Navratri 2026 Date October: हिंदू धर्म में नवरात्रि (Navratri) को शक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। वर्ष भर आने वाली चार नवरात्रियों में अश्विन माह की शारदीय नवरात्रि विशेष महत्व रखती है। इस दौरान मां दुर्गा (Maa Durga) के नौ अलग अलग रूपों की पूजा होती है। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि अक्टूबर महीने में आएंगे। यहां देखें कि अक्टूबर 2026 नवरात्र का पूरा कैलेंडर।
अक्टूबर 2026 में नवरात्र कब से शुरू होंगे
पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि 12 अक्टूबर 2026, सोमवार से आरंभ होगी। इसी दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के साथ मां दुर्गा का आवाहन किया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाली यह पूजा 20 अक्टूबर 2026 को महानवमी के साथ पूर्ण होगी, जबकि 21 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी या दशहरा मनाया जाएगा। नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप को समर्पित होता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी पर आकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
अक्टूबर 2026 में शारदीय नवरात्र कब से कब तक हैं
| दिन | तारीख | वार | मां दुर्गा का स्वरूप | विशेष महत्व |
|---|---|---|---|---|
| पहला दिन | 12 अक्टूबर 2026 | सोमवार | मां शैलपुत्री | घटस्थापना, नवरात्रि आरंभ |
| दूसरा दिन | 13 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | मां ब्रह्मचारिणी | तप और साधना |
| तीसरा दिन | 14 अक्टूबर 2026 | बुधवार | मां चंद्रघंटा | साहस और शांति |
| चौथा दिन | 15 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | मां कूष्मांडा | सुख-समृद्धि की कामना |
| पांचवां दिन | 16 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | मां स्कंदमाता | परिवार कल्याण |
| छठा दिन | 17 अक्टूबर 2026 | शनिवार | मां कात्यायनी | मनोकामना पूर्ति |
| सातवां दिन | 18 अक्टूबर 2026 | रविवार | मां कालरात्रि | भय और नकारात्मकता का नाश |
| आठवां दिन | 19 अक्टूबर 2026 | सोमवार | मां महागौरी | दुर्गा अष्टमी, कन्या पूजन |
| नौवां दिन | 20 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | मां सिद्धिदात्री | महानवमी, हवन पूजन |
Navratri 2026 Date October Dussehra
शारदीय नवरात्र के नौवें दिन के बाद विजयादशमी यानी दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। शारदीय नवरात्र 2026 के कैलेंडर में दशहरा का पर्व 21 अक्टूबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय के तौर पर मनाया जाता है।
नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें
नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन, मन-वचन की पवित्रता और नियमित पूजा को अत्यंत शुभ माना गया है। कई लोग इन दिनों नए कार्य, व्यापार या आध्यात्मिक साधना की शुरुआत भी करते हैं। घर की साफ-सफाई, दीपक जलाना और कन्या पूजन करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
नवरात्रि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
शारदीय नवरात्रि केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा जगाने का पर्व भी है। पुराणों के अनुसार मां दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध कर दशमी के दिन विजय प्राप्त की थी। यही कारण है कि यह पर्व असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक माना जाता है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी अलग पहचान देखने को मिलती है। गुजरात में गरबा और डांडिया की धूम रहती है, पश्चिम बंगाल में भव्य दुर्गा पूजा पंडाल सजते हैं, उत्तर भारत में रामलीला और रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है। इस तरह नवरात्रि आध्यात्मिकता और उत्सव दोनों का अद्भुत संगम बन जाती है।
नवरात्रि में पूजा और व्रत की परंपरा
नवरात्रि के दौरान भक्त सात्विक जीवन शैली अपनाते हैं। कई लोग नौ दिनों का व्रत रखते हैं, घरों में जौ बोते हैं और दुर्गा सप्तशती या देवी पाठ का पाठ करते हैं। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कन्याओं में मां दुर्गा का स्वरूप विराजमान होता है।
