Saphala Ekadashi Vrat Katha Hindi (सफला एकादशी व्रत कथा): पौष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है, जो नाम के अनुसार ही जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है। इस व्रत में भगवान नारायण की पूजा और व्रत कथा का पाठ विशेष महत्व रखता है। कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। इस साल सफला एकादशी 15 दिसंबर 2025 को मनाई जा रही है। कथा सुनने या पढ़ने मात्र से अश्वमेघ यज्ञ का पुण्य मिलता है और सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
सफला एकादशी व्रत कथा
प्राचीन समय में चंपावती नाम की एक नगरी थी, जहां महिष्मान नाम का राजा राज्य करता था। राजा के पांच पुत्र थे, जिनमें सबसे बड़ा पुत्र लुम्पक बहुत दुष्ट और पापी स्वभाव का था। वह परस्त्री गमन, वेश्यागमन और पिता का धन व्यर्थ खर्च करने जैसे बुरे काम करता था। देवता, ब्राह्मण और वैष्णवों का अपमान करना उसकी आदत थी। राजा इससे इतने दुखी हुए कि उन्होंने लुम्पक को राज्य से निकाल दिया।
जंगल में भटकने लगा लुम्पक
अब लुम्पक जंगल में भटकने लगा। दिन में जंगल में रहता और रात को नगरी में चोरी करता। धीरे-धीरे पूरी नगरी उससे डरने लगी। वह पशु मारकर खाने लगा। जंगल में एक बहुत पुराना और विशाल पीपल का पेड़ था, जिसकी लोग भगवान की तरह पूजा करते थे। लुम्पक उसी पेड़ के नीचे रहने लगा।
एक बार पौष कृष्ण पक्ष की दशमी की रात ठंड इतनी पड़ रही थी कि लुम्पक को नींद नहीं आई। वह पूरी रात जागता रहा। ठंड और भूख से उसकी हालत खराब हो गई। अगली सुबह एकादशी को सूर्य की गर्मी से उसे होश आया। कमजोरी के कारण वह पशु मार नहीं सका, इसलिए जंगल से गिरे फल इकट्ठे किए। शाम होने पर उसने उन फलों को पीपल के पेड़ के नीचे लाकर रख दिया और बोला, ‘हे भगवन, ये फल आपको अर्पित हैं, आप ही तृप्त हो जाएं।’
प्रसन्न हुए भगवान विष्णु
अनजाने में ही लुम्पक ने सफला एकादशी का उपवास और रात्रि जागरण पूरा कर लिया। भगवान विष्णु उसके इस अनजाने व्रत से बहुत प्रसन्न हुए। अगली सुबह लुम्पक के सामने एक दिव्य घोड़ा, सुंदर वस्त्र और आभूषण प्रकट हो गए। आकाशवाणी हुई कि ‘हे लुम्पक! सफला एकादशी के व्रत के प्रभाव से तेरे सारे पाप नष्ट हो गए हैं। अब अपने पिता के पास जाकर राज्य संभालो।’
लुम्पक ने पिता के पास जाकर क्षमा मांगी और सारी बात बताई। राजा प्रसन्न हुए और लुम्पक को राज्य सौंप दिया। लुम्पक ने धर्मपूर्वक राज्य किया और अंत में वैकुंठ लोक प्राप्त किया। इसी प्रकार से जो भी षौष माह की सफला एकादशी के व्रत की कथा को पढ़ता या सुनता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और सारे काम सफल होते हैं।
सफला एकादशी कथा सुनने से मिलता है यह फल?
सफला एकादशी का व्रत करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सफलता मिलती है। कथा पढ़ने या सुनने मात्र से अश्वमेघ यज्ञ का पुण्य प्राप्त होता है। व्रत रखने वाले को हर क्षेत्र में सफलता, कष्टों से मुक्ति और अंत में मोक्ष मिलता है। भगवान विष्णु की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
