अध्यात्म

Sawan Somvar: क्या सावन के हर सोमवार शिव मंदिर जाना जरूरी है , क्या घर पर पूजा करने से भी मिलेगा फल

Sawan Somvar: क्या सावन के प्रत्येक सोमवार शिव मंदिर जाना जरूरी है? क्या सावन के सोमवार मंदिर न जाने पर अधूरा रहेगा व्रत। सावन सोमवार पर मंदिर ना जाने की स्थिति में क्या घर पर कर सकते हैं पूजा।

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सावन के सोमवार पर मंदिर जाने का क्या है नियम

Sawan Somvar: सावन आते ही शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। खासकर सावन सोमवार को सुबह से ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतार दिखाई देती है। लेकिन इसी में कई लोग ऑफिस, काम या कभी सेहत की वजह आदि से शिव मंदिर नहीं जा पाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सावन के हर सोमवार शिव मंदिर जाना जरूरी है? यदि नौकरी, बीमारी, यात्रा या घर की जिम्मेदारियों के कारण मंदिर न जा पाएं तो क्या व्रत और पूजा अधूरी मानी जाएगी?

अगर आपका भी यही सवाल है कि क्या सावन के हर सोमवार शिव मंदिर जाना जरूरी है तो इसका जवाब नहीं है। सावन सोमवार को शिव मंदिर जाना शुभ माना जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि मंदिर गए बिना आप व्रत नहीं रख सकते या घर पर पूजा नहीं कर सकते। ध्यान दें कि भगवान शिव की उपासना में स्थान से अधिक श्रद्धा, संयम और मन की सच्चाई को महत्व दिया गया है। आप मंदिर जाकर जल चढ़ाएं या घर में शिवलिंग के सामने बैठकर उनका स्मरण करें- पूजा आपके भक्ति भाव पर निर्भर करती है।

सावन सोमवार को मंदिर जाने की परंपरा क्यों है

सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है और सावन का महीना भी उन्हें विशेष रूप से प्रिय बताया गया है। इसलिए सावन के सोमवार का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और बेलपत्र अर्पित करते हैं।

इस दिन मंदिर में घंटियों की आवाज, शिव मंत्र, जलाभिषेक और आसपास दिखाई देती भक्ति मन को पूजा में लगा देती है। कई बार घर पर बैठकर जो एकाग्रता नहीं बन पाती, वह मंदिर के वातावरण में सहज ही मिल जाती है। यही कारण है कि लोग कोशिश करते हैं कि सावन के प्रत्येक सोमवार शिव मंदिर अवश्य जाएं। यहीं से यह परंपरा बनी है।

एक सोमवार मंदिर नहीं गए तो क्या व्रत टूट जाएगा

यदि आपने सावन सोमवार का व्रत रखा है, लेकिन किसी कारण मंदिर नहीं जा सके तो केवल इससे व्रत नहीं टूटता। व्रत का अर्थ सिर्फ भूखा रहना या मंदिर पहुंचना नहीं है। व्रत अपने व्यवहार, भोजन और विचारों में संयम रखने का संकल्प भी है।

हो सकता है कि उस दिन आपकी तबीयत ठीक न हो, घर में किसी बीमार व्यक्ति की देखभाल करनी हो, ऑफिस का जरूरी काम हो या आसपास शिव मंदिर उपलब्ध न हो। ऐसी स्थिति में मन में अपराधबोध रखने की आवश्यकता नहीं है। भक्ति में भक्त का भाव सबसे ऊपर रखा जाता है।

घर पर सावन सोमवार की पूजा कैसे करें

मंदिर जाना संभव न हो तो सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थान को साफ कर लें। घर में शिवलिंग है तो सामान्य जल से अभिषेक करें। शिवलिंग न हो तो भगवान शिव की तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा की जा सकती है।

शिवजी को बेलपत्र, सफेद फूल, फल या जो भी सात्विक वस्तु उपलब्ध हो, वह अर्पित करें। कोई सामग्री न हो तो दोनों हाथ जोड़कर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा पढ़ सकते हैं या कुछ मिनट शांत बैठकर महादेव का ध्यान कर सकते हैं। पूजा लंबी हो, यह जरूरी नहीं; पूजा के समय आपका मन वहां उपस्थित हो, यह अधिक जरूरी है।

एक बात का ध्यान रखें कि घर में रखा शिवलिंग यदि किसी विशेष विधि से स्थापित नहीं है, तब भी उसकी पूजा सरल भाव से की जा सकती है। अभिषेक के नाम पर बहुत अधिक दूध, दही या दूसरी सामग्री बहाना आवश्यक नहीं। स्वच्छ जल की एक छोटी धारा भी पर्याप्त है।

क्या ऑनलाइन दर्शन मंदिर जाने का विकल्प हैं

यदि आप बुजुर्ग हैं, बीमार हैं या घर से निकलना संभव नहीं है तो किसी शिव मंदिर के ऑनलाइन दर्शन कर सकते हैं। इससे मन पूजा से जुड़ सकता है, लेकिन इसे किसी नियम को पूरा करने की मजबूरी न बनाएं। केवल स्क्रीन पर दर्शन कर लेने से अधिक महत्वपूर्ण रहेगा कि आप कुछ समय शांत होकर शिव का नाम लें।

सावन हमें यह याद दिलाने आता है कि भक्ति केवल मंदिर की चौखट तक सीमित नहीं है। किसी परेशान व्यक्ति की मदद करना, रोगी की सेवा करना, क्रोध पर नियंत्रण रखना और किसी को जानबूझकर दुख न देना भी शिव उपासना का हिस्सा हो सकता है।

मंदिर जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान

यदि मंदिर जा रहे हैं तो अपनी सुविधा और स्वास्थ्य देखकर समय चुनें। भीड़ में धक्का-मुक्की करके या किसी दूसरे भक्त को पीछे करके पहले जल चढ़ाने की कोशिश पूजा का भाव कमजोर कर देती है। थोड़ी देर लगे तो धैर्य रखें। मंदिर के नियमों का पालन करें और जलाधारी के पास पूजा सामग्री या प्लास्टिक छोड़कर न आएं।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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