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Pongal 2023 Date: क्यों और कैसे मनाया जाता है पोंगल का त्योहार, जानें इस पर्व से जुड़ी 10 रोचक बातें

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Jan 13, 2023, 01:42 PM IST

Essay On Pongal 2023: पोंगल भारत के तमिलनाडू राज्य में मनाया जाने वाला त्यौहार है जिसका तमिल के हिन्दू लोगों में बहुत महत्व होता है। ये विशेष रूप से किसानी त्यौहार है। जिसे हर साल जनवरी के मध्य में मनाया जाता है।

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Pongal 2023: जानें पोंगल का त्योहार क्यों और कैसे मनाया जाता है

Pongal Festival 2023 Date: पोंगल का त्योहार भारत के तमिलनाडू राज्य में मनाया जाता है जिसका तमिल के हिन्दू लोगों में बहुत मह्त्व है। विशेष रूप से ये किसानी त्यौहार है जिसे हर साल जनवरी माह के मध्य में मनाया जाता है। इसी दौरान उत्तर भारत के राज्यों में मकर संक्रांति और लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है। इसे लोग अपनी अच्छी फसल होने पर बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाते है। ये त्योहार पूरे चार दिनों तक चलता है। साल 2023 में ये त्योहार 15 जनवरी से 18 जनवरी तक मनाया जाएगा।

1. ये त्योहार मकर संक्रांति के आस-पास मनाया जाता है। ये 4 दिन तक चलता है। लेकिन मुख्य पर्व पौष मास की प्रतिपदा को मनाया जाता है।

2. पोंगल का तमिल में अर्थ उफान या विप्लव होता है। पोंगल से पहले अमावस्या को लोग बुरी रीतियों का त्यागकर अच्छी चीजों को ग्रहण करने की प्रतिज्ञा लेते हैं। इस कार्य को पोही कहा जाता है।

3. ये उत्सव 4 दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन भोगी, दूसरे दिन सूर्य, तीसके दिन मट्टू और चौथे दिन कन्या पोंगल मनाया जाता है।

4. पहले दिन भोगी पोंगल में इन्द्रदेव की पूजा होती है, दूसरे दिन सूर्यदेव की, तीसरे दिन नदी या बैल की पूजा और चौथे दिन कन्या की पूजा होती है।

5. दक्षिण भारत में धान की फसल समेटने के बाद लोग खुशी प्रकट करने के लिए ये त्योहार मनाते हैं और ईश्वर से आने वाली फसल अच्छी होने की प्रार्थना करते हैं।

6. दक्षिण भारत में पोंगल से नववर्ष आरंभ माना जाता है।

7. पोंगल के पहले दिन कूड़ा-करकट एकत्र करके जलाया जाता है दूसरे दिन मां लक्ष्मी, तीसरे दिन पशुधन की पूजा होती है। चौथे दिन मां काली की पूजा होती है।

8. पोंगल पर घर के बाहर रंगोली बनाई जाती है और नए वस्त्र और बर्तन खरीदते हैं। बैलों को गायों के सींग रंगे जाते हैं।

9. इस दिन विशेष तौर पर खीर बनाई जाती है। इस त्योहार पर लोग चावल, दूध, घी, शकर से भोजन तैयार कर सूर्यदेव को भोग लगाते हैं।

10. पोंगल के दिन सांडों-बैलों के साथ भाग-दौड़कर उन्हें नियंत्रित करने का जश्न भी होता है।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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