसार, सूर्य देव ने शनिदेव के काले वर्ण को देखकर उन पर संदेह किया। इससे शनिदेव क्रोधित हो गए और उनकी दृष्टि पड़ते ही सूर्य का तेज मंद हो गया। इसके बाद में भगवान शिव ने दोनों के बीच संबंध सामान्य करवाए। यही कारण है कि ज्योतिष में सूर्य और शनि को परस्पर शत्रु माना जाता है।

शनिदेव के भाई-बहन कौन हैं?

सूर्य देव की विभिन्न पत्नियों से कई संतानों का उल्लेख मिलता है। इस प्रकार शनिदेव के कई भाई-बहन बताए जाते हैं। शनिदेव के भाइयों में यमराज, वैवस्वत मनु और अश्विनी कुमार व बहनों में यमुना, ताप्ती और भद्रा हैं।

शनिदेव के गुरु कौन हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को शनिदेव का गुरु माना जाता है। शनिदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद उन्हें कर्मफल देने का अधिकार प्राप्त हुआ। इसी कारण शनि दोष से मुक्ति के लिए शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। शनिवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना और रुद्राभिषेक करना शुभ माना जाता है।

शनिदेव के इष्ट देव कौन हैं?

भगवान शिव को शनिदेव का इष्ट देव माना जाता है। इसके अलावा हनुमान जी से भी शनिदेव का विशेष संबंध बताया जाता है।

रामायण की कथा के अनुसार हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराया था। तभी से शनिदेव ने वचन दिया कि जो व्यक्ति हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे वे कम कष्ट देंगे। इसी वजह से शनिवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ बेहद शुभ माना जाता है।

शनिदेव को क्यों माना जाता है न्याय का देवता?

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को अनुशासन, संघर्ष, मेहनत, न्याय और कर्म का ग्रह माना जाता है। वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। यदि व्यक्ति ईमानदारी, मेहनत और धर्म के मार्ग पर चलता है तो शनिदेव उसे ऊंचे पद, सफलता और सम्मान भी दिलाते हैं। वहीं गलत कार्य करने वालों को संघर्ष और कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण शनिदेव को केवल दंड देने वाला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला देवता भी माना जाता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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