Morning Tips: हिंदू धर्म में पेड़-पौधों और प्राकृति को बहुत महत्व दिया गया है। इनमें से तुलसी और केले जैसे कुछ ऐसे खास पेड़-पौधे होते हैं, जिनमें देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए खास मौकों पर इन पवित्र पेड़ों की पूजा की जाती है। माना जाता है कि, इनकी छत्र-छाया में विधि-विधान से पूजा और जप करने से साधक को सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वरदान मिलता है। कई ऐसे पेड़ भी होते हैं, जिनके दर्शन मात्र से कई लाभ मिल जाते हैं। वास्तुशास्त्र में इन पेड़ों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि, सुबह उठकर लोगों को इन पेड़ के दर्शन अवश्य करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है।
- हिन्दू धर्म के अनुसार, पीपल में भगवान विष्णु वास करते हैं। पीपल के पेड़ का सुबह दर्शन करने, दोपहर में जल चढ़ाने और शाम के समय पीपल के पेड़ के पास घी का दीपक जलाने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है।
- शमी के वृक्ष में शनि का पेड़ भी कहा जाता है। मान्यता है कि रोजाना शमी के पौधे की पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन की सारी परेशानियां दूर कर देते हैं। रोजाना सुबह शमी के वृक्ष के दर्शन करने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
- भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय है। बेलपत्र को शिव का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि घर में बेलपत्र का पेड़ होने से कभी दरिद्रता नहीं आती है। सुबह बेलपत्र के दर्शन मात्र से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में मां लक्ष्मी का वास बना रहता है।
- हिन्दू धर्म में मान्यता है कि आंवले के पेड़ में मां लक्ष्मी और नारायण वास करते हैं। रोजाना सुबह आंवले के दर्शन करने और शाम को इसके नीचे घी का दीप प्रज्जवलित करने से घर में धन संपदा की वृद्धि होती है
- अशोक का पेड़ का वर्णन शुभ एवं मंगलकारी वृक्ष के रूप में ब्रह्मवैवर्त पुराण में किया गया है। यह पेड़ मनुष्य के तमाम शोक दूर करने की क्षमता रखता है। जिस घर में अशोक का पेड़ लगा होता है वहां बिना कोई बाधा के सभी कार्य पूरे हो जाते हैं।
- वटवृक्ष में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास माना जाता है। अखंड सौभाग्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि के लिए वटवृक्ष की पूजा की जाती है। शास्त्रों में इस वृक्ष के महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है। सुबह इसके देखने मात्र से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
