क्या महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक ही दिन है? नोट करें फाल्गुन मास के पहले प्रदोष व्रत की तारीख और मुहूर्त
- Authored by: Srishti
- Updated Feb 10, 2026, 08:43 AM IST
February 2026 Mein Pradosh Vrat Kab Hai (फरवरी में प्रदोष व्रत 2026 में कब है): हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व है। फाल्गुन मास का पहला प्रदोष कब है, ये आप यहां से जान सकते हैं। क्या महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक ही दिन है? यहां इस सवाल का जवाब भी बताया गया है।
क्या महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक ही दिन है फरवरी 2026 में (AI Generated)
February 2026 Mein Pradosh Vrat Kab Hai (फरवरी में प्रदोष व्रत 2026 में कब है): प्रत्येक महीने में दो पक्ष होते हैं, एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष। इन दोनों ही पक्षों की त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। अभी फरवरी का महीना चल रहा है, तो इस महीने का प्रदोष व्रत कब है इसबात को लेकर काफी कंफ्यूजन है। फरवरी में आने वाला प्रदोष व्रत फाल्गुन मास का पहला प्रदोष भी होगा तो ऐसे में आप यहां से इसकी डेट जान सकते हैं।
प्रदोष व्रत कब है फरवरी 2026 में?
त्रयोदशी तिथि फरवरी 14, 2026 को 04:01 पी एम बजे प्रारम्भ हो रही है और फरवरी 15, 2026 को 05:04 पी एम बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी। ऐसे में 14 फरवरी 2026 को ही प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। इस दिन शनिवार है, इसलिए शनि प्रदोष व्रत कहेंगे।
क्या महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक ही दिन है?
फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे पर होगी। इस तिथि का समापन 16 फरवरी की शाम 5:34 बजे होगा। ऐसे में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इसलिए साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत और प्रदोष व्रत अलग-अलग दिन रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त 2026-
- ब्रह्म मुहूर्त- 05:18 AM से 06:09 AM
- अभिजित मुहूर्त- 12:13 PM से 12:58 PM
- गोधूलि मुहूर्त- 06:08 PM से 06:34 PM
- अमृत काल- 01:03 PM से 02:47 PM
- प्रातः सन्ध्या- 05:43 AM से 07:00 AM
- विजय मुहूर्त- 02:27 PM से 03:12 PM
- सायाह्न सन्ध्या- 06:10 PM से 07:27 PM
- निशिता मुहूर्त- 12:09 AM से 01:01 AM, फरवरी 15
प्रदोष व्रत पूजा विधि-
शनि प्रदोष व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर सभी नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य भगवान को अर्ध्य दें और शिव जी की उपासना करें। इस दिन दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। उसके बाद शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार, पुष्प, भांग, आदि अर्पित करें। वैसे तो प्रदोष व्रत में शिव जी पूजा होती है लेकिन इस बाद शनिवार है इसलिए शिव जी के साथ शनिदेव की भी पूजा होगी। सूर्यास्त के बाद भगवान शिव और शनिदेव की विधि विधान पूजा करें। तिल के तेल का दीपक जलाकर शनिदेव को अर्पित करें। फिर ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। शनि प्रदोष व्रत की कथा सुनें। शाम में आरती अर्चना के बाद फलाहार करें। अगले दिन पूजा करने के बाद व्रत खोलें और सबसे पहले ब्राह्मणों और गरीबों को दान दें। इसके बाद भोजन यानी पारण करें।
