Bhagwan Parshuram Ji Ki Aarti (भगवान परशुराम जी की आरती): भगवान परशुराम जी को शक्ति, धर्म और न्याय का प्रतीक माना जाता है। वे भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं और उनका जीवन अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है। परशुराम जी की आरती में उनके पराक्रम, तपस्या और धर्म की रक्षा करने के गुणों का वर्णन किया जाता है। यहां से आप परशुराम जी की आरती के लिरिक्स देख सकते हैं।
परशुराम जी की आरती (Parshuram Ji Aarti)-
ओउम जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी।। ओउम जय।।
जमदग्नी सुत नरसिंह, मां रेणुका जाया।
मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया।। ओउम जय।।
कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला।
चरण खड़ाऊँ शोभे, तिलक त्रिपुण्ड भाला।। ओउम जय।।
ताम्र श्याम घन केशा, शीश जटा बांधी।
सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी।। ओउम जय।।
मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण नैना।
दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दिन रैना।। ओउम जय।।
कर शोभित बर परशु, निगमागम ज्ञाता।
कंध चार-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता।। ओउम जय।।
माता पिता तुम स्वामी, मीत सखा मेरे।
मेरी बिरत संभारो, द्वार पड़ा मैं तेरे।। ओउम जय।।
अजर-अमर श्री परशुराम की, आरती जो गावे।
पूर्णेन्दु शिव साखि, सुख सम्पति पावे।। ओउम जय।।
परशुराम जी की आरती करने की सरल विधि-
भगवान परशुराम जी की आरती करने के लिए सबसे पहले घर में एक साफ और शांत स्थान चुनें और उनकी तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। स्नान करके साफ कपड़े पहनें, फिर दीपक और अगरबत्ती जलाकर भगवान को फूल और प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा और ध्यान से आरती गाएं और दीपक को घुमाते हुए भगवान का स्मरण करें। आरती के अंत में हाथ जोड़कर अपनी प्रार्थना करें और प्रसाद सभी में बांट दें। खासकर अक्षय तृतीया के दिन यह आरती करना बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन सबसे जरूरी है कि आप इसे सच्चे मन और श्रद्धा के साथ करें।
परशुराम जी की आरती करने के लाभ-
भगवान परशुराम जी की आरती करने के कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ माने जाते हैं। नियमित रूप से श्रद्धा के साथ आरती करने से मन शांत होता है और तनाव कम होता है, जिससे जीवन में सकारात्मक सोच बढ़ती है। ये आत्मविश्वास और साहस को मजबूत करती है तथा व्यक्ति को सही और गलत में फर्क समझने की प्रेरणा देती है। आरती से घर का वातावरण भी पवित्र और ऊर्जा से भरपूर रहता है। खासकर अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर पर आरती करने से मन में संतोष तथा आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस होता है।
