अध्यात्म

पाकिस्तान के माता हिंगलाज शक्तिपीठ वार्षिकोत्सव में उमड़ा भक्तों का सैलाब, जानिए क्या है इस मंदिर का इतिहास

Hinglaj Mata Temple Festival 2026 Pakistan : पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज माता मंदिर में तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव बीते 19 अप्रैल को संपन्न हो गया। इस दौरान करीब 3 लाख श्रद्धालुओं ने इस उत्सव में भाग लिया।

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हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान

Hinglaj Mata Temple Festival 2026 Pakistan : पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित हिंगलाज माता मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव इस बार बेहद भव्य और सफल रहा। 17 अप्रैल से शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन 19 अप्रैल रविवार को संपन्न हुआ, जिसमें करीब 3 लाख हिंदू श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह उत्सव न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि इससे पाकिस्तान में धार्मिक सौहार्द और एकता का भी मजबूत संदेश मिला।

हर साल लाखों श्रद्धालु करते हैं यहां दर्शन

हिंगलाज माता मंदिर का यह उत्सव भारत और नेपाल के बड़े धार्मिक आयोजनों के बाद तीसरा सबसे बड़ा हिंदू धार्मिक समागम माना जाता है। हर साल यहां करीब 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि इस बार तीन दिन के इस उत्सव में ही लगभग 3 लाख लोग शामिल हुए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को एकता और भाईचारे का प्रतीक माना गया।

कठिन यात्रा के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह

सिंध के थरपारकर, उमरकोट और सांगड़ जैसे इलाकों से हजारों श्रद्धालु पैदल ही हिंगलाज माता मंदिर पहुंचे। कई लोगों ने इस यात्रा को पूरा करने में करीब 20 दिन का समय लिया। पहाड़ी और कठिन रास्तों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। यह यात्रा धार्मिक श्रद्धा के साथ-साथ धैर्य और समर्पण का भी उदाहरण बनी।

क्या है हिंगलाज माता मंदिर का इतिहास और धार्मिक महत्व (History and Significance of Hinglaj Mata Temple)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंगोल नदी के तट पर स्थित हिंगलाज माता मंदिर हिंदू धर्म का एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र स्थल है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने माता सती के शरीर को खंडित किया था, तब यहां उनका ब्रह्मरंध्र यानी सिर गिरा था। इसी कारण यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य माना जाता है।

यह मंदिर किसी भव्य संरचना के रूप में नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक गुफा के रूप में स्थित है, जहां देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि स्वयंभू पिंडी के रूप में उनकी पूजा की जाती है। गुफा के भीतर दिव्य ऊर्जा का अनुभव किया जाता है और यहां सदियों से आस्था का प्रवाह जारी है।

हिंगलाज माता मंदिर की एक खास बात यह भी है कि स्थानीय बलूच मुस्लिम समुदाय भी इस स्थान को ‘नानी का मंदिर’ कहकर सम्मान देता है। यह धार्मिक सौहार्द की अनोखी मिसाल है, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग एक ही आस्था स्थल का सम्मान करते हैं।

यह मंदिर हिंगोल नेशनल पार्क की दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित है, जहां तक पहुंचना आसान नहीं है। श्रद्धालुओं को कठिन रास्तों और लंबी यात्रा से गुजरना पड़ता है, लेकिन मान्यता है कि जो भी यहां सच्चे मन से दर्शन करता है, उसके सभी पाप दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

माना जाता है कि भगवान परशुराम ने यहां तपस्या की थी और भगवान राम ने भी रावण वध के बाद ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए इस स्थान पर माता का पूजन किया था। इस प्रकार यह मंदिर न सिर्फ शक्तिपीठ है, बल्कि कई पौराणिक कथाओं से भी जुड़ा हुआ है।

सरकार और प्रशासन ने किए पुख्ता इंतजाम

उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए बलूचिस्तान सरकार, प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (PDMA) और जिला प्रशासन ने मिलकर व्यापक व्यवस्थाएं कीं। श्रद्धालुओं को राशन किट और जरूरी सामान वितरित किए गए। लासबेला की डिप्टी कमिश्नर हुमैरा बलोच और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नजीबुल्लाह पंद्रानी स्वयं मौके पर मौजूद रहे और व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पाकिस्तान आर्मी, फ्रंटियर कॉर्प्स, पुलिस और लेवीज के जवानों को तैनात किया गया, ताकि पूरे आयोजन के दौरान किसी भी तरह की समस्या न हो और श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें।

मुफ्त चिकित्सा और भोजन की व्यवस्था

उत्सव के दौरान मानव सेवा के तहत कई संस्थाओं ने मिलकर श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त मेडिकल कैंप लगाए। इन कैंपों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और महिला डॉक्टरों ने सैकड़ों लोगों का इलाज किया और उन्हें मुफ्त दवाएं दीं। इसके अलावा श्री हिंगलाज माता वेलफेयर मंडली की ओर से 24 घंटे भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसमें भोजन, ठंडा पानी, शरबत और चाय लगातार उपलब्ध कराई गई।

धार्मिक सौहार्द का मजबूत संदेश

सीनेटर दानेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार तीन गुना अधिक श्रद्धालुओं का आना इस बात का प्रमाण है कि देश में धार्मिक सौहार्द और शांति का माहौल है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव दुनिया को यह संदेश देता है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान किया जाता है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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