Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पावन पर्व महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी प्रसिद्ध है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन गुरु का सम्मान और पूजा करने से ज्ञान, विवेक, सफलता तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आज 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार इस दिन पूर्णिमा तिथि पूरे दिन प्रभावी रहेगी, इसलिए गुरु पूजन, वेदव्यास पूजन, भगवान विष्णु की आराधना और दान-पुण्य का विशेष महत्व रहेगा। आइए जानते हैं गुरु पूजन की विधि और शुभ मुहूर्त...
गुरु पूर्णिमा के पूजन का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त से ही पूजा-पाठ प्रारंभ किया जा सकता है। इसके साथ ही यदि आप विशेष मुहूर्त (Guru Purnima Puja Time) में पूजा करना चाहें तो अभिजित मुहूर्त (दोपहर 11:59 बजे से 12:54 बजे तक) शुभ माना गया है। इसके अलावा प्रातःकाल 5:40 से 9:05 बजे तक भी पूजन करना शुभ फलदायी रहेगा।
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गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि
गुरु पूर्णिमा की पूजा सरल होने के साथ-साथ श्रद्धा और समर्पण की भावना से की जाती है।
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने गुरु का चित्र या आसन स्थापित करें।
- दीपक और धूप जलाकर पूजा का शुभारंभ करें।
- चंदन, अक्षत, पुष्प, तुलसी दल और फल अर्पित करें।
- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' अथवा गुरु मंत्र का जाप करें।
- यदि गुरु साक्षात उपस्थित हों तो उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और यथाशक्ति दक्षिणा अर्पित करें।
- अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धार्मिक पुस्तकों का दान करें।
गुरु पूर्णिमा पर क्या करें
गुरु पूर्णिमा का मूल संदेश केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में ज्ञान, सदाचार, विनम्रता और कृतज्ञता को अपनाने का भी है। इस पावन अवसर पर अपने गुरु, शिक्षक और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले सभी व्यक्तियों का सम्मान करें तथा महर्षि वेदव्यास का स्मरण करें। श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें, माता-पिता एवं बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करें और यदि संभव हो तो किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की शिक्षा में सहयोग करें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसे सत्कर्म करने से गुरु कृपा प्राप्त होती है और जीवन में ज्ञान, सुख, समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
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गुरु पूर्णिमा पर कौन सी सावधानी रखें
धर्म शास्त्रों में गुरु पूर्णिमा के दिन कुछ खास बातों से बचने की भी सलाह दी गई है। आप इस दिन कुछ बातों का ख्याल रख सकते हैं।
- गुरु या किसी बड़े का अपमान न करें।
- क्रोध, कटु वचन और विवाद से दूर रहें।
- नशा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- झूठ बोलने या किसी को कष्ट पहुंचाने से बचें।
- बिना श्रद्धा के केवल औपचारिक पूजा करने से बचें।
गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में गुरु को भगवान (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के समान सम्मान दिया गया है। गुरु ही अज्ञान के अंधकार से ज्ञान का प्रकाश दिखाते हैं और जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। इसलिए गुरु पूर्णिमा का दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का नहीं, बल्कि अपने जीवन में ज्ञान, अनुशासन, विनम्रता और कृतज्ञता को अपनाने का भी अवसर माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से गुरु का पूजन, भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है, मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि के साथ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा को भारतीय संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्वों में एक माना जाता है
