Second Sawan Somwar 2024 Puja Vidhi, Muhurat: सावन का दूसरा सोमवार व्रत 29 जुलाई को यानी आज रखा जाएगा। इस दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की नवमी और दशमी तिथि रहेगी। नक्षत्र भरणी और कृत्तिका रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल मुहूर्त शाम 7:23 बजे से रात 9:24 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा अत्यंत शुभ फलदायी मानी जाती है। चलिए जानते हैं सावन के दूसरे सोमवार की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, आरती और महत्व।
Sawan Ka Dusra Somwar Images (सावन का दूसरा सोमवार फोटो)

Sawan Ka Dusra Somwar Photo
Second Sawan Somwar Puja Muhurat 2024 (दूसरा सावन सोमवार पूजा मुहूर्त)
सावन के दूसरे सोमवार में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 23 मिनट से रात 9 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में शिव जी की पूजा कल्याणकारी साबित होगी।

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Sawan Somwar Vrat Vidhi (सावन सोमवार व्रत विधि)
सावन सोमवार व्रत के दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान कर शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं। फिर घर पर महादेव की विधि विधान पूजा करें। पूरा दिन उपवास रहें। अन्न का सेवन न करें। फलाहार ले सकते हैं। इसके बाद शाम में फिर से स्नान करें और भोले बाबा की पूजा करें। इस दौरान सावन सोमवार व्रत की कथा भी सुनें। इसके बाद व्रत का पारण कर सकते हैं।

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Sawan Somwar Puja Vidhi (सावन सोमवार पूजा विधि)
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
- सबसे पहले गणेश भगवान की पूजा करें।
- फिर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
- इसके बाद भगवान शिव को बेल पत्र, पुष्प, जल, शहद, और दूध चढ़ाएं।
- शाम में भी विधि विधान शिव जी की पूजा करें।
- सावन सोमवार की कथा सुनें और शिव जी की आरती करें।
- फिर भोग लगाकर प्रसाद सभी में बांट दें।
Sawan Somwar Vrat Mantra (सावन सोमवार मंत्र)
सावन सोमवार की पूजा के समय भगवान शिव के “ओम् नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें।
Sawan Somwar Vrat Aarti (सावन सोमवार व्रत आरती)
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमंडल, चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी, जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरती, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
लक्ष्मी व सावित्री, पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
Sawan Somwar Vrat Mahatva (सावन सोमवार व्रत महत्व)
सावन सोमवार व्रत रखने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है। कहते हैं इससे घर-परिवार में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है। ये व्रत वैवाहिक जीवन में भी खुशहाली लाता है।
