Shab E Qadr Ki Dua In Hindi (हिंदी में शब ए कद्र की दुआ), Shab e qadr ki raat ki dua hindi meinba (शब ए कद्र की रात में पढ़ने वाली दुआ हिंदी में): रमजान का पवित्र महीना अब अपने अंतिम चरण यानी आखिरी अशरे में पहुंच चुका है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार रमजान के ये आखिरी दस दिन बहुत ही फजीलत वाले होते हैं। इन्हीं दिनों में एक ऐसी मुबारक रात आती है, जिसे शब-ए-कद्र या लैलतुल कद्र कहा जाता है। यह रमजान के आखिरी अशरे की सबसे खास रात होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि यह रात हजार महीनों से भी ज्यादा बेहतर है। इसी बरकत भरी रात में अल्लाह तआला ने अपने आखिरी पैगंबर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर पवित्र कुरआन शरीफ को नाजिल फरमाया था। इसलिए इस रात को इस्लाम में बेहद खास और महान माना जाता है।
शब-ए-कद्र की रात में क्या करें?
इस पवित्र रात को मुसलमान पूरी लगन और श्रद्धा के साथ अल्लाह की इबादत करते हैं। मान्यता है कि इस रात में की गई दुआ और इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। शब-ए-कद्र की रात में लोग कई तरह की इबादत करते हैं, जैसे -
- कुरआन शरीफ की ज्यादा से ज्यादा तिलावत
- नफ्ल नमाज अदा करना
- तस्बीह पढ़ना
- अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगना
- दिल से दुआ करना
कहा जाता है कि इस रात का माहौल भी काफी सुकून भरा होता है। न ज्यादा गर्मी होती है और न ही बहुत ठंड। आसमान साफ और रात काफी रोशन सी महसूस होती है।
शब-ए-कद्र की नमाज कैसे पढ़ी जाती है?
शब-ए-कद्र की रात में खास तौर पर नफ्ल नमाज पढ़ने की अहमियत बताई जाती है। इसका तरीका आम नमाज की तरह ही होता है, फर्क सिर्फ इतना होता है कि इसमें नफ्ल की नियत की जाती है। कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार 2, 4, 8, 12 या उससे ज्यादा रकअत नफ्ल नमाज पढ़ सकता है। इस रात अक्सर लोग ये नमाजें भी अदा करते हैं -
- तहज्जुद की नमाज
- सालातुल तस्बीह
- सालातुल हाजत
इन इबादतों के जरिए अल्लाह से रहमत और माफी की दुआ की जाती है।
कब होती है शब-ए-कद्र की रात?
इस्लामिक मान्यता के अनुसार शब-ए-कद्र रमजान के आखिरी दस दिनों की ताक रातों में से किसी एक में आती है। यानी -
- 21वीं रात
- 23वीं रात
- 25वीं रात
- 27वीं रात
- 29वीं रात
हालांकि ज्यादातर लोग 27वीं रात को शब-ए-कद्र मानकर खास इबादत करते हैं। लेकिन असल रात की जानकारी सिर्फ अल्लाह को ही होती है, इसलिए आखिरी अशरे की हर ताक रात में इबादत करने की सलाह दी जाती है।
शब-ए-कद्र की खास दुआ (Shab E Qadr Ki Dua Hindi Mein)
इस मुबारक रात में एक खास दुआ पढ़ने की सलाह दी जाती है, जिसे तस्बीह पर बार-बार पढ़ा जाता है।
शब-ए-कद्र की दुआ हिंदी में (Shab-e-Qadr Ki Dua in Hindi)
अल्लाहुम्मा इंनका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफवा फ'अफु अन्नी
शब-ए-कद्र की दुआ अंग्रोजी में (Shab-e-Qadr Ki Dua in English)
Allahumma innaka afuwwun tuhibbbbul afwa fa'Afu anni
शब-ए-कद्र की दुआ अरेबिक में (Shab-e-Qadr Ki Dua in Arabic)
اللّٰہُمَّ اِنَّکَ عَفُوْنَ تُحِبُّ الْعَفُوْا فَاعْفُ عَنِی ۔
इस दुआ का मतलब बहुत ही खास होता है - 'ऐ अल्लाह! तू बेहद माफ करने वाला है और माफी को पसंद करता है। इसलिए हमारे गुनाहों को माफ फरमा और हम पर अपनी रहमत नाजिल कर।'
शब-ए-कद्रक्यों मानी जाती है सबसे मुबारक रात?
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार शब-ए-कद्र की रात में की गई इबादत का सवाब 83 साल और 4 महीने की इबादत के बराबर बताया गया है। यही वजह है कि मुसलमान इस रात को ज्यादा से ज्यादा इबादत, तिलावत और दुआ में बिताने की कोशिश करते हैं। इस रात को लोग अपने दिल से अल्लाह से माफी मांगते हैं और बेहतर जिंदगी की दुआ करते हैं।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी इस्लामिक मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और प्रचलित परंपराओं के आधार पर तैयार की गई है। अलग-अलग इस्लामिक विद्वानों, मदरसों और समुदायों के अनुसार इबादत के तरीकों, दुआओं या शब-ए-कद्र की तारीख को लेकर कुछ मतभेद हो सकते हैं। यह लेख केवल सामान्य धार्मिक जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है। अधिक सटीक मार्गदर्शन के लिए अपने स्थानीय आलिम, मौलाना या धार्मिक विद्वान से सलाह लेना उचित रहेगा।)
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