UPSC Centenary Celebrations: संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC ने आज 1 अक्टूबर 2026 को अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए हैं। यह आयोग देश में सरकारी सेवाओं के लिए होने वाली कई अहम भर्तियों और परीक्षाओं का आयोजन करता है। सिविल सेवा में जाने वाले युवाओं के लिए यह आयोग बड़ा रास्ता बन चुका है। UPSC Centenary Celebrations के इस माहौल में हम जानेंगे कि इस आयोग का सफर आज से करीब एक सदी पहले शुरू हुआ था और इसका सीधा कनेक्शन लंदन शहर से है।
'पब्लिक सर्विस कमीशन' का इतिहास
भारत में सिविल सर्विस परीक्षा का इतिहास पुराना है। 1855 में 'इंडियन सिविल सर्विस' परीक्षा की शुरुआत लंदन में हुई थी। इसके बाद 1922 में पहली बार ICS परीक्षा भारत में इलाहाबाद में आयोजित की गई।
'पब्लिक सर्विस कमीशन' की शुरुआत
1 अक्टूबर 1926 को 'पब्लिक सर्विस कमीशन' की स्थापना हुई। आगे चलकर 1937 में इसका नाम Federal Public Service Commission कर दिया गया। संविधान लागू होने के बाद 1950 में इसे 'यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन' यानी UPSC के रूप में नया नाम मिला।
समय के साथ बढ़ता गया UPSC का दायरा
UPSC का काम केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित नहीं है। आयोग केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया संचालित करने के साथ नियुक्ति, प्रमोशन और सेवा से जुड़े मामलों में सलाह भी देता है।
1979 में सिविल सर्विस परीक्षा में प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू वाले तीन चरणों में भर्ती कराने का प्रस्ताव आया, जो आगे चलकर चयन प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन गया।
परीक्षा व्यवस्था का विस्तार
UPSC के 100 साल के सफर में परीक्षा व्यवस्था का विस्तार भी देखने को मिला है। 1950 में जहां केवल 8 परीक्षा केंद्र थे, वहीं 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 86 हो गई है।
महिला उम्मीदवारों की भागीदारी भी बढ़ी। 1952 में केवल 3 महिलाओं की सिफारिश हुई थी, जबकि 2025 में यह संख्या 299 तक पहुंच गई। इसी तरह 1950-51 में 42,727 आवेदन आए थे, जबकि 2022-23 में आवेदन का आंकड़ा 45 लाख से अधिक हो गया।
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