Bach Baras Ki Aarti Lyrics in Hindi: बछ बारस का पर्व मां और संतान के प्रेम को समर्पित है। इसे गोवत्स द्वादशी और बच्छ बारस भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। गाय और उसके बछड़े की पूजा की जाती है। पूजा के बाद गौ माता की आरती गाने की परंपरा भी है।
बछ बारस की पूजा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं है। इसके भीतर कृतज्ञता का भाव छिपा है। गाय को भारतीय परंपरा में पालन-पोषण, ममता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि पूजा के समय गौ माता के साथ उनके बछड़े को भी सम्मान दिया जाता है।
गौ माता की आरती (Gau Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi)
बछ बारस की पूजा के अंत में परिवार के सदस्य एक साथ गौ माता की आरती गा सकते हैं। देखें गौ माता की आरती के लिरिक्स लिखित में -
ॐ जय जय गौमाता, मैया जय जय गौमाता।
जो कोई तुमको ध्याता, त्रिभुवन सुख पाता॥
सुख समृद्धि प्रदायनी, गौ की कृपा मिले।
जो करे गौ की सेवा, पल में विपत्ति टले॥
आयु ओज विकासिनी, जन जन की माई।
शत्रु मित्र सुत जाने, सब की सुख दाई॥
सुर सौभाग्य विधायिनी, अमृती दुग्ध दियो।
अखिल विश्व नर नारी, शिव अभिषेक कियो॥
ममतामयी मन भाविनी, तुम ही जग माता।
जग की पालनहारी, कामधेनु माता॥
संकट रोग विनाशिनी, सुर महिमा गाई।
गौ शाला की सेवा, संतन मन भाई॥
गौ मां की रक्षा हित, हरी अवतार लियो।
गौ पालक गौपाला, शुभ संदेश दियो॥
श्री गौमाता की आरती, जो कोई सुत गावे।
पदम् कहत वे तरणी, भव से तर जावे॥
ॐ जय जय गौमाता, मैया जय जय गौमाता॥
बछ बारस पर गौ माता की आरती कैसे करें
आरती से पहले पूजा की थाली तैयार कर लें। थाली में घी का दीपक, रोली, अक्षत, फूल और थोड़ा-सा गुड़ रखा जा सकता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री अलग हो सकती है।
सबसे पहले गाय और बछड़े को प्रणाम करें। उन्हें रोली या हल्दी का तिलक लगाएं। फूल अर्पित करें और यदि संभव हो तो गाय को हरा चारा या घर की परंपरा के अनुसार भोजन खिलाएं। ध्यान रहे कि गाय को कोई ऐसी चीज न दें, जो उसके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो।
इसके बाद दीपक जलाएं। आरती की थाली को गाय और बछड़े के सामने सम्मानपूर्वक तीन, पांच या सात बार घुमाएं। आरती पूरी होने पर परिवार की सुख-शांति और बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
बछ बारस की पूजा में किन बातों का ध्यान रखें
पूजा करते समय गाय या बछड़े को जबरदस्ती पकड़ने, सजाने या परेशान करने से बचें। पूजा का अर्थ जीव के प्रति प्रेम और संवेदना दिखाना है। यदि आसपास गाय उपलब्ध नहीं है तो गोशाला जाकर चारा दान किया जा सकता है। इसके अलावा गौशाला की सफाई, उपचार या देखभाल के लिए अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग भी कर सकते हैं।
इस दिन कई क्षेत्रों में गाय के दूध और उससे बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता। मान्यता है कि दूध पर पहला अधिकार बछड़े का है। कुछ परिवार गेहूं से बनी चीजें और चाकू से कटा भोजन भी नहीं खाते।
बछ बारस पर किसकी आरती की जाती है
बछ बारस पर मुख्य रूप से गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। कई परिवारों में इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा होती है। कान्हा का बचपन गायों और बछड़ों के बीच बीता था। उन्हें गोपाल और गोविंद जैसे नाम भी इसी कारण मिले।
पूजा पूरी होने के बाद गौ माता की आरती की जाती है। घर में गाय उपलब्ध न हो तो गौ माता की तस्वीर या मिट्टी से बनाई गई गाय-बछड़े की आकृति के सामने आरती की जा सकती है। श्रद्धा और पूजा का भाव सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
