ब्रज में कब-कब खेली जाएगी कौन सी होली, जानिए डेट्स और पूरा शेड्यूल
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Feb 11, 2026, 01:11 PM IST
Sal 2026 Braj Mei Holi Kab Hai: ब्रज में होली बेहद उल्लास के साथ 40 दिनों तक मनाई जाती है। यहां की होली बेहद ही खास होती है। इस होली की शुरुआत बसंत पचंमी से हो जाती है। आइए जानते हैं कि ब्रज में किस दिन कौन सी होली खेली जाएगी।
ब्रज होली 2026
Sal 2026 Braj Mei Holi Kab Hai: ब्रज में होली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि लगभग 40 दिनों तक चलने वाला भक्ति और रंगों का महाउत्सव है। ब्रज क्षेत्र होली में बसंत पंचमी से लेकर धुलंडी और हुरंगा तक यह पूरा क्षेत्र राधा-कृष्ण की लीलाओं, फाग गीतों और पारंपरिक आयोजनों से सराबोर रहता है। साल 2026 में 23 जनवरी से इस रंगोत्सव की शुरुआत हो चुकी है, इसके बाद फरवरी और मार्च में अलग-अलग स्थानों पर खास होली खेली जाएगी। आइए जानते हैं ब्रज में कब और कहां कौन सी होली खेली जाएगी?
साल 2026 में ब्रज की होली कब से है?
ब्रज परंपरा के अनुसार होली का आरंभ बसंत पंचमी से माना जाता है। वर्ष 2026 में 23 जनवरी को बसंत पंचमी के साथ मंदिरों में होली का डंडा रोपण हुआ और ठाकुर जी को गुलाल अर्पित किया गया। इसी दिन से वृंदावन, मथुरा, बरसाना और नंदगांव में फाग गीतों की शुरुआत हो गई है और पूरा ब्रज धीरे-धीरे होली के रंग में रंगने लगा है। अब 24 फरवरी से अलग-अलग क्षेत्रों में होली खेली जाएगी।
लड्डू होली (24 और 25 फरवरी 2026)
24 फरवरी 2026 को नंदगांव में फाग आमंत्रण के साथ उत्सव की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी है। इस दिन नंदगांव में लड्डू होली खेली जाती है, जहां भक्त एक-दूसरे पर लड्डू उछालते हैं। इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसके बाद 25 फरवरी 2026 को बरसाना में लड्डू होली मनाई जाएगी। यह आयोजन नंदगांव से आए न्योते की स्वीकृति के बाद उत्सव के रूप में होता है और इसी के साथ पूरे ब्रज में होली का उत्साह चरम पर पहुंचने लगता है।
बरसाना और नंदगांव की लठमार होली (26 और 27 फरवरी 2026)
26 फरवरी 2026 को बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लठमार होली खेली जाएगी। परंपरा के अनुसार नंदगांव के पुरुष बरसाना पहुंचते हैं और राधा रानी की सखियां प्रतीकात्मक रूप से लाठियों से उनका स्वागत करती हैं। पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं। यह आयोजन हास्य, प्रेम और परंपरा का अनोखा संगम है। 27 फरवरी 2026 को नंदगांव में लठमार होली का आयोजन होगा, जहां बरसाना की महिलाएं पहुंचती हैं और वही परंपरा दोहराई जाती है। ढोल-नगाड़ों और रसिया गीतों के बीच पूरा गांव उत्सव में डूब जाता है।
वृंदावन की फूलों की होली और विधवा होली (28 फरवरी 2026)
28 फरवरी 2026 को वृंदावन में फूलों की होली खेली जाएगी। बांके बिहारी मंदिर में गुलाल की जगह फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा की जाती है। यह होली भक्ति और सौम्यता का प्रतीक मानी जाती है। इसी दिन वृंदावन में विधवा होली भी मनाई जाती है, जो सामाजिक बदलाव का प्रतीक है।
