Sankashti Chaturthi May 2026: मई 2026 में संकष्टी चतुर्थी को लेकर कई लोगों के मन में यही सवाल है कि व्रत 5 मई को रखा जाए या 6 मई को। दरअसल, इस बार चतुर्थी तिथि (ekdant sankashti chaturthi) 5 मई की सुबह से शुरू होकर 6 मई की सुबह तक रहेगी, इसलिए भ्रम होना स्वाभाविक है। लेकिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत हमेशा उस दिन रखा जाता है, जब चतुर्थी तिथि के दौरान चंद्र दर्शन (चंद्रोदय) होता है। यही नियम इस व्रत की तिथि तय करता है।
मई 2026 में संकष्टी चतुर्थी कब है
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 मई 2026 को सुबह 05:24 बजे से शुरू होकर 6 मई को सुबह 07:51 बजे तक रहेगी। वहीं संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय 5 मई को रात 10:34 बजे होगा। ऐसे में चूंकि चंद्र दर्शन 5 मई को हो रहा है, इसलिए एकदन्त संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 मई, मंगलवार को ही रखा जाएगा। 6 मई को सुबह को सूर्योदय के समय चतुर्थी तिथि तो रहेगी, लेकिन उस दिन चंद्र दर्शन नहीं होने के कारण व्रत नहीं किया जाएगा।
मई 2026 में एकदन्त संकष्टी चतुर्थी तारीख और समय
- ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - मई 05, 2026 को 05:24 am बजे से
- ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि समापन - मई 06, 2026 को 07:51 am बजे पर
- एकदन्त संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 10:34 pm बजे पर
एकदन्त संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को एकदन्त संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश के एकदन्त स्वरूप की पूजा की जाती है। एकदन्त का अर्थ है – एक दांत वाले गणेश जी। गणपति का यह स्वरूप हमें त्याग, सहनशीलता और विनम्रता का संदेश देता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान परशुराम कैलाश पर भगवान शिव से मिलने पहुंचे, तो गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। इससे क्रोधित होकर परशुराम ने अपने परशु से गणेश जी पर प्रहार किया, जिससे उनका एक दांत टूट गया। इसके बाद वे 'एकदन्त' के नाम से प्रसिद्ध हुए। इसी के साथ यह कथा हमें यह भी सिखाती है कि कर्तव्य के लिए समर्पण और अनुशासन कितना महत्वपूर्ण है।
एकदन्त संकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे करें
संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे सभी विघ्न-बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। इस दिन व्रती सुबह से व्रत रखते हैं और रात में चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलते हैं। गणेश जी की पूजा में दूर्वा, मोदक, लड्डू और लाल फूल विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं।
मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत जीवन की परेशानियों को कम करता है और सुख-समृद्धि का मार्ग खोलता है। खासकर जो लोग अपने कामों में बार-बार रुकावटों का सामना कर रहे होते हैं, उनके लिए यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है।
एकदन्त संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि
व्रत रखने वाले लोग सुबह स्नान के बाद संकल्प लेते हैं और दिनभर उपवास रखते हैं। शाम को गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। पूजा में गणेश जी की आरती और व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है। इस बार एकदन्त संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ रही है, जिसे और भी शुभ संयोग माना जाता है। ऐसे में यह व्रत विशेष फल देने वाला हो सकता है।
