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दुश्मन के ठिकानों पर सटीक वार! रास्ते में बदल सकती है दिशा, कितनी ताकतवर है भारत की स्वदेशी 'प्रलय' मिसाइल?

भारत ने Pralay मिसाइल का परीक्षण किया यह DRDO द्वारा विकसित एक बेहद शक्तिशाली और आधुनिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है, क्या है इसकी क्वासी-बैलिस्टिक तकनीक, रास्ते में दिशा बदलने की क्षमता और प्रमुख खूबियां...

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कितनी ताकतवर है भारत की स्वदेशी 'प्रलय' मिसाइल?
Authored by: रवि वैश्य
Updated Nov 7, 2026, 23:55 IST
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भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 5 नवंबर 2026 को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित 'प्रलय' (Pralay) मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया है। यह परीक्षण सेना के 'User Evaluation Trials' का हिस्सा था। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इंडक्शन Imminent है यानी जल्द होने की संभावना या प्रक्रिया निकट है।

प्रलय भारत की स्वदेशी, जमीन से जमीन पर मार करने वाली (Surface-to-Surface) क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है

प्रलय मिसाइल क्या है? (What is Pralay Missile)

यह पारंपरिक यानी नॉन-न्यूक्लियर वारहेड ले जाने के लिए बनाई गई है।इसका पहला सफल उड़ान परीक्षण 22 दिसंबर 2021 को ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया था। इसका उद्देश्य दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर कम समय में सटीक हमला करने की क्षमता विकसित करना है।

उड़ान के दौरान रास्ता बदलने की क्षमता इसे खास बनाती है

भारत की स्वदेशी प्रलय मिसाइल दुश्मन के सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले की क्षमता को नई धार देती है। 500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली यह क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल एयरबेस, रडार स्टेशन और कमांड सेंटर जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए विकसित की गई है। ठोस ईंधन, मोबाइल लॉन्चर और उड़ान के दौरान रास्ता बदलने की क्षमता इसे खास बनाती है। सबसे बड़ी बात, यह पारंपरिक वारहेड ले जाने वाली मिसाइल है।

प्रयास मिसाइल की अधिकतम रेंज 500 किलोमीटर

प्रयास मिसाइल की अधिकतम रेंज 500 किलोमीटर

कम ऊंचाई पर रहते हुए भी यह अपना रास्ता बदल सकती है

इसकी सबसे खास बात यह है कि उड़ान के दौरान कम ऊंचाई पर रहते हुए भी यह अपना रास्ता बदल सकती है। पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल के उलट जो एक निश्चित रास्ते पर चलती हैं प्रलय की यह उड़ान क्षमता दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इस ट्रैक करना या रोकना काफी मुश्किल बना देती है।

कितनी है प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता?

प्रलय मिसाइल की सार्वजनिक रूप से बताई गई मारक क्षमता लगभग 150 से 500 किलोमीटर है

  • अधिकतम रेंज-500 किलोमीटर
  • न्यूनतम रेंज- लगभग 150 किलोमीटर
इसकी वास्तविक मारक दूरी इस बात पर निर्भर करती है कि मिसाइल कितना वजन यानी पेलोड लेकर उड़ रही है। सामान्य तौर पर अधिक वजन वाला वारहेड ले जाने पर रेंज कम हो सकती है तो 500 किलोमीटर की अधिकतम रेंज को हर पेलोड कॉन्फिगरेशन के लिए समान नहीं माना जा सकता है।

कितनी घातक है प्रलय मिसाइल की वारहेड क्षमता?

प्रलय को अलग-अलग तरह के पारंपरिक वारहेड ले जाने के लिए विकसित किया गया है। रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक, इसकी पेलोड क्षमता लगभग 350 से 1,000 किलोग्राम तक बताई गई है। अलग-अलग तरह के वारहेड के इस्तेमाल से इसे विभिन्न सैन्य लक्ष्यों के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।इसका इस्तेमाल एयरबेस, रनवे, रडार स्टेशन, कमांड और कंट्रोल सेंटर तथा अन्य महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों जैसे लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है।

इसके संभावित लक्ष्य क्या हैं?

  • दुश्मन के सैन्य ठिकाने
  • एयरबेस और रनवे
  • रडार स्टेशन
  • कमांड और कंट्रोल सेंटर
  • सैन्य लॉजिस्टिक्स और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान

इसे क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल (Quasi Ballistic Missile) कहते हैं

प्रलय की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका क्वासी-बैलिस्टिक होना है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा बनाई गई प्रलय एक कम दूरी की, सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी बैलिस्टिक मिसाइल है, इसे स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। ये पूरी तरह बैलिस्टिक रास्ते पर नहीं जाती, बीच हवा में दिशा बदल सकती है। इसलिए दुश्मन का एयर डिफेंस इसे रोक नहीं पाता। पृथ्वी और अग्नि मिसाइल की टेक्नोलॉजी से बनी है। इसमें कोई विदेशी पार्ट नहीं है। DRDO ने इसे खास तौर पर कन्वेंशनल वॉरफेयर के लिए बनाया है।

मिसाइल को सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने की प्रक्रिया अब नजदीक

मिसाइल को सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने की प्रक्रिया अब नजदीक

यही खासियत इसे पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग बनाती है

आम बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च होने के बाद एक निर्धारित घुमावदार रास्ते पर आगे बढ़ती है। उसका रास्ता काफी हद तक अनुमानित हो सकता है। इसके विपरीत, क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल अपेक्षाकृत कम ऊंचाई वाले रास्ते पर उड़ान भर सकती है और उड़ान के दौरान अपनी दिशा में बदलाव कर सकती है।इससे दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसके संभावित रास्ते का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है। प्रलय केवल एक तय रास्ते पर उड़कर लक्ष्य तक नहीं पहुंचती, बल्कि उड़ान के दौरान रास्ता बदलने की क्षमता भी रखती है। यही विशेषता इसे पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग बनाती है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस सफल परीक्षण के बाद मिसाइल को सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने की प्रक्रिया अब नजदीक है। यानी इसे सेना में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण चरण पूरा हो चुका है, लेकिन इसे पहले से ही पूरी तरह ऑपरेशनल घोषित करना सही नहीं होगा।

भारत के लिए क्यों अहम है प्रलय?

भारत की चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं के संदर्भ में भी इसकी रणनीतिक अहमियत है। प्रलय भारत की पारंपरिक सैन्य हमले की क्षमता को मजबूत कर सकती है। इसकी 500 किलोमीटर तक की रेंज और मोबाइल लॉन्चिंग क्षमता के कारण सेना को दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलता है। यह मिसाइल दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस, रडार और कमांड सेंटर जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों के खिलाफ पारंपरिक हमले की क्षमता बढ़ाने के लिए विकसित की गई है।

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