अध्यात्म

Panchak in January: जनवरी माह के पंचक की तारीख से लेकर मूल के समय और अमृत योग की सारी जानकारी पढ़ें एक साथ, एक ही खबर में

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 2, 2023, 08:58 AM IST

Panchak in January: जनवरी 2023 देगी शुभ फल बस रखें शुभ घड़ी नक्षत्र पर नजर। पंचक के पांच दिन न करें दक्षिण की ओर यात्रा या न करवाएं छत का निर्माण कार्य। मूल नक्षत्र में संतान के जन्म से होता है पिता को कष्ट। करवानी पड़ती है विशेष पूजा। अमृत योग काल देता है शुभ फल।

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जनवरी में पंचकों का रखें ध्यान

KEY HIGHLIGHTS
  • पंचक के पांच दिन नही निकलना चाहिए यात्रा पर
  • मूल नक्षत्र में संतान का जन्म देता है पिता को कष्ट
  • अमृत योग काल में यात्रा या कार्य देता है शुभ फल

Panchak in January: जनवरी माह, नये साल का पहला माह। वर्ष 2023 का आगाज। कुछ भी कह लिया जाए लेकिन नये कल की शुरूआत हो चुकी है। नया कल कैसा रहेगा, कैसा नहीं इसके लिए लोग तमाम भविष्यवाणियां और राशिफल देखते हैं। लेकिन माह में कौन सा दिन कैसा रहेगा और किस दिन शुभ कार्य करने चाहिए और कब नहीं करना चाहिए। बहुत बार इन बातों की अनदेखी हम कर देते हैं। इस खबर में हम आपको बताते हैं कि जनवरी माह के वो कौन से दिन हैं जब आप कदम बढ़ाने से पहले थाेड़ा सोच लें। बच्चे का जन्म होने वाला है तो किस घड़ी मुहूर्त में बच्चे के जन्म को टालें और किस योग में नयी शुरूआत करें ताकि सफलता मिल सके।

पंचक के पांच दिनों में बरतें सावधानी

ग्रह नक्षत्रों संजोग से बनने वाले योग को पंचक कहा जाता है। चंद्रमा कुंभ और मीन राशि पर रहता है उस समय को पंचक कहते हैं। घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों के संयोग से पंचक बनता है। हर माह ये योग बनता है। जनवरी माह में 23 तारीख को दोपहर 01ः49 से 27 जनवरी शाम 6ः36 तक पंचक रहेंगे। इन पांच दिनों के मध्य दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से बचें। यदि घर का निर्माण करवा रहे हैं तो छत का कार्य पंचक के बाद पूर्ण करें। इस दौरान लकड़ी के इस्तेमाल से बचें। पांच दिन पलंग पर बैठकर खाना न खाएं।

मूल नक्षत्र से रहें सावधान

छह तरह के मूल नक्षत्र होते हैं। अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मघा और रेवती। जिनमें से अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती मूल जनवरी माह में रहेगा। 9 जनवरी सुबह 6ः06 बजे से 11 जनवरी प्रातः 11ः 50 आष्लेषा मूल रहेगा। 18 जनवरी शाम 6ः21 से दोपहर 12ः 38 तक ज्येष्ठा मूल रहेगा। 26 जनवरी शाम 6ः57 से 28 जनवरी शाम 7ः56 तक मूल नक्षत्र रहेगा। मूल नक्षत्र को अशुभ नक्षत्र के रूप में जाना जाता है। मूल काे किसी चीज का केंद्र माना जाता है। केतु ग्रह के असर के कारण मूल नक्षत्र नकारात्मक परिणाम दे सकता है। मूल नक्षत्र जड़ और जिज्ञासु होने से जुड़ा है। यह पहला नक्षत्र है जहां से व्यक्ति आध्यात्मिक यात्रा शुरू कर सकता है।

अमृत योग

जैसा कि नाम से विदित है अमृत योग अमृतमयी फल देने वाला होता है। ज्योतिषशास्त्र में ये एक विशेष योग का स्थान रखना है। इस योग में किये गए कार्य, यात्रा सफल होती हैं। जनवरी माह में 18 तारीख को सुबह 7ः08 बजे से सायं 5ः21 बजे तक और 27 जनवरी सुबह 7ः06 से शाम 6ः 36 बजे तक अमृत योग रहेगा।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।)

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