अध्यात्म

Odisha Witch Temple: ओडिशा का रहस्यमयी चौसठ योगिनी मंदिर, जानें बिना छत का ये मंदिर क्यों है इतना खास?

Odisha Witch Temple: ओडिशा का रहस्यमयी चौसठ योगिनी मंदिर बेहद खास है। लोग इसे एक रहस्यमयी और अलग तरह का मंदिर मानते हैं। आध्यात्मिक रूप से इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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ओडिशा का रहस्यमयी चौसठ योगिनी मंदिर

Odisha Witch Temple: ओडिशा के हिरापुर में एक बहुत ही रहस्यमयी और खास मंदिर है, जिसे चौसठ योगिनी मंदिर कहा जाता है। ये मंदिर भुवनेश्वर से लगभग 20 किलोमीटर दूर है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये बहुत छोटा है और इसकी कोई छत नहीं है। इसी वजह से लोग इसे एक रहस्यमयी और अलग तरह का मंदिर मानते हैं। कुछ स्थानीय लोग तो इसे Witch Temple (जादूगर मंदिर) भी कहते हैं। ये मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं है, बल्कि भारत की पुरानी संस्कृति, रहस्य और इतिहास को दिखाने वाला एक बहुत खास स्थल है। हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं।

64 योगिनियों का महत्व

ऐसा माना जाता है कि ये मंदिर 9वीं सदी में बनाया गया था और इसे भौमकार वंश की रानी हिरादेवी ने बनवाया था। ये मंदिर देवी दुर्गा के 64 रूपों यानी 64 योगिनियों को समर्पित है। मान्यता है कि जब एक बड़े राक्षस का वध करना था, तब देवी दुर्गा ने अपने 64 रूप बनाए थे।

बिना छत का रहस्य

मंदिर की एक और खासियत है वो है इसके बिना छत का रहस्य। यहां हर योगिनी किसी ना किसी देवी के रूप का प्रतिनिधित्व करती है, जैसे ब्रह्माणी, वैष्णवी, महेश्वरी आदि। इस मंदिर की एक और खास बात इसकी खुली छत है। यानी यहां कोई छत नहीं है। कहा जाता है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि योगिनियां यहां आसानी से आ-जा सकें। इसकी संरचना को आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

इतिहास की बात करें तो उस समय ओडिशा में तांत्रिक परंपराएं और बौद्ध धर्म का प्रभाव काफी बढ़ रहा था। इसी दौरान हिंदू और बौद्ध परंपराओं का मिश्रण देखने को मिलता है, जिसकी झलक इस मंदिर में भी दिखाई देती है। बहुत समय तक ये मंदिर जमीन में दबा रहा और 1953 में इसे फिर से खोजा गया। बाद में पुरातत्व विभाग ने इसे सुरक्षित और संरक्षित किया।

हर साल दिसंबर में यहां चौसठ योगिनी महोत्सव भी होता है, जिसमें देशभर से कलाकार आकर नृत्य और संगीत प्रस्तुत करते हैं। ये सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि एक बड़ा सांस्कृतिक आयोजन भी बन चुका है। कुल मिलाकर, ये मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं है, बल्कि भारत की पुरानी संस्कृति, रहस्य और इतिहास को दिखाने वाला एक बहुत खास स्थल है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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