Sankarshan Chaturthi Paran Time : 20 अप्रैल 2026 को संकर्षण चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे बहुत नियम और श्रद्धा के साथ किया जाता है, लेकिन इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है पारण, यानी व्रत खोलने की सही विधि और सही समय होता है।। अगर पारण सही तरीके से किया जाए, तो व्रत का पूरा फल मिलता है। पारण किसी व्रत का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके बिना व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं कि संकर्षण चतुर्थी व्रत का पारण कैसे करें?
पारण कब करें (Paran Kab Karein)
संकर्षण चतुर्थी का पारण हमेशा चंद्रमा के दर्शन के बाद ही किया जाता है। इस दिन दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को चंद्रमा के उदय होने का इंतजार किया जाता है। जैसे ही चंद्र दर्शन हो जाए, उसके बाद ही व्रत खोला जाता है। बिना चंद्र दर्शन के पारण करना अधूरा माना जाता है। इस कारण 20 अप्रैल को भी चंद्रमा निकलने के बाद ही पारण करना सही रहेगा।
पारण की सही विधि क्या है (Paran Vidhi)
पारण की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होती है। सबसे पहले शाम के समय गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करें। उन्हें दूर्वा, लाल फूल और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय जल या दूध का उपयोग किया जाता है और ‘ॐ सोमाय नमः’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद भगवान गणेश की आरती करें और उनसे अपने जीवन के कष्ट दूर करने की प्रार्थना करें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण करें। यही सही और पूर्ण विधि मानी जाती है।
पारण करते समय इन बातों का रखें ध्यान (Paran Rules)
पारण हमेशा सात्विक भोजन से करना चाहिए। सबसे पहले भगवान को भोग लगाएं, उसके बाद ही स्वयं भोजन करें। व्रत खोलते समय जल्दबाजी न करें और पूरे विधि-विधान का पालन करें। कोशिश करें कि पारण शांत मन और श्रद्धा के साथ करें, क्योंकि यही व्रत की पूर्णता का संकेत होता है।
पारण में क्या खाएं (What to Eat in Paran)
पारण के समय हल्का और सात्विक भोजन करना सबसे अच्छा माना जाता है। आप फल, खीर, साबूदाना या सामान्य घर का बना सात्विक खाना खा सकते हैं। ज्यादा भारी या तला-भुना खाना तुरंत खाने से बचना चाहिए।
पारण का महत्व (Importance of Paran)
व्रत का पारण सिर्फ व्रत खोलना नहीं होता, बल्कि यह पूरी साधना का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। सही समय और सही विधि से पारण करने पर ही व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है। अगर पारण में गलती हो जाए, तो व्रत का प्रभाव कम हो सकता है।
