अध्यात्म

रमजान 2026 का तीसरा अशरा स्टार्ट, जानिए क्यों है ये खास, इस दौरान कैसे करें खुदा की इबादत

Ramzan ka Last Ashra Kyu Khas Hota Hai : इस्लाम में रमजान का महीना बेहद पाक माना जाता है। इस महीने के अंतिम 10 दिनों को तीसरा अशरा कहा जाता है। यह अशरा बेहद ही खास होता है। यह जहन्नुम से निजात का अशरा माना जाता है। इन 10 दिनों में खुदा की इबादत से व्यक्ति को जन्नत नसीब होती है। आइए जानते हैं कि इस पूरे अशरे में खुदा की इबादत कैसे करें?

Image

रमजान का आखिरी अशरा क्यों खास है

Ramzan ka Last Ashra Kyu Khas Hota Hai : रमजान का पाक महीना रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं। रमजान का हर दिन अहम होता है, लेकिन आखिरी दस दिन यानी तीसरा अशरा सबसे ज्यादा खास माना जाता है।

रमजान 2026 का आखिरी अशरा अब शुरू हो चुका है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग ज्यादा से ज्यादा इबादत, दुआ और तौबा में समय बिताते हैं ताकि अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांग सकें।

कब से कब तक रहेगा रमजान 2026 का आखिरी अशरा?

इस साल रमजान 2026 का आखिरी अशरा 10 मार्च 2026 की शाम से शुरू होकर 19 मार्च 2026 तक रहने की संभावना है। चांद दिखने के आधार पर इसकी तारीख में थोड़ा बदलाव भी हो सकता है।इस तीसरे अशरे को जहन्नुम से निजात का अशरा कहा जाता है। माना जाता है कि इन दस दिनों में की गई इबादत का सवाब ज्यादा मिलता है और अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को कबूल करता है।

क्यों खास होता है रमजान का आखिरी अशरा (Theesra Asra Kyu Khas Hota Hai)

रमजान के अंतिम दस दिन रूहानी नजर से बहुत अहम माने जाते हैं। इस दौरान लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और अल्लाह के करीब आने की कोशिश करते हैं। इसी अशरे में शब-ए-कद्र की रात भी आती है, जिसे इस्लाम में बहुत बरकत वाली रात माना गया है। यह वह रात है जब कुरान शरीफ नाज़िल (प्रकट) हुई थी। इस रात की इबादत हजार महीनों से बेहतर बताई गई है। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की कोशिश करते हैं।

आखिरी अशरे में कौन-सी रातें होती हैं खास

रमजान के आखिरी दस दिनों में शब-ए-कद्र की तलाश की जाती है। इसकी सटीक तारीख तय नहीं होती, इसलिए इसे आखिरी अशरे की ताक रातों में तलाश करने की बात कही जाती है। इस अशरे की विषम रातों में से एक रात शब-ए-कद्र होती है। यह 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं या 29वीं रात हो सकती है। इन रातों में लोग देर रात तक जागकर नमाज पढ़ते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और अल्लाह से दुआ मांगते हैं। अधिकतर शब-ए-कद्र रमजान की 27वीं रात को होती है।

तीसरे अशरे में किया जाता है एतिकाफ

रमजान के आखिरी अशरे में एतिकाफ करने की परंपरा भी है। एतिकाफ का मतलब मस्जिद या घर में एकांत में रहकर पूरी तरह अल्लाह की इबादत में लग जाना होता है। आमतौर पर पुरुष 20वें रोजे की शाम से यानी 21वीं रात से मस्जिद में एतिकाफ में बैठते हैं और ईद का चांद नजर आने तक वहीं रहते हैं। इस दौरान वह अपना समय नमाज, कुरान की तिलावत, जिक्र और दुआ में बिताते हैं। एतिकाफ के दौरान बिना जरूरी कारण मस्जिद से बाहर निकलने की इजाजत नहीं होती है। दुनियावी कामों से दूरी बनाकर इबादत पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। महिलाएं भी घर में एक तय जगह पर एतिकाफ कर सकती हैं।

आखिरी अशरे में खुदा की इबादत कैसे करें?

रमजान के अंतिम दस दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने को कहा जाता है। इस दौरान कुछ खास अमल किए जाते हैं। सबसे पहले पांचों वक्त की नमाज पाबंदी से पढ़नी चाहिए। इसके साथ ही रात में तहज्जुद की नफ्ल नमाज पढ़ना बहुत अच्छा माना जाता है। इसके अलावा कुरान शरीफ की तिलावत करना, अल्लाह का जिक्र करना और ज्यादा से ज्यादा दुआ करना भी जरूरी माना गया है। इन दिनों में लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और अल्लाह से रहमत की दुआ करते हैं।

तीसरे अशरे में पढ़ें यह दुआ

हदीस के अनुसार रमजान के आखिरी अशरे में एक खास दुआ पढ़ने की भी सलाह दी गई है।

‘अल्लाहुम्मा इन्नाका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्वा फअफु अन्नी।’

  • अरबी में : اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

इसका मतलब है कि हे अल्लाह, आप माफ करने वाले हैं और माफी को पसंद करते हैं, इसलिए मुझे भी माफ कर दीजिए। यह दुआ पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) द्वारा हजरत आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) को लैलातुल कद्र की रात में पढ़ने के लिए बताई गई थी।

सदका और खैरात का भी होता है महत्व

रमजान के आखिरी अशरे में जरूरतमंदों की मदद करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। इस दौरान लोग सदका और खैरात देते हैं और जकात भी अदा करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों में किए गए अच्छे कामों का सवाब ज्यादा मिलता है। इसलिए कोशिश की जाती है कि ज्यादा से ज्यादा इबादत और नेक काम किए जाएं ताकि रमजान के इस पाक महीने का पूरा फायदा उठाया जा सके।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article