शबे-ए-बारात का रोजा कब और कैसे रखें, शब-ए-बारात का रोजा कैसे खोलें, जानिए रोजा खोलने की नमाज और सहरी व इफ्तार का समय
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 3, 2026, 07:17 PM IST
Shab E Barat Ka Roza 2026 : साल 2026 में 3 फरवरी को शब-ए-बारात है। इसके अगले दिन सहरी के बाद लोग रोजा भी रखते हैं। शब-ए-बारात गुनाहों की माफी मांगने की रात हैं। इसमें लोग अल्लाह से अपने किए गए गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस दिन रोजा सामान्य रोजे की तरह ही रखा जाता है। आइए जानते हैं कि इस दिन रोजा कैसे रखा जाएगा?
शबे बारात पर रोजा कैसे रखा जाएगा
Shab E Barat Ka Roza 2026 : आज 3 फरवरी 2026, मंगलवार की शाम से शब-ए-बारात की मुबारक रात शुरू हो रही है। शब-ए-बारात की रात के बाद आने वाला दिन, यानी 4 फरवरी 2026, बुधवार को शब-ए-बारात का रोजा रखा जाएगा। आमतौर पर लोग शब-ए-बारात की रात में इबादत करने के बाद अगले दिन रोजा रखते हैं।
इस रोजे को लोग अपनी आस्था और मान्यता के अनुसार रखते हैं। माना जाता है कि शब-ए-बारात की रात के बाद रखा गया रोजा आत्मसंयम और इबादत से जुड़ा होता है। इसलिए 4 फरवरी 2026 को सुबह सहरी करके यह रोजा रखा जाएगा।
शब-ए-बारात का रोजा कैसे रखा जाएगा
शब-ए-बारात का रोजा बिल्कुल सामान्य रोजे की तरह रखा जाता है। रोजे की शुरुआत सुबह सहरी से होती है। सहरी करने के बाद फजर की अजान से पहले रोजे की नियत की जाती है। इसके बाद पूरे दिन खाने-पीने से परहेज रखा जाता है।
इस दिन लोग कोशिश करते हैं कि गलत बातों, बुरी आदतों और झगड़े से दूर रहें। रोजे के दौरान सब्र रखना, साफ दिल से दुआ करना और खुद को बेहतर बनाने की सोच रखना अहम माना जाता है। शाम को मगरिब के समय रोजा पूरा किया जाता है।
शब-ए-बारात का रोजा कब खोला जाएगा
शब-ए-बारात का रोजा 4 फरवरी 2026, बुधवार को सूर्यास्त के समय खोला जाएगा। जैसे ही मगरिब का वक्त शुरू होता है, रोजा खोल लिया जाता है। आमतौर पर लोग खजूर या पानी से रोजा खोलते हैं और फिर खाना खाते हैं। रोजा खोलते समय शांति और सादगी बनाए रखना अच्छा माना जाता है। रोजा पूरा होने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा किया जाता है।
4 फरवरी 2026 को सहरी और इफ्तार का समय
शब-ए-बारात के रोजे के लिए सहरी और इफ्तार का समय शहर के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से समय इस प्रकार रहेगा।
सहरी का समय: सुबह लगभग 5:20 बजे से पहले
इस समय तक सहरी कर लेनी चाहिए ताकि फजर की अजान से पहले रोजा शुरू हो जाए।
इफ्तार का समय: शाम लगभग 6:12 बजे के बाद
मगरिब का समय शुरू होते ही रोजा खोला जाएगा।
ध्यान रखें कि अपने शहर के अनुसार स्थानीय समय जरूर जांच लें।
शब ए बारात का रोजा रखने की नियत (Shab E Barat Roza Ki Niyat In Hindi)
शब-ए-बारात का रोजा रखते समय नियत दिल से की जाती है। इसे बोलकर कहना जरूरी नहीं होता, लेकिन अगर कोई शब्दों में कहना चाहे तो सरल तरीके से कह सकता है।
नियत: मैं शब ए बरात के मौके पर अल्लाह की रजा के लिए रोजा रख रहा हूं या रख रही हूं। मैं अपने बीते हुए गुनाहों की माफी मांगता हूं या मांगती हूं और अल्लाह से दुआ करता हूं या करती हूं कि वह आने वाले समय में मुझे बेहतर जिंदगी और अच्छी तकदीर दे। यह नियत सुबह सहरी से पहले या सहरी के समय मन में की जा सकती है और दिन भर इसी भावना के साथ रोजा रखा जाता है।
शब ए बारात रोज़ा खोलने की दुआ (Shab E Barat Roza Kholne Ki Dua)
‘अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु व अला रिजा’इ व बिका आमन्तु व अला रिज्किका अफतर्तु।
अल्लाहुम्मा अन्तस्सलाम व मिन्कस्सलाम तबारकता या जलाल वल इकराम।’
इस दुआ को रोजा खोलते समय पढ़ा जाता है। लोग मानते हैं कि इस दुआ के साथ रोजा खोलने से दिल को सुकून मिलता है और अल्लाह का शुक्र अदा किया जाता है।
शब ए बारात रोजा खोलने की नियत (Shab E Barat Roza Kholne Ki Niyat In Hindi)
रोजा खोलते समय भी दिल में यह इरादा होता है कि रोजा अल्लाह की रजा के लिए रखा गया था और अब उसे पूरा किया जा रहा है।
नियत: मैं अल्लाह का नाम लेकर शब ए बरात का रोजा खोल रहा हूं या खोल रही हूं और अल्लाह का शुक्र अदा करता हूं या करती हूं।
शब-ए-बारात के रोजे का महत्व
शब-ए-बारात के बाद रखा जाने वाला रोजा इबादत और आत्मसंयम से जुड़ा माना जाता है। इस रोजे के जरिए लोग खुद को बेहतर इंसान बनाने की कोशिश करते हैं और आने वाले रमजान के लिए मानसिक और रूहानी तैयारी करते हैं। यह रोजा सब्र, सादगी और अल्लाह पर भरोसे का प्रतीक माना जाता है। इसलिए बहुत से लोग शब-ए-बारात की रात के बाद रोजा रखना पसंद करते हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जानाकारियों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।