लखनऊ में गन्ना संस्थान के गेट पर ताला लगा मिलने से नाराज किसान नेता राकेश टिकैत अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। गन्ना संस्थान में शुक्रवार को किसान पंचायत होनी थी। गेट बंद होने पर टिकैत ने नाराजगी जताते हुए ऐलान किया कि जब तक गेट नहीं खुलेगा, उनका धरना जारी रहेगा। उन्होंने वर्तमान में अधिग्रहीत की जा रही जमीन का मुआवजा 2013 की सर्किल दरों के आधार पर तय किए जाने पर भी आपत्ति जताई।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि वह गेट खुलने तक मौके पर डटे रहेंगे। उन्होंने प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर किसानों से धरना-प्रदर्शन करने का भी ऐलान किया। टिकैत के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर स्थानीय पुलिस बल तैनात किया गया है।
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अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे-टिकैत
टिकैत ने ’पीटीआई/भाषा’ से कहा कि किसानों की बैठक 23 अक्टूबर को प्रस्तावित है और वे इसकी तैयारियों के लिए संस्थान पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि अगर किसानों को परिसर के अंदर बैठक करने की इजाजत नहीं दी गई, तो वे गेट के बाहर ही बैठक करेंगे और अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने का मूल्य बढ़ाना, बकाया भुगतान कराना, धान खरीद केंद्रों को सुचारु रूप से संचालित करना और विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहीत भूमि का उचित मुआवजा देना शामिल है।
धान किसानों को मिले इतना रुपया
टिकैत ने दावा किया कि धान किसानों को अपेक्षित कीमत से करीब एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कम मिल रहे हैं। उन्होंने वर्तमान में अधिग्रहीत की जा रही जमीन का मुआवजा 2013 की सर्किल दरों के आधार पर तय किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों के बजाय उद्योगपतियों और बड़े कारोबारी समूहों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।
