Ramayan Ki Chaupaiyan: सनातन धर्म में रामचरितमानस पढ़ने के कई फायदे बताए गए हैं। कहते हैं जो कोई भी इसका नियमित पाठ करता है उसके जीवन में हमेशा सकारात्मकता बनी रहती है। साथ ही घर परिवार में खुशहाली का माहौल रहता है। इतना ही नहीं रामचरितमानस की कई चौपाइयां कई मंत्रों के जाप के बराबर फल प्रदान करती हैं। आज हम आपको राणायण की कुछ ऐसी ही खास चौपाइयों के बारे में बताएंगे जो आपके दुखी जीवन में सुख की भरमार कर देंगी।
ऐसे लोगों की भगवान खुद करते हैं मदद
नाथ दैव कर कवन भरोसा। सोषिअ सिंधु करिअ मन रोसा॥
कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा।।
रामचरित मानस की ये चौपाई उस समय के बारे में बताती है, जब भगवान राम सागर पार करने के लिए सागर देवता से रास्ता मांगने के लिए ध्यान करने जा रहे थे। उस समय लक्ष्मणजी ने भगवान रामजी को उनकी शक्ति और क्षमता के बारे में याद दिलाते हुए कहा था कि आप स्वयं इतने शक्तिशाली हैं आप चाहें तो एक बाण में समुद्र को सुखा सकते हैं, फिर सागर से अनुनय-विनय क्यों? भगवान राम जानते थे कि वे कौन हैं लेकिन फिर भी इन्होंने शक्ति से पहले शांति से परिस्थितियों का समाधान निकालने की कोशश की और बताया कि एक शक्तिशाली व्यक्ति को संयमी होना भी जरूरी है। इसलिए आप अपने पर भरोसा रखें और शांत रहने की कोशिश करें। आपको परेशानियों से निकलने में ईश्वर स्वयं आपकी सहायता करेंगे। (Also Read- जुबान के जादूगर होते हैं ऐसे लोग, खूब कमाते हैं नाम, मां सरस्वती की पातें हैं विशेष कृपा)
सब ईश्वर की मर्जी है
बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।
जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ।
ये चौपाई रामचरित मानस के बालकांड की है। जिसमें भगवान शिव श्री हरि विष्णु के रामावतार का कारण और उनकी लीला का उद्देश्य समझाते हुए कहते हैं- कोई भी इस भ्रम में न रहे कि वह सर्वज्ञानी है या कोई हमेशा मूर्ख ही रहेगा। भगवान की जब जैसी इच्छा होती है, तब वह प्रत्येक प्राणी को वैसा ही बना देते हैं। इसलिए कभी किसी चीज का अहंकार नहीं करना चाहिए, जो अहंकार करते हैं। वह समाज में कभी आगे नहीं बढ़ पाते।
जा पर कृपा राम की होई
जा पर कृपा राम की होई।
ता पर कृपा करहिं सब कोई॥
जिनके कपट, दम्भ नहिं माया।
तिनके ह्रदय बसहु रघुराया॥
रामायण की इस चौपाई का अर्थ है जिन पर भगवान राम की कृपा होती है, उन्हें कोई सांसारिक दुःख छू तक नहीं सकता। परमात्मा जिस पर कृपा करते है उस पर तो सभी की कृपा अपने आप होने लगती है और जिनके अंदर कपट, पाखंड और माया नहीं होती, उन्हीं के हृदय में रघुपति बसते हैं अर्थात उन्हीं पर प्रभु की कृपा होती है।
बिना सोचे कोई काम न करें
अनुचित उचित काज कछु होई,
समुझि करिय भल कह सब कोई।
सहसा करि पाछे पछिताहीं,
कहहिं बेद बुध ते बुध नाहीं।।
अर्थ: किसी भी कार्य का परिणाम उचित होगा या अनुचित, यह जानकर करना चाहिए, उसी को सभी लोग भला कहते हैं। जो बिना विचारे काम करते हैं वे बाद में पछताते हैं, उनको वेद और विद्वान कोई भी बुद्धिमान नहीं कहता। इसलिए जब में जो भी काम करें वो बेहद सोच विचार करने के बाद ही करें। इससे दुखी नहीं होना पड़ेगा।
