अध्यात्म

Ravivar chalisa: रविवार को करें इस सूर्य चालीसा का जाप, खुलेंगे भाग्य के द्वार, सोने सी चमकेगी किस्मत

Ravivar chalisa lyrics: रविवार को कौन सी चालीसा का जाप करें- इसकी जानकारी आपको यहां दे रहे हैं। देखें रविवार के लिए सूर्य चालीसा लिखित में अर्थ सहित। इसके जाप से जीवन में सकारात्मकता आती है।

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रविवार को कौन सी चालीसा का जाप करें (Pinterest)

Ravivar chalisa lyrics: हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता को समर्पित माना गया है। रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्य देव (surya dev) की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। सूर्य केवल एक ग्रह या देवता नहीं, बल्कि जीवन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सफलता के प्रतीक हैं। मान्यता है कि रविवार को श्रद्धा और नियम से सूर्य चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और भाग्य के द्वार खुलने लगते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य आत्मविश्वास, मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और पिता से जुड़े सुख का कारक ग्रह है। ऐसे में रविवार को सूर्य चालीसा का जाप व्यक्ति के आत्मबल को मजबूत करता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है।

Ravivar Chalisa in Hindi (Surya Chalisa Likhit mein)

॥ दोहा ॥

कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग,

पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥

॥ चौपाई ॥

जय सविता जय जयति दिवाकर,

सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर॥

भानु पतंग मरीची भास्कर,

सविता हंस सुनूर विभाकर॥

विवस्वान आदित्य विकर्तन,

मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥

अम्बरमणि खग रवि कहलाते,

वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥ 4

सहस्त्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि,

मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥

अरुण सदृश सारथी मनोहर,

हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥

मंडल की महिमा अति न्यारी,

तेज रूप केरी बलिहारी॥

उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते,

देखि पुरन्दर लज्जित होते॥8

मित्र मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर,

सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥

पूषा रवि आदित्य नाम लै,

हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥

द्वादस नाम प्रेम सों गावैं,

मस्तक बारह बार नवावैं॥

चार पदारथ जन सो पावै,

दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥12

नमस्कार को चमत्कार यह,

विधि हरिहर को कृपासार यह॥

सेवै भानु तुमहिं मन लाई,

अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥

बारह नाम उच्चारन करते,

सहस जनम के पातक टरते॥

उपाख्यान जो करते तवजन,

रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥16

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है,

प्रबल मोह को फंद कटतु है॥

अर्क शीश को रक्षा करते,

रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत,

कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥

भानु नासिका वासकरहुनित,

भास्कर करत सदा मुखको हित॥20

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे,

रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥

कंठ सुवर्ण रेत की शोभा,

तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥

पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर,

त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥

युगल हाथ पर रक्षा कारन,

भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥24

बसत नाभि आदित्य मनोहर,

कटिमंह, रहत मन मुदभर॥

जंघा गोपति सविता बासा,

गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥

विवस्वान पद की रखवारी,

बाहर बसते नित तम हारी॥

सहस्त्रांशु सर्वांग सम्हारै,

रक्षा कवच विचित्र विचारे॥28

अस जोजन अपने मन माहीं,

भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥

दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै,

जोजन याको मन मंह जापै॥

अंधकार जग का जो हरता,

नव प्रकाश से आनन्द भरता॥

ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही,

कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥32

मंद सदृश सुत जग में जाके,

धर्मराज सम अद्भुत बांके॥

धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा,

किया करत सुरमुनि नर सेवा॥

भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों,

दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥

परम धन्य सों नर तनधारी,

हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥36

अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन,

मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥

भानु उदय बैसाख गिनावै,

ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥

यम भादों आश्विन हिमरेता,

कातिक होत दिवाकर नेता॥

अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं,

पुरुष नाम रविहैं मलमासहिं॥40

॥ दोहा ॥

भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य,

सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥

सूर्य चालीसा पाठ की सही विधि

रविवार की सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का उच्चारण करें।

इसके बाद शांत मन से सूर्य चालीसा का पाठ करें। यदि संभव हो तो पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। श्रद्धा, नियम और सकारात्मक भावना से किया गया पाठ ही पूर्ण फल प्रदान करता है।

सूर्य चालीसा के भावार्थ का महत्व

सूर्य चालीसा में सूर्य देव के तेज, ज्ञान, शक्ति और संरक्षण स्वरूप का वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि सूर्य देव की कृपा से दुःख, दरिद्रता और भय दूर होते हैं तथा व्यक्ति को चारों पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। चालीसा का संदेश यही है कि जीवन में प्रकाश तभी आता है, जब भीतर विश्वास और कर्म दोनों जागृत हों।

रविवार को सूर्य चालीसा क्यों बन सकती है जीवन बदलने की शुरुआत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति नियमित रूप से सूर्य चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन में आत्मविश्वास बढ़ता है, निर्णय स्पष्ट होते हैं और सफलता के रास्ते स्वयं खुलने लगते हैं। यही कारण है कि इसे भाग्य जागृत करने वाली चालीसा भी कहा जाता है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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