Sankarshan Chaturthi 2026: संकर्षण चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं है बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी को संकर्षण चतुर्थी कहा जाता है, जिसका विशेष महत्व संकटों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति से जुड़ा माना जाता है। इस दिन भक्त अपने जीवन के संकटों और परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए व्रत रखते हैं और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
पंचांग गणना के अनुसार वैशाख शुक्ल चतुर्थी तिथि 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7:27 बजे प्रारम्भ हो रही है और 21 अप्रैल 2026 को सुबह 4:14 बजे समाप्त होगी। चतुर्थी तिथि का विस्तार लगभग 14 घंटे 36 मिनट तक रहेगा। संकर्षण चतुर्थी पूजा विधि के बारे में यहां डिटेल में जानकारी दी गई है।
सुबह की तैयारी और स्नान
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान को साफ करके उसे गंगाजल से पवित्र करें। मन को शांत करके व्रत का संकल्प लें कि आप पूरे नियम और श्रद्धा के साथ पूजा करेंगे।
गणेश जी की स्थापना
पूजा स्थल पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें लाल या पीले आसन पर बैठाएं। इसके बाद दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं ताकि वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बन सके।
पूजन सामग्री और विधि
भगवान गणेश को सबसे पहले जल अर्पित करें। इसके बाद रोली, चंदन, अक्षत और फूल चढ़ाएं। गणपति बप्पा को दूर्वा घास बहुत प्रिय होती है, इसलिए इसे जरूर अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें।
भोग और प्रसाद
भगवान गणेश को मोदक और लड्डू बहुत पसंद हैं, इसलिए इन्हें भोग में जरूर शामिल करें। आप फल और मिठाई भी अर्पित कर सकते हैं। भोग लगाने के बाद सभी परिवारजनों में प्रसाद बांटें।
मंत्र-पाठ और दान-पुण्य
संकर्षण चतुर्थी के दिन गणेश चालीसा और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मन को शांति मिलती है। इसके अलावा इस दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन दान करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।
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