Ya Kundendu Tusharahara Dhavala Lyrics: या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, सरस्वती वंदना प्रार्थना लिरिक्स अर्थ सहित
- Authored by: Srishti
- Updated Jan 23, 2026, 07:05 AM IST
Ya Kundendu Tusharahara Dhavala, Basanat Panchami Saraswati Mata Vandana Lyrics: हिन्दु धर्म में सरस्वती, ज्ञान, संगीत, कला, बुद्धि तथा विद्या की देवी हैं। वह सरस्वती, लक्ष्मी तथा पार्वती रूपी त्रिमूर्ति का भाग हैं। आज बसंत पंचमी के अवसर पर आपको मां सरस्वती की वंदना प्रार्थना (या कुन्देन्दुतुषारहारधवला) को गाकर मां का आशीर्वाद लेना चाहिए।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला सरस्वती वंदना प्रार्थना (pc: pinterest)
Ya Kundendu Tusharahara Dhavala, Basanat Panchami Saraswati Mata Vandana Lyrics: भगवान ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं तथा उन्होंने ही देवी सरस्वती की रचना भी की थी। इसीलिये उन्हें भगवान ब्रह्मा की पुत्री के रूप में भी जाना जाता है। देवी सरस्वती को चतुर्भुज रूप में वर्णित किया गया है। वह अपने दो हाथों में माला एवं पुस्तक धारण करती हैं तथा अन्य दो हाथों से वीणा वादन करती हैं। या कुंदेंदु तुषार हार धवला स्तुति देवी सरस्वती को समर्पित है। यह स्तुति प्रसिद्ध सरस्वती स्तोत्रम का भाग है। बसंत पंचमी की पूजा में सरस्वती पूजा के समय इस स्तुति को जरूर गाया जाता है। यहां से आप इसके संस्कृत और इंग्लिश के लिरिक्स देख सकते हैं। साथ ही इस स्तुति, सरस्वती वंदना प्रार्थना का हिंदी में अर्थ भी समझाया गया है।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता सरस्वती वंदना प्रार्थना लिरिक्स-
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
सरस्वती वंदना अर्थ
जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चन्द्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शङ्कर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही सम्पूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली माँ सरस्वती हमारी रक्षा करें। शुक्लवर्ण वाली, सम्पूर्ण चराचर जगत् में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिन्तन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अँधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान् बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलङ्कृत, भगवती शारदा (देवी सरस्वती) की मैं वन्दना करता हूँ।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता लिरिक्स इन इंग्लिश-
Ya Kundendu Tusharahara Dhavala Ya Shubhra Vastravrita
Ya Veena Varadanda Manditakara Ya Shveta Padmasana
Ya Brahmachyuta Shankara Prabhritibhir Devaih Sada Pujita
Sa Mam Pattu Saravatee Bhagavatee Nihshesha Jadyapaha॥1॥
Shuklam Brahmavichara Sara, Parmamadyam Jagadvyapineem
Veena Pustaka Dharineema Bhayadam Jadyandhakarapaham।
Haste Sphatikamalikam Vidadhateem Padmasane Samsthitam
Vande Tam Parmeshvareem Bhagwateem Buddhipradam Sharadam॥2॥
सरस्वती वंदना विधि
- सरस्वती वंदना पढ़ने से पहले माता की प्रतिमा के सामने धूप-दीप और अगरबत्ती जलाएं।
- वंदना शुरु करने से पहले इस मंत्र से खुद को और आसन को शुद्ध करें-
य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाहान्तर : शुचि: ||
- इसके बाद पूरी भक्ति से मां सरस्वती की वंदना करें।
सरस्वती वंदना का महत्व
सरस्वती माता की इस प्रार्थना वंदना के नियमित पाठ से मन की चंचलता दूर होती है और मन एक जगह पर स्थिर होता है। जिससे पढ़ाई में ध्यान लगाना आसान हो जाता है।इतना ही नहीं इस वंदना के नियमित पाठ से सिर दर्द या तनाव से भी मुक्ति मिलती है। जिन लोगों की स्मरण शक्ति की कमी है उनके लिये भी यह वंदना बेहद उपयोगी साबित होती है। इस वंदना को करने से दिमाग तेज होता है। खासकर पढ़ने वाले बच्चों को इस वंदना का पाठ सुबह शाम अवश्य करना चाहिए।