अध्यात्म

Ravi Pradosh Vrat Katha: रवि प्रदोष व्रत कथा, ब्राह्मण और चोर की कहानी की कहानी से जानें इस व्रत का महत्व

Ravi Pradosh Vrat Katha (रवि प्रदोष व्रत कथा): आज यानी 1 मार्च को रवि प्रदोष व्रत है। इस व्रत को भानु प्रदोष व्रत के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि रवि प्रदोष व्रत रखने से निरोगी काया की प्राप्ति होती है। यहां से आप आज के प्रदोष व्रत की कथा का पाठ कर सकते हैं। देखें रवि प्रदोष व्रत की कथा।

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रवि प्रदोष व्रत कथा (pc: canva)

Ravi Pradosh Vrat Katha (रवि प्रदोष व्रत कथा): रवि प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा अनुसार, एक गांव में एक बड़ा ही दीन ब्राह्मण निवास करता था। उसकी पत्नी प्रदोष व्रत किया करती थी। उनका एक पुत्र था। एक दिन वह पुत्र गंगास्नान करने के लिए गया लेकिन मार्ग में चोरों ने उसे पकड़ लिया। चोर उस लड़के से कहने लगे कि हम तुम्हें मारेंगे नहीं अगर तुम अपने पिता के गुप्त धन के बारे में हमें बता देते हो। बालक ने कहा कि हे बंधुओं! हम अत्यंत दु:खी दीन हैं। हमारे पास कहां से पैसा आएगा? तब चोरों ने पूछा की तेरे इस पोटली में क्या है? बालक ने कहा कि इसमें मेरी मां ने मेरे लिए रोटियां दी हैं। यह सुनकर चोरों ने उसे जाने दिया। बालक वहां से चलते हुए एक नगर में पहुंच गया।

बालक उस नगर में एक बरगद के पेड़ की छाया में जाकर सो गया। उसी समय नगर के सिपाही चोरों को खोजते हुए आए और उन्हें उस बरगद के पेड़ के नीचे एक बालक मिला जिसे उन्होंने चोर समझकर बंदी बना लिया और उस बालक को राजा के पास ले गए। राजा ने उसे कारावास में डाल दिया। जब वह लड़का घर नहीं लौटा, तब उसे माता-पिता को पने पुत्र की बड़ी चिंता होने लगी। अगले दिन प्रदोष व्रत था। ब्राह्मणी ने विधि विधान प्रदोष व्रत किया और भगवान शंकर से अपने पुत्र की कुशलता की प्रार्थना की। भगवान शंकर ने उस ब्राह्मणी की प्रार्थना स्वीकार कर ली।

फिर उसी रात भगवान शंकर राजा के सपने में आए और उसे आदेश दिया कि उस बालक तो छोड़ दो क्योंकि वह चोर नहीं है, अगर तुम उसे नहीं छोड़ोगे तो तुम्हारा सारा राज्य-वैभव नष्ट हो जाएगा। प्रात:काल ही राजा ने उस बालक को जेल से मुक्त कर दिया। तब बालक ने अपनी सारी कहानी राजा को सुनाई। राजा ने लड़के की सारी बात सुनने के बाद अपने सिपाहियों को बालक के घर भेजा और उसके माता-पिता को ले आने का आदेश दिया। माता-पिता काफी भयभीत नजर आ रहे थे। राजा ने बालक के माता-पिता से कहा कि आप भयभीत न हो। क्योंकि मैं जानता हूं कि आपके बालक ने चोरी नहीं की है। राजा ने ब्राह्मण का दुख दूर करने के लिए उसे 5 गांव दान में दिए। इस तरह ब्राह्मण आनन्द से रहने लगा। शिव जी की दया से उसकी गरीबी दूर हो गई।

धार्मिक मान्यताओं अनुसार जो भी मनुष्य रवि प्रदोष व्रत को करता है, वह सुखपूर्वक और निरोगी जीवन व्यतीत करता है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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