छड़ी मार होली (1 मार्च 2026)
1 मार्च 2026 को गोकुल में छड़ी-मार होली खेली जाएगी। यह आयोजन भगवान कृष्ण के बाल रूप से जुड़ा माना जाता है। पुजारी प्रतीकात्मक रूप से छड़ी से रस्म निभाते हैं और भक्तों पर गुलाल उड़ाया जाता है।
रमण रेती की होली (2 मार्च 2026)
2 मार्च 2026 को गोकुल के रमण रेती क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण के बीच होली मनाई जाएगी। यहां भजन, कीर्तन और पूजा के साथ रंगोत्सव का आयोजन होता है।
होलिका दहन (3 मार्च 2026)
3 मार्च 2026 को मथुरा और वृंदावन में होलिका दहन किया जाएगा। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लोग अग्नि के चारों ओर परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
रंगों की मुख्य होली – धुलंडी (4 मार्च 2026)
4 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन रंगवाली होली खेली जाएगी। मथुरा और वृंदावन की गलियां अबीर, गुलाल और रंगों से भर जाएंगी। देश-विदेश से आए श्रद्धालु इस दिन का खास इंतजार करते हैं।
दाऊजी मंदिर की हुरंगा होली (5 और 6 मार्च 2026)
5 मार्च 2026 को बलदेव स्थित दाऊजी मंदिर में हुरंगा होली खेली जाएगी। इस दिन पुरुष कपड़ा फाड़ होली भी खेलते हैं। रंगों के बीच मस्ती का अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। 6 मार्च 2026 को हुरंगा उत्सव के समापन के साथ ब्रज की होली का औपचारिक अंत माना जाता है।
ब्रज होली 2026 का पूरा शेड्यूल
- 24 फरवरी 2026, मंगलवार – फाग आमंत्रण महोत्सव एवं लड्डू होली – नंदगांव (राधा रानी मंदिर)
- 25 फरवरी 2026, बुधवार – लड्डू होली – बरसाना
- 26 फरवरी 2026, गुरुवार – बरसाना की लठमार होली – बरसाना
- 27 फरवरी 2026, शुक्रवार – नंदगांव की लठमार होली – नंदगांव
- 28 फरवरी 2026, शनिवार – फूलों की होली – वृंदावन
- 28 फरवरी 2026, शनिवार – विधवाओं की होली (Widows’ Holi) – वृंदावन
- 1 मार्च 2026, रविवार – छड़ी-मार होली – गोकुल
- 2 मार्च 2026, सोमवार – रमण रेती होली – गोकुल
- 3 मार्च 2026, मंगलवार – होलिका दहन – मथुरा और वृंदावन
- 4 मार्च 2026, बुधवार – रंगवाली होली / धुलंडी – मथुरा और वृंदावन
- 5 मार्च 2026, गुरुवार – हुरंगा होली (दाऊजी का हुरंगा) – दाऊजी मंदिर
- 6 मार्च 2026, शुक्रवार – बलदेव हुरंगा – बलदेव
ब्रज की होली का इतिहास और महत्व
ब्रज की होली भगवान कृष्ण और राधा रानी की लीलाओं से जुड़ी मानी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार कृष्ण ने राधा को रंग लगाकर रंगों के इस उत्सव की शुरुआत की थी। समय के साथ यह परंपरा लोक संस्कृति का हिस्सा बन गई। भक्ति काल में सूरदास, रसखान और अन्य कवियों ने अपने पदों में फाग और होली का सुंदर वर्णन किया। मंदिरों में विशेष श्रृंगार, भजन और रसिया गायन की परंपरा आज भी उसी भाव से निभाई जाती है। ब्रज की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और समानता का उत्सव है। यहां हर व्यक्ति एक ही रंग में रंगा दिखाई देता है। यही कारण है कि ब्रज की होली को दुनिया भर में अनोखी पहचान मिली हुई है।
