अध्यात्म

Pradosh Vrat September 2024: सितंबर में प्रदोष व्रत कब है, नोट कर लें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Pradosh Vrat September 2024: प्रदोष व्रत एकादशी के बाद पड़ता है। 28 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी मनाई जाएगी। जानिए इसके बाद प्रदोष व्रत किस दिन पड़ेगा।

Image

Pradosh Vrat September 2024

Pradosh Vrat September 2024: सितंबर में रवि प्रदोष व्रत पड़ेगा। इसे भानु प्रदोष व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को करने से लंबी आयु और सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही रविवार प्रदोष व्रत का सीधा संबंध सूर्य देव से भी माना जाता है। कहते हैं जिनकी कुंडली में सूर्य खराब हो उन्हें ये व्रत जरूर रखना चाहिए। चलिए आपको बताते हैं सितंबर में रवि प्रदोष व्रत कब पड़ रहा है।

सितंबर में प्रदोष व्रत कब है 2024 में (September Mein Pradosh Vrat Kab Hai 2024)

29 सितंबर को रवि प्रदोष व्रत पड़ेगा। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:09 से रात 08:34 बजे तक रहेगा। प्रदोष व्रत तिथि का प्रारंभ 29 सितंबर की शाम 04:47 से होगा और इसका समापन 30 सितंबर की शाम 07:06 बजे होगा।

रवि प्रदोष व्रत का महत्व (Ravi Pradosh Vrat Significance)

कहते हैं रवि प्रदोष व्रत को करने से व्यक्ति को सुख, शांति और लंबी आयु की प्राप्ति होती है। इसके अलावा कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत हो जाती है। जिससे व्यक्ति के नाम, यश और सम्मान में वृद्धि होती है।

प्रदोष व्रत की विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi In Hindi)

प्रदोष व्रत की पूजा मुख्य रूप से शाम में की जाती है। पूजा से पहले स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान शिव को बेल पत्र, फूल, धतूरा, भांग और गंगाजल चढ़ाएं। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और विधि विधान पूजा करें। इस व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता है। हालांकि फलाहार ले सकते हैं।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

और पढ़ें
End of Article