अध्यात्म

Mandir Darshan: शिवनगरी का तिलभांडेश्वर मंदिर, यहां तिल जितना बढ़ता है शिवलिंग, दर्शन से अश्वमेध यज्ञ का पुण्य

धर्म शास्त्र में इस मंदिर के बारे में कथा उल्लेखित है, जिसके अनुसार भगवान शिव ने ऋषि को वरदान दिया था कि उनका शिवलिंग कलयुग में हर साल तिल जितना बढ़ेगा।

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सावन विशेष: वाराणसी का तिलभांडेश्वर मंदिर (Photo: Apna Kashi/facebook)

Tilbhandeshwar Temple: सावन का पावन माह चल रहा है। ऐसे में शिवनगरी काशी, जहां की हर गली में शिव की महिमा गूंजती है, वहां कई मंदिर हैं, जो न केवल चमत्कार की कहानी कहते हैं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच के रिश्ते को भी दिखाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर है, तिलभांडेश्वर महादेव का, जो एक अनूठा चमत्कार समेटे हुए है। इस मंदिर का स्वयंभू शिवलिंग हर साल मकर संक्रांति पर तिल के बराबर बढ़ता है, जिसका उल्लेख शिव पुराण के काशी खंड में मिलता है।

मान्यता है कि यहां दर्शन करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है, जो भक्तों की आस्था को और गहरा करता है। काशी विश्वनाथ मंदिर से महज 500 मीटर दूर, पांडे हवेली में स्थित यह मंदिर ऋषि विभांड की तपस्थली पर बना है।

यह क्षेत्र ऋषि विभांड की तप स्थली थी और यहीं पर वह ध्यान लगाकर पूजा करते थे। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें वरदान दिया था कि यह शिवलिंग (तिलभांडेश्वर) हर साल तिल के बराबर बढ़ता रहेगा। तिल के बराबर बढ़ते रहने से और ऋषि विभांड के नाम पर इस मंदिर को तिलभांडेश्वर नाम मिला है।

धर्म शास्त्र में इस मंदिर के बारे में कथा उल्लेखित है, जिसके अनुसार भगवान शिव ने ऋषि को वरदान दिया था कि उनका शिवलिंग कलयुग में हर साल तिल जितना बढ़ेगा।

तिलभांडेश्वर मंदिर में भक्त कालसर्प दोष की शांति के लिए भी पूजा करते हैं। मंदिर में भोलेनाथ के अलावा कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

काशीवासियों के साथ ही देश-दुनिया से लोग बाबा के दर्शन को यहां पहुंचते हैं। काशी की रहने वाली श्रद्धालु रीता त्रिपाठी ने बताया, “हम लोग काफी समय से मंदिर आते रहे हैं। तिलभांडेश्वर हर साल तिल के बराबर बढ़ता है। सावन में पूरे माह में बाबा के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। बाबा स्वयंभू हैं और इनके दर्शन करने से पाप मिट जाते हैं और अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।”

उत्तर प्रदेश, पर्यटन विभाग के अनुसार, काशी नगरी में हर शिवलिंग का अपना अलग महात्म्य है। यहां अति प्राचीन तिलभांडेश्वर महादेव का पौराणिक इतिहास भी है। यह मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर, पांडेय हवेली के पास स्थित है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव का शिवलिंग विराजमान है। यहां सावन के साथ ही महाशिवरात्रि और प्रदोष पर भी भक्तों की भीड़ लगती है।

सावन, महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त तिल, जौ और जल चढ़ाकर कालसर्प दोष, ग्रह-नक्षत्रों के कष्टों से मुक्ति पाते हैं। मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी मंत्रमुग्ध करती हैं।

(इनपुट - आईएएनएस)

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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