अध्यात्म

Pithori Amavasya 2024: पिठोरी अमावस्या या पोलाला अमावस्या की पूजा विधि और मुहूर्त यहां देखें

Pithori Amavasya 2024 Date, Time And Puja Vidhi In Hindi: पिठोरी अमावस्या भाद्रपद अमावस्या को मनाई जाती है। इसलिए इसे भाद्रपद अमावस्या और पोलाला अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

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Pithori Amavasya 2024

Pithori Amavasya 2024 Time And Puja Vidhi In Hindi (पिठोरी अमावस्या कब है 2024 में): हिंदू धर्म में पिठोरी अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। जिसे पोलाला अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। ये अमावस्या प्रत्येक वर्ष भादो कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ती है। इस दिन गंगा स्नान करने और पित्तरों की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने बच्चों के सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन मां दुर्गा की पूजा की जाती है। चलिए जानते हैं इस साल पिठोरी यानि पोलाला अमावस्या कब है और इसकी पूजा विधि क्या है।

पिठोरी अमावस्या 2024 तिथि व मुहूर्त (Pithori Amavasya 2024 Date And Time)

पिठोरी अमावस्या 2 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:41 से रात 08:57 बजे तक रहेगा। अमावस्या तिथि का प्रारम्भ 2 सितम्बर 2024 की सुबह 05:21 बजे से होगा और इसकी समाप्ति 3 सितंबर की सुबह 07:24 बजे होगी।

पिठोरी आमवस्या पूजा विधि (Pithori Amavasya Puja Vidhi In Hindi)

  • पिठोरी आमवस्या का व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ देती हैं। इसके बाद वे अपने पितरों की पूजा करती हैं।
  • इस अमावस्या पर पिंड दान और तर्पण को विशेष महत्व माना जाता है।
  • इस दिन कुछ विशेष क्षेत्रों में मां दुर्गा के योगिनी रूप की पूजा अर्चना की जाती है।
  • इस दिन मां दुर्गा को सोने के आभूषण चढ़ाए जाते हैं।
  • इस दिन शाम के समय सुहागिन महिलाओं को देवी मां को सुहाग का सामान चढ़ाना चाहिए।
  • इस दिन पंडितों को भोजन भी जरूर कराना चाहिए।

पिठोरी अमावस्या का महत्व (Pithori Amavasya Ka Mahatva)

पिठोरी आमवस्या के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति और बच्चों के लिए व्रत रखती हैं। दक्षिण भारत में इस दिन को पोलाला आमवस्या के नाम से मनाया जाता है। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत रखने से बच्चों के जीवन में खुशहाली सदैव बनी रहती है। बता दें पिठोरी अमावस्या को विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और ओड़िसा राज्य में मनाया जाता है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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