Sankashti Chaturthi February 2026 Puja Samagri List (द्विजप्रिय संकष्टी संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा सामग्री): 5 फरवरी 2026, गुरुवार को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा क्योंकि इस दिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन महीना वर्ष का अंतिम महीना माना जाता है, ऐसे में यह विक्रम संवत् 2082 की आखिरी संकष्टी चतुर्थी भी है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे संकटों से मुक्ति पाने का विशेष दिन माना जाता है।
मान्यता है कि जो लोग इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करते हैं, उनके जीवन से परेशानियां धीरे-धीरे दूर होती हैं और कामों में आ रही रुकावटें खत्म होने लगती हैं। इसके साथ ही इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक संकट कम होते हैं।
फाल्गुन माह की यह संकष्टी चतुर्थी पूरे साल की अंतिम संकष्टी होने के कारण और भी खास मानी जाती है। माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा और व्रत का फल लंबे समय तक मिलता है। आइए जानते हैं कि इस दिन पूजा के लिए क्या-क्या सामग्री लगेगी?
संकष्टी चतुर्थी पूजा सामग्री
संकष्टी चतुर्थी की पूजा के लिए कुछ खास चीजों की जरूरत होती है। इनमें भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर, दूर्वा घास, लाल या पीले फूल, दीपक, घी या तेल, अगरबत्ती, धूप, रोली, चावल, मोदक या लड्डू, फल, मिठाई और जल का कलश शामिल होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए तांबे या किसी साफ बर्तन में जल रखा जाता है। पूजा सामग्री को साफ और श्रद्धा के साथ उपयोग करना शुभ माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूरी पूजा सामग्री
संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए पूजा सामग्री पहले से तैयार कर लेना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान इन सभी चीजों का उपयोग किया जाता है।
भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर, पूजा चौकी या लकड़ी का पाटा, लाल या पीला कपड़ा, कलश, तांबे या पीतल का लोटा, शुद्ध जल, गंगाजल, सुपारी, नारियल, आम या अशोक के पत्ते, रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत (चावल), फूलों की माला, लाल या पीले फूल, दूर्वा घास (21 या 11 तिनके), पान के पत्ते, लौंग, इलायची, मिश्री, शहद, घी, दूध, दही, शक्कर, पंचामृत, धूप, दीपक, रूई की बाती, तेल या घी, घंटी, पूजा की थाली, तांबे या पीतल का पात्र, चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल से भरा बर्तन और भोग के लिए मोदक, लड्डू, बेसन या बूंदी के लड्डू, गुड़, फल जैसे केला, सेब, संतरा, नारियल, मिठाई, खीर या प्रसाद में बनने वाला सात्विक भोजन रखा जाता है।
व्रत पारण के लिए फल, साबूदाना, मूंगफली, आलू, दूध से बनी चीजें और व्रत में खाए जाने योग्य चीजें भी पूजा सामग्री के साथ जुटा लें।
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
शाम के समय पूजा के स्थान को साफ करके वहां भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर गणेश जी का ध्यान किया जाता है। भगवान को दूर्वा, फूल और भोग अर्पित किए जाते हैं। गणेश जी को मोदक या लड्डू विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं, इसलिए भोग में इन्हें जरूर रखा जाता है। पूजा के दौरान गणेश मंत्र या गणेश स्तुति का पाठ किया जाता है। इसके बाद चंद्रमा निकलने पर चंद्रदेव को जल अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे रखा जाता है?
संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक रखा जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहने जाते हैं और मन में भगवान गणेश का ध्यान किया जाता है। व्रती पूरे दिन फलाहार करते हैं या फिर कुछ लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं।
दिनभर भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है और शाम के समय पूजा की जाती है। संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व होता है। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर भगवान गणेश की पूजा की जाती है और इसके बाद ही व्रत खोला जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
